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क्या E20 पेट्रोल से गाड़‍ियां खराब हो रही हैं, पुरानी कार-बाइक को क‍ितना नुकसान, सरकार ने 7 सवालों के दिए जवाब

Aman Shanti .In
By Aman Shanti .In On July 30, 2026
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एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) को लेकर सोशल मीडिया में चल रहे दावों पर केंद्र सरकार ने विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा है कि E20 पेट्रोल को लेकर फैलाए जा रहे कई दावे भ्रामक हैं और उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययन, ऑटोमोबाइल कंपनियों के आंकड़े तथा वर्षों के अनुभव इन दावों का समर्थन नहीं करते.

सरकार ने E20 को लेकर उठ रहे सात प्रमुख सवालों के जवाब द‍िए हैं. ये भी कहा है कि देश में पिछले ढाई साल से E19-E20 और साढ़े तीन साल से E15 से अधिक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का व्यापक इस्तेमाल हो रहा है. इस दौरान इंजन खराब होने या वाहनों के बड़े पैमाने पर बंद पड़ने का कोई प्रामाणिक मामला सामने नहीं आया है.

जानें 7 सवाल और उनके जवाब

क्या 2023 से पहले बने वाहन E20 पर नहीं चल सकते?

सरकार का कहना है कि यह दावा पूरी तरह ग़लत है. भारत में एथेनॉल मिश्रण चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया गया है. 2013-14 में औसत ब्लेंडिंग 1.53% थी, जो 2025-26 में बढ़कर 20% तक पहुंच गई. देश में रोजाना करीब 8 करोड़ वाहन पेट्रोल पंपों पर ईंधन भरवाते हैं. एक प्रमुख वाहन निर्माता ने वित्त वर्ष 2025-26 में 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग के आंकड़ों का विश्लेषण किया, जिनमें लगभग 1.5 करोड़ ऐसे वाहन थे जो मूल रूप से E20 प्रमाणित नहीं थे. इसके बावजूद, E20 से जुड़े जंग लगने, असामान्य घिसावट या पार्ट्स की उम्र घटने का कोई प्रमाण नहीं मिला.

क्या 30 करोड़ वाहन बेकार हो जाएंगे?

सरकार ने इस दावे को भी पूरी तरह ख़ारिज किया है. मंत्रालय के मुताबिक़, पिछले कुछ वर्षों में 20 करोड़ से अधिक दोपहिया और 3 करोड़ से ज्‍यादा पेट्रोल कारें E15 और E20 ईंधन पर चल चुकी हैं. यदि E20 वास्तव में वाहनों को अनुपयोगी बना देता, तो देशभर में लाखों इंजन फेल होने, वारंटी क्लेम और बड़े सर्विस अभियान देखने को मिलते, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ.

क्या वाहन निर्माता कंपनियां E20 के ख‍िलाफ हैं?

सरकार ने बताया कि 4 जुलाई 2026 को पेट्रोलियम मंत्रालय, भारी उद्योग मंत्रालय और सड़क परिवहन मंत्रालय की संयुक्त प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में टोयोटा किर्लोस्कर, मारुति सुज़ुकी, हीरो मोटोकॉर्प, हुंडई, टीवीएस मोटर और बजाज ऑटो के वरिष्ठ अधिकारियों ने E20 कार्यक्रम का सार्वजनिक रूप से समर्थन किया.  मारुति सुज़ुकी ने कहा कि उसके सर्विस डेटा में E20 से किसी तरह की अतिरिक्त खराबी नहीं मिली है.

क्या पुराने वाहनों को खतरा है?

सरकार के अनुसार, जिन 1.5 करोड़ पुराने वाहनों का विश्लेषण किया गया, उनमें भी E20 की वजह से जंग लगने, अतिरिक्त घिसावट या इंजन की उम्र कम होने का कोई प्रमाण नहीं मिला. एक अन्य कंपनी ने भी 1.4 करोड़ ‘E20 पर चलने वाले वाहनों’ के अध्ययन में इसी तरह के नतीजे बताए हैं.

क्या E20 से माइलेज बहुत कम हो जाएगा?

मंत्रालय का कहना है कि माइलेज पर असर कई कारणों से पड़ता है, जैसे ट्रैफ‍िक, ड्राइविंग का तरीका, वाहन की सर्विसिंग, टायर प्रेशर और एयर कंडीशनर का उपयोग. पुराने E10 आधारित कुछ वाहनों में माइलेज में करीब 3 से 3.5 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है, लेकिन सोशल मीडिया पर किए जा रहे बड़े दावे सही नहीं हैं. इसके उलट, सरकार का यह भी कहना है कि E20 में उच्च ऑक्टेन रेटिंग, बेहतर एंटी-नॉक क्षमता, क्‍ल‍ीन कंबस्‍टन और बेहतर इंजन प्रदर्शन जैसे फयदे भी मिलते हैं.

क्या कंपनियों पर सरकार का दबाव है?

सरकार ने इस आरोप को भी निराधार बताया है. मंत्रालय के अनुसार, वाहन निर्माता स्वतंत्र ल‍िस्‍टेड कंपन‍ियां  हैं और यदि E20 से व्यापक नुकसान होता, तो वे न तो इसकी वारंटी जारी रखतीं और न ही इसे प्रमाणित करतीं. कंपनियों के अनुसार, उनकी राय इंजीनियरिंग परीक्षण, वैज्ञानिक अध्ययन और वास्तविक सर्विस डेटा पर आधारित है, न कि किसी सरकारी दबाव पर.

बिना टेस्टिंग के नियम लागू कर दिए गए?

सरकार ने स्पष्ट किया कि E20 कार्यक्रम को लागू करने से पहले ऑटोमोबाइल कंपनियों, SIAM, ARAI, कंपोनेंट निर्माताओं, परीक्षण एजेंसियों और तेल विपणन कंपनियों के साथ व्यापक तकनीकी परीक्षण और परामर्श किया गया था.

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Սաթիշ Կումարը թվային բովանդակության ստեղծող և նորությունների հրատարակիչ է։ Նա գրում է հոդվածներ պետական ​​ծրագրերի, տեխնոլոգիական նորությունների և ավտոմոբիլային թարմացումների վերաբերյալ։ Նրա հոդվածների նպատակն է մարդկանց ճիշտ և արագ տեղեկատվություն տրամադրելը։