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सड़क पर घूम रहे बैल से कैसे बनती है बिजली, जानें नॉर्मल बिजली से यह कितनी सस्ती?

Aman Shanti .In
By Aman Shanti .In On June 17, 2026
2 min read 1.2k views
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  • लखनऊ की एक गौशाला में बैलों से बिजली का अनोखा मॉडल बना।
  • बैल ट्रेडमिल पर चलकर यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत में बदलते हैं।
  • उत्पादित बिजली ग्रिड से सस्ती (₹1.5/यूनिट) पड़ती है।
  • यह प्रणाली किसानों को सिंचाई जैसे कार्यों में मदद करेगी।

पूरी दुनिया इन दिनों क्लीन और ग्रीन एनर्जी पर फोकस कर रही है. यही वजह है कि पिछले कुछ समय से भारत में सोलर एनर्जी की तरफ लोगों का रुझान बढ़ा है. इसी बीच बिजली जनरेट करने का एक और तरीका भी सामने आया है, जिसके बारे में ज्यादा लोगों ने नहीं सोचा था. अब सड़क पर घूमते बैलों से भी बिजली बनाई जा सकती है और यह केवल थ्योरी का कॉन्सेप्ट नहीं है. उत्तर प्रदेश के लखनऊ की एक गौशाला में बैलों से बिजली बनाने का अनोखा मॉडल तैयार हो चुका है. सुनने में यह भले ही अजीब लग सकता है, लेकिन यहां बैलों की मदद से बिजली पैदा की जा रही है. 

कैसे बनती है बैल से बिजली?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लखनऊ के सिद्धपुरा गांव में गौशाला चलाने वाले पूर्व डीएसपी शैलेंद्र सिंह ने यह मॉडल तैयार किया है. यह मॉडल फ्लाईव्हील, गियरबॉक्स और ग्रेविटी पर बेस्ड है और यह बैलों की चलने से पैदा हुई एनर्जी को बिजली में बदल देता है. इस मॉडल में एक बड़ा व्हील लगाया है, जो अल्टरनेटर से कनेक्टेड है. यह एक ट्रेडमिल की तरह काम करता है. इस पर दो बैलों को खड़ा कर उनके आगे चारा रख दिया जाता है और वो चारा खाते हुए एक ही स्थान पर खड़े-खड़े चलते रहते हैं. उनके चलने से जो मैकेनिकल एनर्जी पैदा होती है, अल्टरनेटर उसे इलेक्ट्रिकल पावर में बदल देता है.

नॉर्मल बिजली से सस्ती है बैलों से पैदा हुई बिजली

बैलों के चलने से पैदा होने वाली बिजली की लागत ग्रिड से आने वाली बिजली के मुकाबले काफी कम है. नॉर्मल बिजली की प्रति यूनिट का खर्च औसतन 7 रुपये है, वहीं बैलों के चलने से बनने वाली बिजली का खर्च 1-1.5 रुपये प्रति यूनिट है. एक बैल से करीब 5 किलोवॉट और सोलर एनर्जी सिस्टम के साथ हाइब्रिड करने के बाद करीब 10 किलोवॉट तक बिजली पैदा की जा सकती है. शैलेंद्र सिंह के मुताबिक, यह सिस्टम 8 घंटे में 80 यूनिट बिजली बनाता है और गौशाला की मौजूदा जरूरतें इसी से पूरी होती है. इस मॉडल को पेटेंट भी करवाया जा चुका है. 

किसानों के भी काम आ सकता है यह सिस्टम

यह सिस्टम किसानों के लिए बहुत काम का साबित हो सकता है. कई किसान अपने खेतों में काम के लिए बैल रखते हैं और अब इस तरीके से बिजली उत्पादन में भी उनकी मदद ली जा सकती है. इस तरह पैदा हुई बिजली से सिंचाई की मोटर आदि आसानी से चल जाएगी, जिससे बिजली की बचत भी होगी.

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Սաթիշ Կումարը թվային բովանդակության ստեղծող և նորությունների հրատարակիչ է։ Նա գրում է հոդվածներ պետական ​​ծրագրերի, տեխնոլոգիական նորությունների և ավտոմոբիլային թարմացումների վերաբերյալ։ Նրա հոդվածների նպատակն է մարդկանց ճիշտ և արագ տեղեկատվություն տրամադրելը։