Holika Dahan 2026: होलिका दहन के लिए प्रदोष काल का ये है सबसे शुभ मुहूर्त, भद्रा भी नहीं बनेगी बाधा

सतीश कुमार
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Holika Dahan 2026: इस वर्ष की होली एक त्यौहार नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय शक्तियों का एक महा-मुकाबला है. एक तरफ भक्त प्रह्लाद की अटूट आस्था की विजय का पर्व है, तो दूसरी तरफ पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि में बनने वाला खग्रास चंद्र ग्रहण जो उत्सव के गुलाल को अपनी ओट में छिपाने की कोशिश कर रहा है.

यह ग्रहण सीधे तौर पर हमारे उत्साह और राजसी ऊर्जा को प्रभावित करेगा. इस दौरान किया गया दान और जप सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फलदायी होता है. यह आपके भीतर की नकारात्मकता को बाहर निकालने का सबसे अच्छा समय है. इस बार हैप्पी होली से ज्यादा केयरफुर होली है! क्योंकि चंद्रमा मनसो जातः यानि जब मन के कारक चन्द्रमा ग्रह ही राहु-केतु के चक्रव्यूह में फंसे हो, तो उत्सव की ऊर्जा को संभालना किसी चुनौती से कम नहीं है.

ऊपर से भूलोक पर भद्रा का वास. जिसका प्रभाव सबसे तीव्र होता है. शास्त्र कहते हैं ‘‘भद्रायां द्वे न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा’’। यानी भद्रा के समय होलिका दहन करना समाज के लिए शुभ नहीं होता. भद्रा हमें सिखाती है कि हर कार्य का एक सही समय होता है. इसकी उपस्थिति में हम अधैर्य को त्याग कर प्रतीक्षा का फल मीठा होता है की उक्ति को चरितार्थ करेंगे.

ग्रहण के सूतक से लेकर भद्रा के साये तक, होली पर्व के लिए शुभ मुहूर्त का ‘अमृत’ कैसे निकालें शुभ समय कौन सा है, जो पूजा को सफल बनाए.

  • फाल्गुन पूर्णिमा का प्रारंभ 2 मार्च 2026 को शाम 05ः56 बजे से होगा. अगले दिन 3 मार्च को पूर्णिमा शाम 05ः08 बजे ही समाप्त हो जाएगी.
  • 3 मार्च को दोपहर 03ः20 से शाम 06ः47 तक पूर्ण चंद्रग्रहण रहेगा. इसका सूतक सुबह से ही लग जाएगा. ग्रहण काल और सूतक में अग्नि प्रज्वलित करना पूरी तरह वर्जित है.
  • शास्त्रों के अनुसार, जिस दिन प्रदोष काल यानि सूर्यास्त के बाद का समय में पूर्णिमा व्याप्त हो, उसी दिन होलिका दहन श्रेष्ठ होता है.
  • चूँकि 3 मार्च को सूर्यास्त से पहले ही पूर्णिमा समाप्त हो रही है और ग्रहण भी है, इसलिए 2 मार्च को ही होलिका दहन करना श्रेष्ठ है.
  • 2 मार्च को शाम 05ः56 से पूरी रात भद्रा प्रभावी रहेगी. भद्रा में होलिका दहन वर्जित है, किंतु यदि भद्रा पूरी रात हो, तो भद्रा मुख को त्यागकर प्रदोष काल में दहन का विधान है.
  • होलिका दहन के लिए सबसे श्रेष्ठ समय प्रदोष काल शाम 06ः36 से रात्रि 9 बजे के बीच.
  • ब्रह्मांडीय ऊर्जा का लाभ लेने के लिए 2 मार्च का दिन ही सुरक्षित और शुभ है. ग्रहण और भद्रा के दोषों से बचते हुए प्रदोष काल में किया गया पूजन ही आपके कर्म को सफलता का आशीर्वाद देगा.
  • जिस प्रकार भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति ने दहकती आग को भी शीतलता में बदल दिया, उसी तरह आपका विश्वास जीवन के हर ग्रहण और भद्रा के साये को मिटाने की शक्ति रखता है.
  • इस होली, केवल बाहर की बुराई को ही नहीं, बल्कि अपने मन के संशयों और नकारात्मकता को भी अग्नि में स्वाहा करें. अपनी श्रद्धा को अटूट रखें, क्योंकि आस्था के सामने हर बाधा भस्म हो जाती है.
  • होलिका की पवित्र अग्नि में अपनी मनोकामना अनुसार आहुति दें और ऊँ होलिकायै नमः का जाप करते हुए सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें.
  • सुख-समृद्धि और धन लाभ के लिए अग्नि में गेहूं की बालियां, गोबर के उपले, अक्षत और शक्कर अर्पित करें.
  • आर्थिक उन्नति के लिए चंदन की लकड़ी और सूखा नारियल शुभ माना जाता है.
  • स्वास्थ्य और बाधा मुक्ति के लिए नीम के पत्ते, कपूर और काले तिल डालें.
  • जीवन की मुश्किलों और नजर दोष से बचने के लिए पीली सरसों की आहुति दें.
  • अग्नि की 3 या 7 बार परिक्रमा करते हुए जल की धारा अर्पित करें.
  • अगले दिन होलिका की पवित्र राख को माथे पर लगाएं या बरकत के लिए इसे अपनी तिजोरी में रखें.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.