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अगर आप नया लैपटॉप खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं तो अभी सही समय है. अगर आप इसे टालते जाएंगे तो यह आपको काफी महंगा पड़ सकता है. दरअसल, पिछले कुछ समय से मेमोरी चिप्स की शॉर्टेज के कारण इनकी कीमतें बढ़ी हैं. इसका असर यह हुआ कि कंपनियों के लिए लैपटॉप बनाना महंगा हो गया है. इस बढ़ी हुई लागत को वसूलने के लिए कंपनियां लैपटॉप महंगे कर रही हैं. लेनोवो, डेल और HP जैसी कंपनियां लैपटॉप के दाम बढ़ाने का ऐलान भी कर चुकी हैं.
दाम और बढ़ने के आसार
मेमोरी चिप्स के दाम बढ़ने को लागत बढ़ने का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है. दरअसल, पिछले कुछ समय से चिप बनाने वाली कंपनियां कंज्यूमर मार्केट की बजाय एआई डेटा सेंटर को चिप्स सप्लाई कर रही हैं. इस कारण स्मार्टफोन, स्मार्ट टीवी और लैपटॉप समेत बाकी इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स के लिए चिप की कमी हो गई है. साथ ही इनकी कीमतें भी बढ़ गई हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अभी यह संकट टलने वाला नहीं है और इसका असर आने वाले कई महीनों तक जारी रहेगा.
लैपटॉप पर इसलिए ज्यादा असर
पिछले कुछ महीनों से रैम वाले सारे डिवाइसेस की लागत बढ़ रही है और इसका असर दिखने लगा है. कई कंपनियों के स्मार्टफोन महंगे हो चुके हैं. हालांकि, कई कैटेगरी के लिए दामों में बढ़त ज्यादा न लगे, लेकिन लैपटॉप जैसे आइटम्स पर प्रॉफिट मार्जिन कम होता है, जिसके चलते कंपनियों को अपनी लागत निकालने के लिए दाम बढ़ाने पड़ते हैं. यही वजह है कि लेनोवो और डेल जैसी कंपनियां अपने लैपटॉप महंगे कर चुकी हैं.
अभी लैपटॉप खरीद रहे हैं तो इन बातों का रखें ध्यान
अभी अगर आप लैपटॉप पर पैसे खर्च कर रहे हैं तो ऐसे हार्डवेयर सेलेक्ट करें, जो अगले कई सालों तक आसानी से चल जाएं. अभी अगर आप 16GB रैम वाला लैपटॉप लेना चाहते हैं तो इसकी जगह 32GB या 64GB रैम चुनें. रैम की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, इसलिए बाद में महंगी रैम खरीदने की बजाय आप अभी कम कीमत पर इसे खरीद सकते हैं. मॉडल सेलेक्ट करते समय अपनी अगले पांच सालों की जरूरतों को ध्यान में जरूर रखें.
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