Google की नजर आपके पुराने फोन पर! जानिए कैसे बनेगा AI डेटा सेंटर का हिस्सा


Show Quick Read

Key points generated by AI, verified by newsroom

  • यह ई-कचरा घटाएगा, शिक्षण-अनुसंधान में उपयोग होगा।

Google AI: आज के समय में लोग हर कुछ साल में अपना स्मार्टफोन बदल लेते हैं. पुराने फोन अक्सर घर के किसी दराज में पड़े रहते हैं या फिर ई-वेस्ट का हिस्सा बन जाते हैं. लेकिन अब Google इन पुराने स्मार्टफोन्स को एक नया काम देने की तैयारी कर रहा है. कंपनी एक ऐसे प्रोजेक्ट पर काम कर रही है जिसमें रिटायर हो चुके स्मार्टफोन छोटे डेटा सेंटर की तरह इस्तेमाल किए जा सकेंगे.

Google का मानना है कि पुराने स्मार्टफोन्स में मौजूद प्रोसेसर, मेमोरी और स्टोरेज अभी भी काफी शक्तिशाली होते हैं. इन्हें फेंकने या रिसाइकिल करने की बजाय दोबारा इस्तेमाल में लाकर पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को कम किया जा सकता है.

क्या है Google का नया प्रयोग?

Google, कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी सैन डिएगो के शोधकर्ताओं के साथ मिलकर एक ऐसी तकनीक विकसित कर रहा है जिसमें हजारों पुराने स्मार्टफोन को जोड़कर एक कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म बनाया जाएगा.

इस योजना का उद्देश्य पुराने फोन के हार्डवेयर को दोबारा इस्तेमाल करना है ताकि नए सर्वर बनाने की जरूरत कम पड़े. यदि यह प्रयोग सफल होता है तो भविष्य में करीब 2,000 पुराने Pixel स्मार्टफोन्स से बना एक विशेष डेटा सेंटर तैयार किया जा सकता है.

कैसे काम करेगा यह सिस्टम?

इस तकनीक को फोन क्लस्टर कंप्यूटिंग कहा जा रहा है. इसके तहत पुराने स्मार्टफोन से स्क्रीन, कैमरा, बैटरी और बाहरी बॉडी जैसे हिस्सों को हटा दिया जाता है. इसके बाद केवल मदरबोर्ड बचता है जिसमें प्रोसेसर, रैम और स्टोरेज मौजूद रहते हैं.

इन मदरबोर्ड्स को एक-दूसरे से जोड़ा जाता है और इनमें Linux आधारित ऑपरेटिंग सिस्टम इंस्टॉल किया जाता है. फिर Kubernetes जैसे आधुनिक क्लाउड मैनेजमेंट सिस्टम की मदद से इन सभी डिवाइसों को एक साथ नियंत्रित किया जाता है.

Google के अनुसार, लगभग 25 से 50 स्मार्टफोन्स का एक समूह कुछ विशेष कार्यों में एक आधुनिक सर्वर जैसी क्षमता प्रदान कर सकता है. जब ऐसे सैकड़ों या हजारों फोन एक साथ जुड़ते हैं तो वे क्लाउड सेवाओं के लिए उपयोगी कंप्यूटिंग संसाधन उपलब्ध करा सकते हैं.

Google को इसमें क्या फायदा दिख रहा है?

डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग सिस्टम के पर्यावरणीय प्रभाव का एक बड़ा हिस्सा नए हार्डवेयर के निर्माण से जुड़ा होता है. हर नए सर्वर को बनाने में ऊर्जा और संसाधनों की बड़ी मात्रा खर्च होती है.

Google का कहना है कि अधिकतर लोग लगभग चार साल में अपना स्मार्टफोन बदल देते हैं जबकि पुराने डिवाइस के अंदर मौजूद चिप, मेमोरी और स्टोरेज अभी भी अच्छी स्थिति में होते हैं. इन कंपोनेंट्स का दोबारा इस्तेमाल करके इलेक्ट्रॉनिक कचरा कम किया जा सकता है और नए हार्डवेयर निर्माण से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को भी घटाया जा सकता है.

क्या पुराने फोन Nvidia के AI सर्वर की जगह लेंगे?

इस सवाल का जवाब है नहीं. Google की यह योजना उन विशाल AI सर्वरों की जगह लेने के लिए नहीं है जो बड़े AI मॉडल्स को ट्रेन करने में इस्तेमाल होते हैं. आधुनिक AI सिस्टम को चलाने के लिए अत्यधिक शक्तिशाली GPU और विशेष हार्डवेयर की जरूरत होती है.

पुराने स्मार्टफोन आधारित क्लस्टर मुख्य रूप से छोटे और सामान्य कंप्यूटिंग कार्यों के लिए इस्तेमाल किए जाएंगे. इनमें शैक्षणिक परियोजनाएं, रिसर्च वर्कलोड, वेब सेवाएं, क्लाउड डेवलपमेंट प्लेटफॉर्म और विश्वविद्यालयों में इस्तेमाल होने वाले Jupyter Notebook जैसे सिस्टम शामिल हो सकते हैं.

शिक्षा और रिसर्च में होगा बड़ा इस्तेमाल

कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी सैन डिएगो के शोधकर्ता लगभग 2,000 स्मार्टफोन्स का एक बड़ा क्लस्टर बनाने की तैयारी कर रहे हैं. इसका इस्तेमाल कंप्यूटर साइंस के छात्रों को सिस्टम प्रोग्रामिंग और पैरेलल कंप्यूटिंग जैसे विषय पढ़ाने में किया जाएगा.

साथ ही, शोधकर्ताओं को यह समझने में भी मदद मिलेगी कि आम उपभोक्ताओं के लिए बने स्मार्टफोन लंबे समय तक डेटा सेंटर जैसे भारी कार्यभार को कितनी प्रभावी ढंग से संभाल सकते हैं.

यह भी पढ़ें:

Smart Plug Vs Smart Switch: किसे खरीदने में है आपका फायदा, जानिए कौन बचाएगा आपका पैसा?



Source link