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सुपर कंप्यूटर के मामले में चीन ने अमेरिका को पीटा, जानें कैसे आगे निकला ड्रैगन?

Aman Shanti .In
By Aman Shanti .In On June 25, 2026
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  • चीन का LineShine सुपरकंप्यूटर बना दुनिया का सबसे तेज।
  • इसने अमेरिकी El Capitan को पछाड़कर वैश्विक रैंकिंग में शीर्ष पाया।
  • यह प्रति सेकंड 2 क्विंटिलियन गणना करता है, El Capitan से 20% अधिक तेज।
  • यह उपलब्धि अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद चीन की तकनीकी प्रगति दिखाती है।

World’s Fastest Supercomputer: सुपरकंप्यूटर की रेस में अमेरिका को पछाड़ते हुए चीन नया बादशाह बना है. दुनिया के सबसे तेज सुपरकंप्यूटर की रैंकिंग में चीन पहले पायदान पर पहुंच गया है. 2017 के बाद यह पहली बार चीन इस शीर्ष मुकाम पर पहुंचा है. चीन के शेन्झान स्थित नेशनल सुपरकंप्यूटिंग सेंटर के LineShine सुपरकंप्यूटर को TOP500 नाम की ग्लोबल रैंकिंग में पहला स्थान मिला है. पिछले कुछ वर्षों से अमेरिका इस मामले में आगे बना हुआ था, लेकिन चीन ने अब उसे पटखनी दे दी है.

इस सुपरकंप्यूटर को पछाड़कर LineShine सिस्टम बना किंग

TOP500 की नई रैंकिंग में LineShine ने अमेरिका के El Capitan को पीछे छोड़कर टॉप स्पॉट हासिल किया है. El Capitan सुपरकंप्यूटर अमेरिका की लॉरेंस लिवरमोर लैबोरेट्री में है और इसे अमेरिका के परमाणु हथियारों के जखीरे को डेवलप और मैंटेन करने के लिए यूज किया जाता है. यह रैंकिंग ऐसे समय में सामने आई है, जब एडवांस कंप्यूटिंग को लेकर अमेरिका और चीन के बीच मुकाबला तेज होता जा रहा है. सोमवार को ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए थे, जो अमेरिका को क्वांटम कंप्यूटिंग में चीन से आगे ले जाने के लिए लाया जा रहा है.

कितना फास्ट है चीन का सुपरकंप्यूटर?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन का लाइनशाइन सिस्टम हर सेकंड 2 क्विंटिलियन कैलकुलेशन कर सकता है. यह अमेरिकी सुपरकंप्यूटर El Capitan के मुकाबले 20 प्रतिशत ज्यादा है. रैंकिंग में इस लेवल पर पहुंचने वाला यह एकमात्र सुपरकंप्यूटर है. यह सिस्टम पूरी तरह जनरल पर्पज सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट्स (CPUs) पर चलता है, जिनमें प्रोसेसिंग कोर कम होती हैं और ये GPU की स्पीड पर कॉम्प्लेक्स टास्क को पूरा नहीं कर पातीं. TOP500 रैंकिंग के ऑर्गेनाइजर में से एक Jack Dongarra ने कहा कि लाइनशाइन के जरिए चीन ने दिखा दिया है कि वह अमेरिका के लगाए एक्सपोर्ट बैन के बावजूद एडवांस कंप्यूटिंग में खुद को आगे रख सकता है. एक्सपोर्ट बैन से चीन के लिए कुछ कंपोनेंट की एक्सेस स्लो हो सकती है, लेकिन इससे उसे घरेलू विकल्प खोजने में भी मदद मिली है.

इस रेस में कैसे आगे निकला चीन?

जानकारों का कहना है कि सुपरकंप्यूटर की रेस में अमेरिका को पीछे छोड़ने वाला चीन असल में अपने चिप डिजाइन के प्रयासों की तरफ दुनिया का ध्यान खींचना चाहता है. चीन पहली बार 2010 में TOP500 की रैंकिंग में पहले स्थान पर आया था. इसके बाद 2023 तक अमेरिका और जापान के साथ उसका मुकाबला चलता रहा और रैंकिंग थोड़ी ऊपर-नीचे होती रही. 2023 में चीन ने इस रैंकिंग के लिए अपने सिस्टम सबमिट करने बंद कर दिए. अब एक बार फिर चीन ने दमदार तरीके से इस लिस्ट में एंट्री मारी है.

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Սաթիշ Կումարը թվային բովանդակության ստեղծող և նորությունների հրատարակիչ է։ Նա գրում է հոդվածներ պետական ​​ծրագրերի, տեխնոլոգիական նորությունների և ավտոմոբիլային թարմացումների վերաբերյալ։ Նրա հոդվածների նպատակն է մարդկանց ճիշտ և արագ տեղեկատվություն տրամադրելը։