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क्या इंटरनेट पर आपकी पहचान सच में गुप्त है? रिसर्च में खुलासा, जानें कैसे AI लगा सकता है असली नाम का पता

Aman Shanti .In
By Aman Shanti .In On March 10, 2026
1 min read 1.2k views
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Internet Privacy: इंटरनेट पर कई लोग अपनी पहचान छिपाकर सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन एक नई स्टडी ने चेतावनी दी है कि अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से ऐसे गुमनाम यूजर्स की असली पहचान तक पहुंचना पहले की तुलना में काफी आसान हो सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, आधुनिक AI सिस्टम अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर मौजूद छोटी-छोटी जानकारी को जोड़कर यह पता लगाने की कोशिश कर सकते हैं कि किसी अनाम अकाउंट के पीछे असल में कौन व्यक्ति है.

शोध में क्या सामने आया?

इस अध्ययन में AI शोधकर्ता साइमन लेर्मन और डैनियल पालेका ने यह जांचने की कोशिश की कि क्या बड़े भाषा मॉडल (LLMs) किसी गुमनाम ऑनलाइन प्रोफाइल को वास्तविक पहचान से जोड़ सकते हैं. उन्होंने एक प्रयोग में कुछ अनाम सोशल मीडिया अकाउंट्स से जुड़ी जानकारी AI सिस्टम को दी और उसे निर्देश दिया कि इंटरनेट पर उपलब्ध बाकी स्रोतों से संबंधित जानकारी ढूंढे.

प्रयोग के दौरान एक काल्पनिक उदाहरण लिया गया जिसमें एक अनाम यूजर ने अपने पोस्ट में स्कूल की परेशानियों का जिक्र किया था और यह भी बताया था कि वह अपने कुत्ते बिस्किट को डोलोरेस पार्क में घुमाने ले जाता है.

AI ने इन संकेतों के आधार पर दूसरे प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद पोस्ट और जानकारी खोजी और अंत में उस अनाम प्रोफाइल को एक वास्तविक व्यक्ति से काफी हद तक जोड़ने में सफल रहा.

क्यों बढ़ रही है चिंता?

शोधकर्ताओं का कहना है कि पहले इस तरह की पहचान उजागर करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञता और ज्यादा संसाधनों की जरूरत होती थी. लेकिन अब इंटरनेट कनेक्शन और सार्वजनिक AI टूल्स की मदद से ऐसे प्रयास करना काफी आसान और सस्ता हो गया है. इस वजह से यह सवाल खड़ा हो रहा है कि इंटरनेट पर वास्तव में कौन-सी जानकारी निजी मानी जा सकती है और कौन-सी नहीं.

AI हमेशा सटीक नहीं होता

हालांकि रिपोर्ट यह भी बताती है कि AI कोई जादुई समाधान नहीं है. कई बार उपलब्ध जानकारी इतनी कम होती है कि सिस्टम किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाता. कुछ मामलों में संभावित लोगों की संख्या इतनी ज्यादा होती है कि सही पहचान तय करना मुश्किल हो जाता है. फिर भी कई परिस्थितियों में यह तकनीक किसी व्यक्ति की गुमनामी को कमजोर कर सकती है.

संभावित खतरे क्या हैं?

विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तकनीक का गलत इस्तेमाल कई तरीकों से किया जा सकता है. उदाहरण के लिए, सरकारें गुमनाम कार्यकर्ताओं या विरोध करने वाले लोगों पर नजर रखने के लिए AI का इस्तेमाल कर सकती हैं. इसके अलावा साइबर अपराधी भी इसका फायदा उठाकर बहुत ही व्यक्तिगत और भरोसेमंद दिखने वाले स्कैम तैयार कर सकते हैं. शोधकर्ताओं ने खासतौर पर स्पीयर-फिशिंग जैसे हमलों का जिक्र किया जिसमें हैकर किसी भरोसेमंद व्यक्ति का रूप लेकर पीड़ित को खतरनाक लिंक पर क्लिक करने के लिए धोखा देते हैं.

प्लेटफॉर्म और यूजर्स कैसे बचाव करें?

इस खतरे को कम करने के लिए विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया कंपनियों को सबसे पहले अपने प्लेटफॉर्म पर डेटा एक्सेस को नियंत्रित करना चाहिए. उदाहरण के तौर पर, यूजर डेटा डाउनलोड करने की सीमा तय करना, ऑटोमेटेड स्क्रैपिंग बॉट्स की पहचान करना और बड़ी मात्रा में डेटा एक्सपोर्ट को रोकना जैसे कदम उठाए जा सकते हैं.

वहीं आम यूजर्स को भी सावधानी बरतनी होगी. इंटरनेट पर पोस्ट करते समय व्यक्तिगत जानकारी, लोकेशन या ऐसे विवरण साझा करने से बचना चाहिए जो अलग-अलग प्लेटफॉर्म की जानकारी को जोड़कर किसी की असली पहचान उजागर कर सकते हैं.

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Սաթիշ Կումարը թվային բովանդակության ստեղծող և նորությունների հրատարակիչ է։ Նա գրում է հոդվածներ պետական ​​ծրագրերի, տեխնոլոգիական նորությունների և ավտոմոբիլային թարմացումների վերաբերյալ։ Նրա հոդվածների նպատակն է մարդկանց ճիշտ և արագ տեղեկատվություն տրամադրելը։