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ये हैं दुनिया की सबसे खतरनाक हाइपरसोनिक मिसाइल! अमेरिका को भी इनसे लगता है डर, अभी देखें लिस्ट

Aman Shanti .In
By Aman Shanti .In On March 17, 2026
1 min read 1.2k views
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Hypersonic Missiles: दुनिया में हथियारों की दौड़ अब एक ऐसे मुकाम पर पहुंच चुकी है जहां स्पीड ही असली ताकत बन गई है. हाइपरसोनिक मिसाइलें इस दौड़ की सबसे खतरनाक कड़ी मानी जा रही हैं जो इतनी तेज और चालाक होती हैं कि इन्हें रोक पाना बेहद मुश्किल हो जाता है. यही वजह है कि ये मिसाइलें अमेरिका जैसी महाशक्ति के लिए भी चिंता का कारण बनी हुई हैं.

पहली बार युद्ध में इस्तेमाल ने बदली तस्वीर

साल 2022 में रूस ने यूक्रेन के खिलाफ संघर्ष के दौरान अपनी हाइपरसोनिक मिसाइल किनझाल का इस्तेमाल किया. यह पहली बार था जब इस तरह की अत्याधुनिक मिसाइल को असली युद्ध में उतारा गया. फाइटर जेट से छोड़ी गई यह मिसाइल आवाज की रफ्तार से कई गुना तेज उड़ते हुए अपने लक्ष्य तक पहुंची और दुनिया को इसकी ताकत का अंदाजा हो गया.

क्यों खतरनाक हैं ये मिसाइलें?

हाइपरसोनिक मिसाइलों की सबसे बड़ी खासियत उनकी रफ्तार और लचीलापन है. ये मिसाइलें मैक 5 से लेकर मैक 10 तक की स्पीड हासिल कर सकती हैं. लेकिन सिर्फ तेज होना ही इनकी ताकत नहीं है ये हवा में अपने रास्ते को बदल सकती हैं नीचे उड़ सकती हैं और दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा दे सकती हैं.

जहां पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलें तय रास्ते पर चलती हैं, वहीं हाइपरसोनिक हथियार उड़ान के दौरान दिशा बदलते रहते हैं. यही वजह है कि इन्हें ट्रैक करना और गिराना बेहद मुश्किल हो जाता है.

रूस और चीन की बढ़त

रूस और चीन इस तकनीक में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. दोनों देशों ने कई हाइपरसोनिक हथियार तैयार कर लिए हैं या उन पर काम कर रहे हैं. दूसरी ओर, संयुक्त राज्य अमेरिका अभी इस क्षेत्र में पूरी तरह से सफल हथियार तैयार नहीं कर पाया है, हालांकि वह कई प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है.

किनझाल

किनझाल मिसाइल को रूस की सबसे चर्चित हाइपरसोनिक तकनीक माना जाता है. यह फाइटर जेट से लॉन्च होती है और करीब मैक 10 की रफ्तार तक पहुंच सकती है. इसमें पारंपरिक या परमाणु दोनों तरह के हथियार लगाए जा सकते हैं. हालांकि, हाल के संघर्षों में कुछ मामलों में इसे इंटरसेप्ट भी किया गया है जिससे इसकी अजेयता पर सवाल भी उठे हैं.

जिरकॉन और अवांगार्ड

रूस जिरकॉन नाम की एक और हाइपरसोनिक मिसाइल पर काम कर रहा है जो स्क्रैमजेट इंजन की मदद से उड़ती है और खुद ही ऑक्सीजन लेकर आगे बढ़ती है. इससे इसकी रेंज और स्पीड दोनों बढ़ जाती हैं. वहीं अवांगार्ड एक ग्लाइड व्हीकल है जो बैलिस्टिक मिसाइल से अलग होकर बेहद तेज गति से लक्ष्य की ओर बढ़ता है और रास्ते में दिशा बदल सकता है. इसे मौजूदा डिफेंस सिस्टम के लिए बड़ा खतरा माना जा रहा है.

चीन की DF-17 और नई तकनीक

चीन ने भी DF-17 जैसी हाइपरसोनिक मिसाइल विकसित की है जो कम ऊंचाई पर उड़ते हुए लक्ष्य तक पहुंचती है. इसकी गति और वजन इसे जहाजों के लिए बेहद खतरनाक बनाते हैं. इसके अलावा Xingkong-2 जैसी मिसाइलें नई डिजाइन पर आधारित हैं जो शॉकवेव पर “सर्फ” करते हुए आगे बढ़ती हैं. यह तकनीक भविष्य में और ज्यादा घातक साबित हो सकती है.

पारंपरिक मिसाइलें अभी भी अहम

हालांकि हाइपरसोनिक हथियार तेजी से आगे बढ़ रहे हैं लेकिन पारंपरिक मिसाइलें अभी भी युद्ध में अहम भूमिका निभा रही हैं. यूक्रेन युद्ध में इसका साफ असर देखा गया है जहां सामान्य रॉकेट और मिसाइलें भी निर्णायक साबित हुईं.

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Սաթիշ Կումարը թվային բովանդակության ստեղծող և նորությունների հրատարակիչ է։ Նա գրում է հոդվածներ պետական ​​ծրագրերի, տեխնոլոգիական նորությունների և ավտոմոբիլային թարմացումների վերաբերյալ։ Նրա հոդվածների նպատակն է մարդկանց ճիշտ և արագ տեղեկատվություն տրամադրելը։