आजकल स्मार्टफोन मार्केट में फोल्डेबल फोन का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है. Samsung, Google और दूसरी कंपनियों के बाद अब Apple ने भी इस सेगमेंट में एंट्री कर ली है. कंपनी ने अपना पहला फोल्डेबल iPhone iPhone Duo लॉन्च किया है. फोन का डिजाइन और नई फोल्डिंग टेक्नोलॉजी तो चर्चा में है ही, लेकिन इसकी कीमत ने भी लोगों का ध्यान खींचा है.
अमेरिका के मुकाबले भारत में iPhone Duo की कीमत करीब 1 लाख रुपये से ज्यादा है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर भारत में यही फोन इतना महंगा क्यों है और इसकी कीमत में टैक्स का कितना हिस्सा है.
अमेरिका और भारत में कितनी है कीमत?
अमेरिका में iPhone Duo की शुरुआती कीमत 1999 डॉलर है. भारतीय रुपये में देखें तो यह करीब 1.9 लाख रुपये के आसपास है. लेकिन भारत में इसी फोन की शुरुआती कीमत 2,99,900 रुपये रखी गई है. यानी दोनों देशों की कीमत में करीब 1 लाख रुपये से ज्यादा का अंतर दिखाई देता है. हालांकि अमेरिका में दिखाई जाने वाली कीमत में वहां का Sales Tax शामिल नहीं होता, जबकि भारत में Apple की बताई कीमत में GST शामिल होता है. इसलिए सिर्फ दोनों कीमतों को सीधे बदलकर देखना सही तुलना नहीं होगी.
भारत में फोन पर कितना टैक्स लगता है?
भारत में iPhone जैसे स्मार्टफोन की कीमत पर 18 प्रतिशत GST का असर पड़ता है. इसके अलावा विदेश से फोन भारत लाने पर कस्टम ड्यूटी और दूसरे आयात से जुड़े खर्च भी हो सकते हैं. इन सभी खर्चों का असर अंतिम कीमत पर पड़ता है. यही वजह है कि अमेरिका की कीमत को भारतीय रुपये में बदलने के बाद जो रकम आती है, भारत में फोन की कीमत उससे काफी ज्यादा दिखाई देती है. हालांकि पूरे 1 लाख रुपये के अंतर को केवल टैक्स के नाम पर बताना सही नहीं होगा.
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क्या पूरा 1 लाख रुपये टैक्स में चला जाता है?
नहीं, ऐसा कहना सही नहीं होगा. भारत और अमेरिका में फोन की कीमत तय करने का तरीका अलग है. अमेरिका में Apple की दिखाई गई कीमत टैक्स से पहले की कीमत होती है, जबकि भारत में ग्राहक को दिखाई जाने वाली कीमत में GST शामिल होता है. इसके साथ ही भारत में फोन लाने, बेचने, स्टोर और लॉजिस्टिक्स से जुड़े खर्च भी कीमत में जुड़ते हैं. इसलिए अमेरिका और भारत के बीच दिख रहा पूरा अंतर सिर्फ टैक्स की वजह से नहीं है.
iPhone Duo भारत में इतना महंगा क्यों है?
iPhone Duo Apple का पहला फोल्डेबल iPhone है और इसमें कंपनी ने नई फोल्डिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया है. भारत में इसकी कीमत पर इंपोर्ट से जुड़े खर्च के साथ-साथ टैक्स, लॉजिस्टिक्स और Apple की स्थानीय pricing strategy का भी असर पड़ता है. फोन की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट भी सामान्य iPhone मॉडल की तुलना में ज्यादा हो सकती है. इन सभी चीजों को मिलाकर भारत में इसकी कीमत अमेरिका की शुरुआती कीमत से काफी ऊपर पहुंच जाती है.
भारत में खरीदने वालों को क्या ध्यान रखना चाहिए?
अगर कोई व्यक्ति अमेरिका से iPhone Duo खरीदने की सोच रहा है तो केवल वहां की वेबसाइट पर दिखाई गई कीमत देखकर फैसला नहीं करना चाहिए. वहां Sales Tax अलग से जुड़ सकता है और भारत लाने पर दूसरे नियम और खर्च भी लागू हो सकते हैं. दूसरी तरफ भारत में खरीदने पर फोन स्थानीय वारंटी और बिक्री व्यवस्था के साथ मिलता है. इसलिए करीब 1 लाख रुपये का अंतर देखकर यह मान लेना कि अमेरिका से फोन खरीदना हमेशा सस्ता होगा, यह सही नहीं है.
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