Frequent Urination Causes: पानी पीते ही भागते हैं टॉयलेट, एक्सपर्ट से जानें क्या ऐसा होना नॉर्मल या किसी बीमारी का संकेत?

सतीश कुमार
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Is Frequent Urination After Drinking Water Normal:  मान लीजिए कि आप ऑफिस में हैं या किसी जरूरी प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं. इस दौरान आपने आधा या एक गिलास पानी पिया और ठीक 15 मिनट भी नहीं हुए कि आपको भागकर टॉयलेट जाना पड़ा. एक-दो बार यह स्थिति हो तो समझ में आता है, लेकिन अगर आपके साथ ऐसा बार-बार हो रहा है, तो मन में सवाल उठना लाजमी है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? अगर आपके साथ भी ऐसी स्थिति बन रही है, तो घबराएं नहीं. चलिए, आपको बताते हैं कि इस स्थिति से निपटने के लिए आपको क्या करने की जरूरत है और इस पर एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं.

क्या हो सकते हैं कारण?

देवघर स्थित मधुमेह क्लिनिक के यूरोलॉजिस्ट डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि बार-बार यूरिन आने का एक आम कारण ओवरएक्टिव ब्लैडर हो सकता है. इसमें ब्लैडर की मांसपेशियां जरूरत से ज्यादा सिकुड़ने लगती हैं, जिससे ब्लैडर भरा न होने पर भी तेज यूरिन की इच्छा होती है. इसके अलावा यूरिन इंफेक्शन, चाय-कॉफी या शराब से होने वाली जलन, अनियंत्रित ब्लड शुगर, तनाव के कारण ब्लैडर की संवेदनशीलता बढ़ना या बहुत कम समय में ज्यादा पानी पी लेना भी वजह हो सकता है. जब कोई व्यक्ति एक साथ बहुत ज्यादा पानी पी लेता है, तो किडनी तेजी से अतिरिक्त पानी को फिल्टर करने लगती है, जिससे पेशाब बार-बार आता है. दिनभर में पानी को थोड़े-थोड़े अंतराल पर पीने से यह समस्या अक्सर कम हो जाती है.

कब हो सकता है खतरे का संकेत?

अगर बार-बार यूरिन आने के साथ जलन, दर्द, पेशाब में खून, निचले पेट में परेशानी, बुखार, अचानक तेज पेशाब लगना या रात में बार-बार उठकर टॉयलेट जाना पड़े, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए. ये लक्षण इंफेक्शन, ब्लैडर में सूजन, पुरुषों में प्रोस्टेट की समस्या या डायबिटीज जैसी मेटाबॉलिक बीमारियों की ओर इशारा कर सकते हैं. इसके अलावा उम्र बढ़ने के साथ ब्लैडर की क्षमता और नियंत्रण में बदलाव आ सकता है. वहीं तनाव और चिंता भी ब्लैडर को ज्यादा संवेदनशील बना देते हैं, जिससे कम पेशाब बनने पर भी बार-बार पेशाब की तीव्र इच्छा महसूस होती है.

क्या करें जिससे राहत मिले?

सबसे पहले यह देखें कि आप कितना और कितनी तेजी से पानी पी रहे हैं. चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक्स जैसे ब्लैडर को परेशान करने वाले पेय कम करें. तय समय पर पेशाब करने की आदत डालें और “जस्ट इन केस” टॉयलेट जाने से बचें. पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज भी ब्लैडर कंट्रोल बेहतर करने में मददगार हो सकती हैं।

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.