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क्यों लगती है सोशल मीडिया की लत और कैसे मदद कर सकते हैं ऑस्ट्रेलिया और यूके जैसे कानून? यहां जानें

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By Aman Shanti .In On June 17, 2026
2 min read 1.2k views
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  • बच्चों की सोशल मीडिया लत रोकने को ब्रिटेन ने प्रतिबंध लगाया।
  • शक्तिशाली एल्गोरिदम, नोटिफिकेशन, ऑटोप्ले यूजर्स को बांधे रखते हैं।
  • बच्चों में कम आत्म-नियंत्रण, लत उनके लिए खतरा।
  • प्रतिबंधों से 30% बच्चे सोशल मीडिया से दूर।

Social Media Addiction: हाल में ब्रिटेन ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर ताला लगा दिया है. यानी ऑस्ट्रेलिया की तरह यहां भी 16 साल से छोटे बच्चे फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स समेत दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स एक्सेस नहीं कर पाएंगे. इसके पीछे के कारणों में सोशल मीडिया से बच्चों को होने वाले नुकसान के अलावा इन प्लेटफॉर्म्स की एडिक्टिव नैचर को भी जिम्मेदार ठहराया जाता है. आज हम जानेंगे कि ऐसी क्या चीजे हैं जो सोशल मीडिया की लत लगाती हैं और कैसे ऑस्ट्रेलिया-यूके जैसे कानून इससे बचाने में मदद कर सकते हैं.

क्यों लग जाती है सोशल मीडिया की लत?

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को डिजाइन ही ऐसे किया जाता है ताकि घंटों तक यूजर इन पर चिपका रहे. इसके लिए कंपनियां पावरफुल एल्गोरिदम का यूज करती है, जो अपने आप पता लगा लेता है कि यूजर को क्या देखना पसंद है और वह उसी तरह का कंटेट पुश करता है. इसके अलावा ये प्लेटफॉर्म ऐसा आभास करवाते हैं कि अगर किसी कंटेट को अभी नहीं देखा तो वह गायब हो जाएगा. ये चीजें यूजर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से चिपकाएं रखती हैं.

अटेंशन ग्रैब करने के लिए एआई का यूज

अगर आप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को बंद करके बैठ जाते हैं तो भी नोटिफिकेशन लगातार आपको याद दिलाती रहेंगी कि कुछ ऐसा है, जो आप देखने से चूक गए. कंपनियों ने एआई पावर्ड नोटिफिकेशन सिस्टम डेवलप कर लिए हैं, जो यह अंदाजा लगा सकते हैं कि किस तरह की नोटिफिकेशन से यूजर का ध्यान खींचा जा सकता है. इन प्लेटफॉर्म्स पर इन्फिनिटी स्क्रॉल और ऑटोप्ले जैसे फीचर्स भी मिलते हैं, जो यूजर को सोचने का समय ही नहीं देते और एक बार हाथ में फोन लेने के बाद लोग घंटों-घंटों इन प्लेटफॉर्म्स पर गुजार देते हैं. बच्चों के लिए यह स्थिति और खतरनाक हो जाती है क्योंकि उनमें सेल्फ-कंट्रोल की क्षमता कम होती है. यही वजह है कि बच्चों को लेकर खास तौर पर चिंता जताई जा रही है.

क्या नियमों से असर पड़ता है?

कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोशल मीडिया पर बैन लगाना प्रभावी तरीका नहीं है. बैन लगाने के बाद बच्चे VPN और दूसरे तरीकों से इन प्लेटफॉर्म्स को एक्सेस करेंगे. हालांकि, यह कहना भी सही नहीं है कि बैन लगाने का तरीका पूरी तरह असफल है. एक सर्वे के मुताबिक, बैन लगने के बाद करीब 30 प्रतिशत बच्चे सोशल मीडिया से दूर हो गए हैं. जानकारों का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया और यूके जैसे कानून उन फीचर्स में बदलाव करवा सकते हैं, जिनसे सोशल मीडिया एडिक्टिव बनता है. 

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Սաթիշ Կումարը թվային բովանդակության ստեղծող և նորությունների հրատարակիչ է։ Նա գրում է հոդվածներ պետական ​​ծրագրերի, տեխնոլոգիական նորությունների և ավտոմոբիլային թարմացումների վերաբերյալ։ Նրա հոդվածների նպատակն է մարդկանց ճիշտ և արագ տեղեկատվություն տրամադրելը։