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गैस की किल्लत के बाग इंटरनेट भी हो सकता है बंद! LPG संकट पर टेलीकॉम कंपनियों की चेतावनी, मोबाइल नेटवर्क भी पड़ सकता है ठप

Aman Shanti .In
By Aman Shanti .In On March 13, 2026
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Iran-Israel-US War: भारत में एलपीजी की कमी अब केवल रसोई तक सीमित चिंता नहीं रह गई है. अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी तनाव और संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका अप्रत्यक्ष असर मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाओं पर भी दिखाई दे सकता है.

दरअसल, एलपीजी का इस्तेमाल कुछ औद्योगिक प्रक्रियाओं में किया जाता है और कई जगह यह टेलीकॉम टावरों व डेटा सेंटरों के लिए चलने वाले जनरेटर का बैकअप ईंधन भी होता है. ऐसे में सप्लाई बाधित होने पर इन सुविधाओं के संचालन पर दबाव पड़ सकता है.

टेलीकॉम टावरों के संचालन पर बढ़ सकता है दबाव

टेलीकॉम कंपनियों के पास बिजली के अन्य विकल्प मौजूद होते हैं लेकिन यदि एलपीजी की कमी लंबे समय तक जारी रहती है तो उनके संचालन की लागत बढ़ सकती है. कुछ इलाकों में छोटी-मोटी नेटवर्क समस्याएं भी सामने आ सकती हैं. डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स एसोसिएशन (DIPA) के अनुसार सरकार द्वारा घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के निर्देश के बाद तेल कंपनियों ने टेलीकॉम टावर निर्माण से जुड़ी इकाइयों को एलपीजी की आपूर्ति रोक दी है. हालांकि फिलहाल देशभर में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं सामान्य रूप से चल रही हैं.

क्यों जरूरी है लगातार टेलीकॉम कनेक्टिविटी

DIPA का कहना है कि निर्बाध टेलीकॉम नेटवर्क केवल कॉल और इंटरनेट के लिए ही नहीं बल्कि कई महत्वपूर्ण सेवाओं के लिए भी बेहद जरूरी है. 5G नेटवर्क, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े ऑपरेशन, आपातकालीन सेवाएं, डिजिटल सरकारी प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन लेन-देन और टेलीमेडिसिन जैसी सुविधाएं पूरी तरह टेलीकॉम नेटवर्क पर निर्भर करती हैं. संस्था ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर आपूर्ति में बाधा बनी रहती है तो टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर भी असर पड़ सकता है.

टेलीकॉम टावर निर्माण भी हो सकता है प्रभावित

टेलीकॉम टावर बनाने वाली फैक्ट्रियों में गैल्वनाइजेशन प्लांट में जिंक को पिघली हुई अवस्था में बनाए रखने के लिए लगातार ईंधन की जरूरत होती है. कुछ कंपनियों ने फिलहाल कम लौ वाले संचालन का विकल्प अपनाया है ताकि प्लांट को नुकसान न पहुंचे.

लेकिन यदि सप्लाई लंबे समय तक बाधित रहती है तो इन इकाइयों को पिघले जिंक को हटाकर उत्पादन बंद करना पड़ सकता है. ऐसे प्लांट को दोबारा चालू करना काफी समय लेने वाली प्रक्रिया होती है जिससे टावर निर्माण में देरी हो सकती है.

सरकार से की गई अहम मांग

DIPA ने दूरसंचार विभाग से अनुरोध किया है कि वह बिजली मंत्रालय और राज्य बिजली कंपनियों के साथ इस मुद्दे को उठाए. संस्था चाहती है कि टेलीकॉम टावर निर्माण इकाइयों को एलपीजी और एलएनजी आपूर्ति पर लगे प्रतिबंध से छूट दी जाए. साथ ही टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर और मोबाइल टावरों को प्राथमिकता के आधार पर बिजली आपूर्ति देने की भी मांग की गई है. यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो नए टेलीकॉम टावरों की स्थापना की गति धीमी पड़ सकती है जिससे दूरदराज और कम कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में नेटवर्क विस्तार प्रभावित हो सकता है.

खाड़ी क्षेत्र में तनाव से बढ़ी वैश्विक ऊर्जा चिंता

इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ गई है. दुनिया के कुल तेल और गैस व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है.

हालांकि सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन और यूएई की हबशान-फुजैराह पाइपलाइन जैसे कुछ वैकल्पिक मार्ग मौजूद हैं जो तेल को समुद्री रास्ते के बजाय जमीन के रास्ते वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने में मदद करते हैं. फिर भी अगर तनाव बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर इसका असर पड़ सकता है और कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है.

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Սաթիշ Կումարը թվային բովանդակության ստեղծող և նորությունների հրատարակիչ է։ Նա գրում է հոդվածներ պետական ​​ծրագրերի, տեխնոլոգիական նորությունների և ավտոմոբիլային թարմացումների վերաբերյալ։ Նրա հոդվածների նպատակն է մարդկանց ճիշտ և արագ տեղեկատվություն տրամադրելը։