Տեխնիկական նորություններ

डीपफेक से लेकर Crime-as-a-Service तक! AI बना साइबर अपराधियों का सबसे खतरनाक हथियार, ऐसे हो रहा डिजिटल हमला

Aman Shanti .In
By Aman Shanti .In On February 11, 2026
1 min read 1.2k views
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
YouTube Channel Join Now
Instagram Follow Join Now
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
YouTube Channel Join Now
Instagram Follow Join Now

[ad_1]

Artificial Intelligence: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने जहां दुनिया को तेज और स्मार्ट बनाया है वहीं इस तकनीक ने साइबर अपराध को भी नई ताकत दे दी है. अब हैकिंग और ऑनलाइन ठगी छोटे स्तर की वारदात नहीं रही, बल्कि संगठित गिरोहों द्वारा बड़े पैमाने पर चलाई जा रही इंडस्ट्रियल ऑपरेशन बन चुकी है.

ग्लोबल साइबरपीस समिट 2026 में भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के सीईओ राजेश कुमार ने बताया कि 2024–2025 के दौरान दर्ज साइबर हमलों में AI और ऑटोमेशन का व्यापक इस्तेमाल देखने को मिला है. गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाला I4C देश की एजेंसियों को साइबर अपराध से निपटने के लिए समन्वित ढांचा प्रदान करता है.

कॉरपोरेट स्टाइल में काम कर रहे अपराधी गिरोह

अब साइबर अपराधी किसी छोटे गैंग की तरह नहीं, बल्कि कंपनियों की तरह संगठित ढांचे में काम कर रहे हैं. दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका, मध्य-पूर्व और भारत के कुछ हिस्सों से संचालित ये नेटवर्क अलग-अलग विभागों में बंटे हुए हैं.

इन गिरोहों के पास भर्ती करने वाली टीम, वेतन और प्रमोशन देखने वाले लोग और यहां तक कि रिसर्च एंड डेवलपमेंट यूनिट भी होती है. ये टीमें टेक्नोलॉजी की कमियों और इंसानी व्यवहार की कमजोरियों को खोजकर उनका फायदा उठाती हैं.

सोशल इंजीनियरिंग में AI का बड़ा रोल

हालांकि कई साइबर हमले अभी भी सोशल इंजीनियरिंग पर आधारित हैं लेकिन अब उनमें AI का जबरदस्त सहयोग मिल रहा है. फर्जी SMS और WhatsApp मैसेज ऑटोमैटिक स्क्रिप्टिंग और पर्सनलाइजेशन के जरिए तैयार किए जा रहे हैं जिससे वे बेहद असली और भरोसेमंद लगते हैं. AI की मदद से अपराधी एक साथ हजारों लोगों को टारगेट कर सकते हैं जिससे ठगी का दायरा कई गुना बढ़ गया है.

साइबर अपराध की बढ़ती वैश्विक कीमत

रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में साइबर अपराध से दुनिया को लगभग 10.8 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान होने का अनुमान था, जो इस साल करीब 12 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है. कई अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंकों का दावा है कि अब लगभग 80 प्रतिशत साइबर हमलों में किसी न किसी रूप में AI की भूमिका है.

डीपफेक और डिजिटल अरेस्ट जैसे नए हथकंडे

AI का इस्तेमाल अब डीपफेक तकनीक में भी हो रहा है. डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में अपराधी किसी प्रसिद्ध पुलिस अधिकारी का चेहरा और आवाज नकली तरीके से दिखाकर पीड़ित को डराते हैं जिससे वह खुद को असली अधिकारी से बात करते हुए समझता है.

ट्रिपल एक्सटॉर्शन और Crime-as-a-Service का खतरा

साइबर अपराध में अब ट्रिपल एक्सटॉर्शन मॉडल भी सामने आया है. इसमें पहले रैनसमवेयर से डेटा लॉक किया जाता है फिर उसे लीक करने की धमकी देकर पैसे वसूले जाते हैं. इसके अलावा Crime-as-a-Service का ट्रेंड भी तेजी से बढ़ रहा है. इसमें संगठित गिरोह उन लोगों को भी अपराध की सुविधा देते हैं जिनके पास तकनीकी जानकारी नहीं होती. यानी पैसे दो और तैयार साइबर क्राइम सेवा लो.

विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के मामलों में कई वरिष्ठ सरकारी अधिकारी तक ठगी का शिकार हो चुके हैं. साफ है कि AI ने साइबर अपराध को पहले से कहीं ज्यादा संगठित तेज और खतरनाक बना दिया है.

यह भी पढ़ें:

क्या रात को Wi-Fi और मोबाइल डेटा को बंद रखना चाहिए? साइंस की सच्चाई जानकर चौंक जाएंगे

[ad_2]

Source link

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
YouTube Channel Join Now
Instagram Follow Join Now
Aman Shanti .In

Aman Shanti .In

Սաթիշ Կումարը թվային բովանդակության ստեղծող և նորությունների հրատարակիչ է։ Նա գրում է հոդվածներ պետական ​​ծրագրերի, տեխնոլոգիական նորությունների և ավտոմոբիլային թարմացումների վերաբերյալ։ Նրա հոդվածների նպատակն է մարդկանց ճիշտ և արագ տեղեկատվություն տրամադրելը։