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पेट्रोल कार में CNG किट लगाने की प्रक्रिया, फायदे और सुरक्षा टिप्स

Aman Shanti .In
By Aman Shanti .In On February 9, 2026
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पेट्रोल कार में CNG किट लगवाना आजकल फ्यूल खर्च कम करने का एक बहुत प्रभावी और ईको-फ्रेंडली तरीका बन चुका है. भारत में बढ़ते पेट्रोल-डीजल दामों के कारण लाखों लोग अपनी पुरानी या नई पेट्रोल कारों को CNG में कन्वर्ट करवाना चाहते हैं. ये प्रोसेस न केवल मासिक फ्यूल कॉस्ट में 50-70% तक की बचत कराती है, बल्कि CNG से एमीशन भी घट जाता है.

ये काम पूरी तरह सुरक्षित और कानूनी तरीके से ही करना जरूरी है, क्योंकि CNG हाई प्रेशर वाली गैस है और गलत इंस्टॉलेशन से दुर्घटना का खतरा रहता है. इसलिए केवल ARAI/PESO प्रमाणित किट और अधिकृत वर्कशॉप का ही इस्तेमाल करें. कुल मिलाकर, अगर आपकी कार उपयुक्त है और आप नियमित रूप से लंबी दूरी तय करते हैं, तो ये निवेश 1-2 साल में रिकवर हो सकता है. आइए, CNG Kit लगाने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस जान लेते हैं.

तैयारी और कार की जांच

सबसे पहले अपनी कार की CNG किट के लिए उपयुक्तता जांचें. कार की उम्र आमतौर पर 10-15 साल से कम होनी चाहिए और इंजन की हालत अच्छी होनी चाहिए. कम्प्रेशन टेस्ट, स्पार्क प्लग, इग्निशन सिस्टम और इंजन ऑयल की जांच करवाएं. EFI वाली नई कारों में Sequential CNG Kit सबसे बेहतर परफॉर्मेंस देती है, जबकि पुरानी कार्बोरेटर वाली में Conventional या Venturi Kit लगाई जाती है. कार का मॉडल, इंजन क्षमता और वजन देखकर सिलेंडर साइज (12-18 किलो) तय करें.

सर्टिफाइट CNG किट और इंस्टॉलर चुनें

केवल भारत सरकार (ARAI/PESO/RTO) द्वारा प्रमाणित ब्रांड जैसे Lovato, BRC, Tomasetto, Landi Renzo आदि चुनें. Sequential Kit 4-सिलेंडर कारों के लिए परफेक्ट है, जो बेहतर माइलेज और कम पावर लॉस देती है. ऑथोराइज्ड CNG फिटिंग सेंटर से ही काम करवाएं, जो ARAI अप्रूव्ड हो. कीमत Sequential Kit, इंस्टॉलेशन और सिलेंडर सहित ₹50,000 से ₹80,000 तक हो सकती है. अनधिकृत जगह से बचें, क्योंकि इससे कानूनी समस्या के साथ सेफ्टी के लिए भी खतरा बढ़ता है.

इंस्टॉलेशन का प्रोसेस

कार को लिफ्ट पर चढ़ाकर बैटरी डिस्कनेक्ट करें. बूट या फ्लोर के नीचे मजबूत ब्रैकेट से PESO सर्टिफाइड CNG सिलेंडर फिट करें. हाई प्रेशर स्टेनलेस स्टील पाइप से सिलेंडर को रेगुलेटर से जोड़ें. फिलर वाल्व और सेफ्टी वाल्व बाहर (रियर बंपर या साइड) लगाएं. इंजन बे में रेगुलेटर यूनिट फिट करें, जो CNG को कम प्रेशर में बदलकर वाष्प बनाती है और इंजन कूलेंट से जुड़ती है. Sequential Kit में प्रत्येक सिलेंडर के इनटेक मैनिफोल्ड पर CNG इंजेक्टर लगाएं और ECU से कनेक्ट करें. डैशबोर्ड पर CNG/Petrol स्विच और वायरिंग सुरक्षित तरीके से करें.

टेस्टिंग, ट्यूनिंग और लीगल अप्रूवल

इंस्टॉलेशन के बाद हाई प्रेशर लीकेज टेस्ट जरूर करवाएं. कार स्टार्ट करके CNG मोड में स्कैनर टूल से AFR, टाइमिंग आदि ट्यून करें. दोनों मोड में टेस्ट ड्राइव लें. फिर फिटिंग सेंटर से ARAI/PESO सर्टिफिकेट, हाइड्रो टेस्ट रिपोर्ट और इंस्टॉलेशन सर्टिफिकेट लें. RTO में फॉर्म 22A जमा कर RC अपडेट करवाएं, जिसमें फ्यूल टाइप CNG/Petrol लिखा जाए. इंश्योरेंस कंपनी को भी सूचित करें.

बोनस टिप: हर 3 साल में सिलेंडर हाइड्रो टेस्ट करवाएं और हर 10,000 किमी पर सर्विसिंग जरूरी है. CNG मोड में 10-15% पावर कम हो सकती है, लेकिन माइलेज 50-80% बढ़ जाता है. सुरक्षा से कभी समझौता न करें और केवल भरोसेमंद जगह से काम करवाएं. दिल्ली जैसे शहरों में CNG उपलब्धता अच्छी होने से ये विकल्प बहुत फायदेमंद साबित होता है.

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Սաթիշ Կումարը թվային բովանդակության ստեղծող և նորությունների հրատարակիչ է։ Նա գրում է հոդվածներ պետական ​​ծրագրերի, տեխնոլոգիական նորությունների և ավտոմոբիլային թարմացումների վերաբերյալ։ Նրա հոդվածների նպատակն է մարդկանց ճիշտ և արագ տեղեկատվություն տրամադրելը։