Տեխնիկական նորություններ

रुकिए! सेहत को लेकर ChatGPT से सवाल पूछने से पहले ये सच्चाई जरूर जान लें

Aman Shanti .In
By Aman Shanti .In On March 5, 2026
1 min read 1.2k views
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ChatGPT: आज दुनिया भर में करोड़ों लोग अपने सवालों के जवाब के लिए चैटबॉट्स का सहारा ले रहे हैं. ऐसे में टेक कंपनियों का स्वास्थ्य से जुड़े सवालों के लिए खास एआई प्रोग्राम लाना तय था. इसी कड़ी में OpenAI ने जनवरी में ChatGPT Health नाम का नया वर्जन पेश किया जो यूजर्स के मेडिकल रिकॉर्ड, वेलनेस ऐप्स और वियरेबल डिवाइस के डेटा का विश्लेषण कर स्वास्थ्य संबंधी सवालों का जवाब देने का दावा करता है. फिलहाल इस सुविधा के लिए वेटिंग लिस्ट है. वहीं, दूसरी कंपनी Anthropic भी अपने चैटबॉट Claude में कुछ यूजर्स को मिलती-जुलती सुविधाएं दे रही है.

दोनों कंपनियां साफ कहती हैं कि ये एआई मॉडल डॉक्टर का विकल्प नहीं हैं. इनका उद्देश्य बीमारी का निदान करना नहीं बल्कि जटिल रिपोर्ट समझाना, डॉक्टर से मिलने की तैयारी करवाना और मेडिकल डेटा में छिपे ट्रेंड्स को समझने में मदद करना है.

क्या AI गूगल से बेहतर जानकारी दे सकता है?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ डॉक्टरों और शोधकर्ताओं का मानना है कि ऐसे एआई टूल पारंपरिक इंटरनेट सर्च से ज्यादा व्यक्तिगत जानकारी दे सकते हैं. उदाहरण के तौर पर, University of California, San Francisco के विशेषज्ञ डॉ. रॉबर्ट वॉख्टर का कहना है कि सही तरीके से इस्तेमाल करने पर ये टूल उपयोगी साबित हो सकते हैं.

एआई प्लेटफॉर्म कभी-कभी गलत जानकारी भी दे सकते हैं लेकिन यदि आप उन्हें अपनी उम्र, दवाइयों, लक्षणों और पिछली रिपोर्ट से जुड़ी पर्याप्त जानकारी दें तो जवाब अधिक सटीक और संदर्भित मिल सकता है.

कब AI को छोड़कर सीधे डॉक्टर के पास जाएं
कुछ स्थितियां ऐसी होती हैं जहां चैटबॉट से सलाह लेना खतरनाक हो सकता है. सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द या तेज सिरदर्द जैसे लक्षण मेडिकल इमरजेंसी का संकेत हो सकते हैं. ऐसी परिस्थिति में तुरंत अस्पताल जाना ही बेहतर है.

Stanford University से जुड़े डॉ. लॉयड माइनर का कहना है कि किसी भी बड़े या छोटे मेडिकल फैसले के लिए सिर्फ एआई पर निर्भर रहना समझदारी नहीं है. एआई की सलाह को हमेशा विशेषज्ञ की राय के साथ मिलाकर ही देखें.

अपनी मेडिकल जानकारी साझा करने से पहले सोचें
एआई से बेहतर और व्यक्तिगत सलाह पाने के लिए अक्सर यूज़र्स को अपनी निजी मेडिकल जानकारी साझा करनी पड़ती है. लेकिन यहां गोपनीयता का सवाल अहम हो जाता है. अमेरिका में मेडिकल डेटा की सुरक्षा के लिए HIPAA कानून लागू है जो डॉक्टरों और अस्पतालों पर सख्त नियम लागू करता है. हालांकि, चैटबॉट बनाने वाली कंपनियां इस कानून के दायरे में नहीं आतीं.

कंपनियां दावा करती हैं कि यूज़र का हेल्थ डेटा अलग और सुरक्षित रखा जाता है तथा मॉडल ट्रेनिंग में इसका उपयोग नहीं किया जाता. फिर भी, किसी भी प्लेटफॉर्म पर संवेदनशील जानकारी अपलोड करने से पहले उसकी प्राइवेसी पॉलिसी समझना जरूरी है.

क्या चैटबॉट सच में भरोसेमंद हैं?
एआई को लेकर उत्साह जरूर है लेकिन इसके परीक्षण अभी शुरुआती दौर में हैं. Oxford University के शोध में पाया गया कि काल्पनिक मेडिकल केस में एआई ने 95% मामलों में सही बीमारी पहचान ली. लेकिन असली यूज़र्स के साथ बातचीत के दौरान दिक्कतें सामने आईं. अक्सर लोग जरूरी जानकारी नहीं देते और एआई कभी-कभी सही व गलत सलाह का मिश्रण दे देता है. ऐसे में यूजर के लिए सही-गलत में फर्क करना मुश्किल हो जाता है.

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Սաթիշ Կումարը թվային բովանդակության ստեղծող և նորությունների հրատարակիչ է։ Նա գրում է հոդվածներ պետական ​​ծրագրերի, տեխնոլոգիական նորությունների և ավտոմոբիլային թարմացումների վերաբերյալ։ Նրա հոդվածների նպատակն է մարդկանց ճիշտ և արագ տեղեկատվություն տրամադրելը։