Emergency Fund Rule India: नौकरीपेशा हो या बिजनेस वाले किन्हीं को भी अचानक से पैसों की जरूरत पड़ सकती है. निवेश की आदत आपको इन जरूरतों को पूरा करने में मदद करता है. हालांकि, फाइनेंस के जानकार हर व्यक्ति को अपनी जरूरतों के अनुसार इमरजेंसी फंड बनाने की सलाह देते हैं. क्योंकि नौकरी छूटने और बिजनेस में उतार-चढ़ाव का खतरा हमेशा बना ही रहता है.
आमदनी रुक जाती है पर खर्च पहले की तरह ही जारी रहते हैं, ऐसे में आपका बनाया हुआ इमरजेंसी फंड सबसे मददगार साथी साबित होता है. आइए जानते हैं, वर्क कल्चर और आवश्यकताओं के अनुसार कितना इमरजेंसी फंड होना चाहिए……
इमरजेंसी फंड बनाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
इमरजेंसी फंड का पैसा सभी लोगों के लिए एक जैसी नहीं होता है. यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी आय कितनी है. नौकरी या कारोबार कितना स्थिर है और परिवार में कितने लोगों की जिम्मेदारी आप पर है.
बहुत कम इमरजेंसी फंड रखने से मुश्किल समय में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. इसलिए इन बातों को ध्यान में रखकर ही इमरजेंसी फंड बनानी चाहिए.
3 और 6 महीने का इमरजेंसी फंड
3 महीने के खर्च के बराबर का इमरजेंसी फंड उन लोगों का बनाना चाहिए, जो अविवाहित हो. साथ ही जिनके ऊपर कर्ज या ईएमआई का बोझ नहीं है. ऐसे लोग 3 महीने का इमरजेंसी फंड बना सकते है. इस फंड से लगभग सारी जरूरतों को आसानी से पूरा किया जा सकता है.
वहीं जो लोग परिवार के साथ रहते हैं, उनके लिए ज्यादा सुरक्षा जरूरी होती है. ऐसे में लगभग 6 महीने के खर्च के बराबर का इमरजेंसी फंड रखना बेहतर माना जाता है. ताकि किराया या EMI, राशन, यूटिलिटी बिल, स्कूल फीस, बीमा और मेडिकल जरूरतों जैसी जिम्मेदारियां को पूरा किया जा सके.
12 महीने का इमरजेंसी फंड
अगर आप आप नौकरी नहीं करते और बिजनेस भी स्थिर नहीं है तो, आपको कम से कम 9 से 12 महीने का इमरजेंसी फंड बनाना चाहिए. क्योंकि परिवार आप पर पूरी तरह से आश्रित है और आपकी आमदनी अगर फिक्स न हो तो बिना इमरजेंसी फंड के आप परेशानी में पड़ सकते हैं.

