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सरकार ने किया बड़ा ऐलान! ट्रक-बस चलाने वालों के लिए बड़ी राहत, 7 साल तक नहीं चाहिए परमिट

Aman Shanti .In
By Aman Shanti .In On July 9, 2026
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केंद्र सरकार ने वैकल्पिक ईंधन (Alternative Fuel) से चलने वाले कॉमर्शियल वाहनों के लिए बड़ा फैसला लिया है. इस कदम का फोकस एनवायरमेंट फ्रेंडली ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देना और क्लियर फ्यूल के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना है. सरकार ने बैटरी (इलेक्ट्रिक), मेथनॉल, एथेनॉल और हाइड्रोजन जैसे क्लीन फ्यूल यानी स्वच्छ ईंधन से चलने वाले कमर्शियल वाहनों को बड़ी राहत दी है, जिससे ट्रांसपोर्ट सेक्टर को भी फायदा मिलने की उम्मीद है.

सरकार के इस फैसले से ट्रक, बस और अन्य माल व यात्री वाहनों का संचालन पहले के मुकाबले आसान हो सकेगा. साथ ही यह पहल देश के 2070 तक नेट जीरो एमिशन टारगेट और सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट सिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रही है. इससे कंपनियां और ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर ऑप्शनल ईंधन वाले वाहनों को अपनाने के लिए अधिक प्रोत्साहित होंगे.

क्या छूट मिली है?

मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 66(1) के तहत आमतौर पर माल ढोने वाले ट्रक, बस और अन्य कॉमर्शियल वाहनों को संचालन के लिए परमिट लेना अनिवार्य होता है, लेकिन केंद्र सरकार ने अब बैटरी इलेक्ट्रिक, मेथनॉल, एथेनॉल और हाइड्रोजन जैसे साफ ईंधन से चलने वाले कॉमर्शियल वाहनों को इस परमिट की अनिवार्यता से 7 साल तक की छूट दे दी है.

यह छूट उन सभी कमर्शियल वाहनों पर लागू होगी जो इन वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग करते हैं. इससे परिवहन कंपनियों और वाहन मालिकों को परमिट से जुड़ी फॉर्मेलिटी और खर्च से राहत मिलेगी. सरकार का मानना है कि इससे इलेक्ट्रिक और अन्य क्लीन फ्यूल वाले ट्रक और बसों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हो सकती है.

छूट का फायदा लेने के लिए क्या है शर्त?

सरकार ने इस राहत के साथ एक जरूरी शर्त भी रखी है. इस छूट का फायदा केवल उन्हीं वाहनों को मिलेगा, जिनमें AIS-140 मानक का व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) यानी जीपीएस आधारित ट्रैकिंग सिस्टम लगा होगा.

यह डिवाइस वाहन की रियल टाइम लोकेशन, स्पीड और अन्य जरूरी जानकारी उपलब्ध कराएगा, जिससे संबंधित एजेंसियां वाहनों की बेहतर निगरानी कर सकेंगी. सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था सुरक्षा बढ़ाने और नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है. यदि किसी वाहन में निर्धारित मानक का VLTD नहीं होगा, तो उसे इस छूट का फायदा नहीं मिलेगा.

वाहन मालिकों को क्या होगा फायदा?

7 साल तक परमिट की अनिवार्यता से छूट मिलने से कॉमर्शियल वाहन संचालकों की परिचालन लागत कम हो सकती है. परमिट फीस, कागजी कार्यवाही और अन्य प्रशासनिक प्रोसेस पर होने वाला खर्च बचेगा. इससे छोटे और बड़े दोनों तरह के ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों को राहत मिलेगी और वैकल्पिक ईंधन वाले वाहनों में निवेश करना अधिक आकर्षक बन सकता है.

इसके साथ ही पर्यावरण को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है. इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन, मेथनॉल और एथेनॉल जैसे स्वच्छ ईंधनों के उपयोग से प्रदूषण कम होगा और शहरों की हवा बेहतर बनाने में मदद मिलेगी. सरकार का यह कदम ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी पहलों को भी मजबूती दे सकता है.

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Սաթիշ Կումարը թվային բովանդակության ստեղծող և նորությունների հրատարակիչ է։ Նա գրում է հոդվածներ պետական ​​ծրագրերի, տեխնոլոգիական նորությունների և ավտոմոբիլային թարմացումների վերաբերյալ։ Նրա հոդվածների նպատակն է մարդկանց ճիշտ և արագ տեղեկատվություն տրամադրելը։