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भारत के इस ड्रोन ने बढ़ाई पाक और चीन की टेंशन! 1000 किमी दूर तक दुश्मन को कर सकता है ढेर, जानिए क्या है टेक्नोलॉजी

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By Aman Shanti .In On February 17, 2026
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Sheshnag Drone: रियाद में आयोजित World Defence Show 2026 के दौरान भारत के निजी रक्षा क्षेत्र ने एक ऐसी तकनीक पेश की जिसने सबका ध्यान खींचा. NewSpace Research and Technologies द्वारा विकसित शेषनाग 150 स्वॉर्म ड्रोन को 1,000 किलोमीटर तक गहराई में हमला करने में सक्षम लॉइटरिंग म्युनिशन के रूप में पेश किया गया है. यह कदम दिखाता है कि अब भारत की मानवरहित युद्ध क्षमता सिर्फ सीमित सामरिक जरूरतों तक नहीं रह गई है.

लंबी दूरी और भारी मारक क्षमता

शेषनाग 150 को छोटे ड्रोन और महंगे क्रूज़ मिसाइलों के बीच की कड़ी के रूप में डिजाइन किया गया है. कंपनी के अनुसार यह 25 से 40 किलोग्राम तक का वारहेड ले जाने में सक्षम है जिससे मजबूत और महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है. इसकी उड़ान अवधि लगभग पांच घंटे बताई गई है जो संकेत देती है कि इसमें बैटरी के बजाय छोटे इंजन का इस्तेमाल हो सकता है.

इसका डेल्टा-विंग ढांचा स्थिर उड़ान और लंबी दूरी को प्राथमिकता देता है. दावा है कि यह लगभग पांच मीटर के दायरे में सटीक वार कर सकता है. यदि परीक्षणों में यह सटीकता बरकरार रहती है तो इसे पारंपरिक गाइडेड मिसाइलों की श्रेणी में रखा जा सकता है.

अकेला नहीं, झुंड में करता है हमला

शेषनाग 150 की खासियत सिर्फ इसकी दूरी या पेलोड नहीं बल्कि इसका स्वॉर्म यानी समूह में काम करने का मॉडल है. इसे अकेले हथियार की तरह नहीं बल्कि एक समन्वित हमला प्रणाली के हिस्से के रूप में तैयार किया गया है.

एक साथ छोड़े गए कई ड्रोन अलग-अलग भूमिकाएं निभा सकते हैं. कुछ दुश्मन के रडार को भ्रमित करने के लिए डिकॉय का काम करेंगे, कुछ खुफिया जानकारी जुटाएंगे या संचार में बाधा डालेंगे जबकि मुख्य हमलावर ड्रोन लक्ष्य पर सटीक वार करेंगे. इस तरह की रणनीति से दुश्मन की वायु रक्षा प्रणाली पर एक साथ कई दिशाओं से दबाव बनता है.

भारत की स्ट्राइक क्षमता में नई कड़ी

सैन्य दृष्टि से देखें तो यह प्रणाली एक महत्वपूर्ण खाली जगह को भरती है. क्रूज़ मिसाइलें महंगी और सीमित संख्या में होती हैं जबकि पारंपरिक सामरिक ड्रोन लंबी दूरी तक नहीं पहुंच पाते. 1,000 किलोमीटर की मारक क्षमता के साथ कमांड सेंटर, एयर डिफेंस ठिकाने, गोला-बारूद डिपो और हवाई अड्डों जैसे रणनीतिक लक्ष्यों पर बिना पायलट वाले विमानों को जोखिम में डाले हमला संभव हो सकता है.

फिलहाल किसी आधिकारिक खरीद समझौते की घोषणा नहीं हुई है लेकिन यह कार्यक्रम निजी निवेश से विकसित किया गया बताया जाता है और निर्यात के लिए भी तैयार रखा गया है.

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Սաթիշ Կումարը թվային բովանդակության ստեղծող և նորությունների հրատարակիչ է։ Նա գրում է հոդվածներ պետական ​​ծրագրերի, տեխնոլոգիական նորությունների և ավտոմոբիլային թարմացումների վերաբերյալ։ Նրա հոդվածների նպատակն է մարդկանց ճիշտ և արագ տեղեկատվություն տրամադրելը։