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फॉर्च्यूनर चलाने का मासिक खर्च कितना है भारत में जानिए पूरी डिटेल.

Aman Shanti .In
By Aman Shanti .In On January 20, 2026
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भारत में फॉर्च्यूनर कई लोगों की पसंदीदा कारों में से एक है. खासकर जब बात लग्जरी SUV की आती है तो टोयोटा फॉर्च्यूनर पहली पसंद मानी जाती है. कई आम मिडिल आदमी इसे खरीदने का भी सपना देखते है. लेकिन क्या कभी सोचा है कि इस कार को रखना और रोज़ चलाना कितना महंगा पड़ सकता है?

आमतौर पर लोग सिर्फ कार की कीमत देखते हैं, लेकिन असली खेल कार खरीदने के बाद शुरू होता है. खर्च बीमा से लेकर मेंटेनेंस, ईंधन, पार्किंग तक हर जगह बंटा होता है. एक ऐवरेज का हिसाब निकालें तो फॉर्च्यूनर रखने का खर्च आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है. फॉर्च्यूनर लगभग ₹55 लाख की आती है और इसे रोज़ चलाने पर कुल रनिंग कॉस्ट महीने में लगभग कितना होगा, आइए इसके बारे में आपको पूरा हिसाब बताते हैं.

ड्राइवर सैलरी

अंकुर वारिको की यूट्यूब वीडियो के अनुसार, ज्यादातर लोग फॉर्च्यूनर जैसी कारें के लिए ड्राइवर रख लेते हैं. इन कारों के लिए कीमती वाहन और सुरक्षा को देखते हुए ड्राइवर सैलरी भी ज्यादा होती है. औसतन फॉर्च्यूनर ड्राइवर की सैलरी लगभग ₹25,000 महीना मानी जाती है. यानी सिर्फ ड्राइवर पर साल में 3 लाख रुपये खर्च हो जाते हैं.

डीजल का खर्चा

SUV में माइलेज कम और ईंधन की लागत ज्यादा होती है. फॉर्च्यूनर अगर दिन में लगभग 50 किलोमीटर चले तो महीने में करीब ₹15,000 केवल डीजल पर खर्च हो जाते हैं. हालांकि, अगर कार शहर के ट्रैफिक में फंसी रहे या हाईवे पर ज्यादा चले, तो यह खर्च और बढ़ सकता है.

इंश्योरेंस का खर्च

लग्जरी कारों का बीमा भी छोटा खर्च नहीं होता. फॉर्च्यूनर के लिए इंश्योरेंस की औसतन EMI लगभग ₹8,000 महीना बैठती है. यह लागत गाड़ी की उम्र, मॉडल और क्लेम हिस्ट्री के आधार पर थोड़ा ऊपर-नीचे हो सकती है.

कार का मेंटेनेंस

SUV होने की वजह से फॉर्च्यूनर का मेंटेनेंस खर्च भी काफी अधिक है. सर्विसिंग से लेकर ब्रेक पैड, सस्पेंशन और व्हील अलाइनमेंट जैसे कामों पर औसतन ₹6,000 महीना लग जाता है. गाड़ी जितनी पुरानी होती जाती है, यह खर्च धीरे-धीरे बढ़ भी सकता है.

पार्किंग चार्ज

बड़े शहरों में SUV पार्किंग का किराया बहुत ज्यादा होता है. फॉर्च्यूनर जैसी बड़ी गाड़ी के लिए सुरक्षित जगह चाहिए, जहां किराया औसतन 5,000 रुपये मासिक मान लिया जाता है. अगर आप कामकाजी इलाके में रहते हैं तो यह कीमत और भी ऊंची हो सकती है.

क्लीनिंग और कार केयर

बड़ी गाड़ियों को संभालना आसान नहीं होता. रोज धुलाई और पॉलिश करवाने पर औसतन 3,000 रुपये महीना खर्च हो जाता है.

टोल और अन्य छोटे खर्च

टोल टैक्स, टाइम-टू-टाइम रिपेयर, पंक्चर, छोटी खराबियां, नया जुर्माना, कार एक्सेसरी और अन्य मिसलेनियस खर्च जोड़ दें तो हर महीने लगभग 6,000 रुपये और खर्च होते हैं.

इतना होगा हर महीने खर्चा

इन सभी खर्चों को जोड़ने पर एक महीने में फॉर्च्यूनर चलाने का कुल खर्च लगभग ₹68,000 बैठता है. यानी हर दिन लगभग ₹4,000 का खर्च आएगा.

गाड़ी की कीमत लगभग ₹55 लाख मानी जाए और मंथली रनिंग कॉस्ट 68,000 रुपये हो सकती है, तो पांच साल में पूरा खर्च ₹96 लाख के करीब बैठता है. यानी गाड़ी लेने के बाद पांच साल में आपके लगभग ₹70 लाख सिर्फ इस गाड़ी पर खर्च हो सकते है.

आखिर क्यों महंगी है फॉर्च्यूनर चलाना?

फॉर्च्यूनर एक हाई-क्लास SUV है, जिसमें बड़ा इंजन होता है. इसके अलावा ईंधन माइलेज कम होता है. साथ ही, सर्विस पार्ट्स महंगे होते हैं और टायर और ब्रेक्स जैसे सामान की लाइफ छोटी होती है. इनका इंश्योरेंस और टैक्स भी अधिक होते हैं.

इस हिसाब से देखें तो फॉर्च्यूनर रखना सिर्फ शौक नहीं, बल्कि एक महंगी जिम्मेदारी भी है. भारत में जहां मिडिल क्लास अपनी आमदनी का बड़ा हिस्सा EMI और जरूरतों पर लगाता है, वहीं लग्जरी कार रोजाना ₹4,000 खर्च करवाती है. तो अगर आप फॉर्च्यूनर खरीदने की सोच रहे हैं, तो सिर्फ खरीदने के बजट पर नहीं बल्कि इसके रोजाना के बजट पर भी ध्यान देकर खरीदारी करें.

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Սաթիշ Կումարը թվային բովանդակության ստեղծող և նորությունների հրատարակիչ է։ Նա գրում է հոդվածներ պետական ​​ծրագրերի, տեխնոլոգիական նորությունների և ավտոմոբիլային թարմացումների վերաբերյալ։ Նրա հոդվածների նպատակն է մարդկանց ճիշտ և արագ տեղեկատվություն տրամադրելը։

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