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रोजाना फोन और लैपटॉप चार्ज करने में कितनी बिजली खपत होती है? सच जानकर हैरान रह जाएंगे

Aman Shanti .In
By Aman Shanti .In On June 29, 2026
2 min read 1.2k views
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  • मोबाइल फोन सालाना 3-4 यूनिट बिजली लेता है, लागत 50-60 रुपये।
  • लैपटॉप सबसे ज्यादा 130-140 यूनिट बिजली खपत करता है, 400-1600 रुपये खर्च।
  • टैबलेट सालाना 15-20 यूनिट बिजली उपयोग करता है, लागत लगभग 500 रुपये।
  • बिना जुड़े चार्जर भी बिजली खींचते, इन्हें बंद कर खपत रोकें।

Laptop-Smartphone Charging Power Consumption: हर दिन करोड़ों लोग अपने स्मार्टफोन, लैपटॉप और टैब आदि डिवाइसेस को चार्ज करते हैं. कई घरों में इन डिवाइसेस की संख्या एक से ज्यादा होती है और रोजाना इनको चार्ज करने में घंटों का समय लगता है. पर क्या आपने कभी सोचा है कि इन डिवाइसेस को चार्ज करने में कितनी बिजली की खपत होती है? अगर आपके पास भी फोन और लैपटॉप जैसे कई गैजेट हैं तो यह जानना जरूरी है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि मोबाइल और लैपटॉप को चार्ज करने में कितनी बिजली खर्च होती है और इससे आपकी जेब पर कितना असर पड़ता है.

मोबाइल चार्ज करने में कितनी खपत?

मोबाइल फोन चार्जिंग के दौरान ज्यादा एनर्जी कंज्यूम नहीं करते, लेकिन इन्हें डेली चार्ज करना पड़ता है इसलिए खपत को समझना जरूरी है. रिपोर्ट्स के अनुसार, रोजाना चार्ज करने से स्मार्टफोन सालभर में लगभग 3-4 यूनिट बिजली की खपत कर लेते हैं. भारत में अलग-अलग राज्यों के हिसाब से बिजली की एक यूनिट का खर्च 3-12 रुपये हो सकता है. इस हिसाब से मोबाइल फोन चार्जिंग में आपको सालभर में लगभग 50-60 रुपये ही खर्च करने पड़ते हैं.

लैपटॉप की खपत ज्यादा

मोबाइल फोन की तुलना में लैपटॉप ज्यादा बिजली कंज्यूम करता है. लैपटॉप को चार्ज करने में सालभर में लगभग 130-140 यूनिट खर्च हो जाती है. इसका मतलब है कि सालभर में लैपटॉप चार्जिंग का खर्चा 400-1600 रुपये तक हो सकता है. इस तरह देखा जाए तो यह सबसे ज्यादा बिजली खाने वाला डिवाइस है. 

टैबलेट- बिजली खपत के मामले में टैबलेट फोन और लैपटॉप के बीच आते हैं. एक टैबलेट को चार्ज करने में सालभर में कुल 15-20 यूनिट बिजली लगती है. अगर बिजली बिल के हिसाब से बात करें तो यह इसका खर्चा लघबग 500 रुपये तक ही जाता है.

डिवाइस कनेक्ट न होने पर भी खपत होती है बिजली

कई लोगों की आदत होती है कि वो फोन चार्ज होने के बाद उसे हटा लेंगे, लेकिन चार्जर को बंद नहीं करेंगे. ऐसी स्थिति में चार्जर लगातार पावर कंज्यूम करता रहता है, भले ही इससे कोई डिवाइस कनेक्टेड न हो. इसे फैंटम लोड कहा जाता है और यह बिजली बिल पर भी असर डाल सकता है. इसलिए जब कोई डिवाइस कनेक्ट न हो तो चार्जर को बंद कर दें. इससे बिजली की भी बचत होगी और चार्जर भी ज्यादा लंबे समय तक चलेगा. 

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Սաթիշ Կումարը թվային բովանդակության ստեղծող և նորությունների հրատարակիչ է։ Նա գրում է հոդվածներ պետական ​​ծրագրերի, տեխնոլոգիական նորությունների և ավտոմոբիլային թարմացումների վերաբերյալ։ Նրա հոդվածների նպատակն է մարդկանց ճիշտ և արագ տեղեկատվություն տրամադրելը։