हरिद्वार में रंगभरी एकादशी: साधु-संतों ने पंचगव्य से खेली होली, विश्व कल्याण की कामना!

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By Aman Shanti .In On February 28, 2026
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Haridwar: हरिद्वार की अधिष्ठात्री मायादेवी मंदिर में शुक्रवार को रंगभरी एकादशी, जिसे आमलकी एकादशी भी कहा जाता है, भव्य रूप से मनाई गई. देशभर से आए साधु-संतों ने पंचगव्य से होली खेलते हुए भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, भगवान शिव और माता पार्वती से विश्व शांति व कल्याण की प्रार्थना की.

कार्यक्रम की अध्यक्षता जगदगुरू शंकराचार्य राजेश्वरानंद गिरि महाराज ने की. आयोजन में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद व मनसा देवी ट्रस्ट के अध्यक्ष तथा श्री निरंजनी अखाड़ा के सचिव श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज और जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक व अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि महाराज का मार्गदर्शन रहा.

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जगदगुरू स्वामी चक्रपाणि नंद गिरि का चादर विधि से अभिषेक

इस अवसर पर जगदगुरू स्वामी चक्रपाणि नंद गिरि महाराज का चादर विधि से विधिवत अभिषेक किया गया. समारोह के दौरान संतों ने सनातन धर्म की एकता और सुदृढ़ता का संकल्प दोहराया.

श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने कहा कि हरिद्वार केवल एक शहर नहीं, बल्कि धर्मभूमि उत्तराखंड का द्वार है. ‘हरिद्वार’ का अर्थ हरि (विष्णु) और हर (शिव) के द्वार से है. यहां की गई पूजा-अर्चना भक्तों को सीधे भगवान विष्णु और भगवान शिव तक पहुंचने का मार्ग प्रदान करती है.

चार धाम और हरिद्वार का आध्यात्मिक महत्व

उन्होंने कहा कि बद्रीनाथ धाम, केदारनाथ धाम, गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम आनंद, मुक्ति और मोक्ष के द्वार हैं. ऐसी पवित्र नगरी में रंगभरी एकादशी मनाने का अवसर मिलना भगवान की विशेष कृपा का परिणाम है.

सनातन धर्म के सुदृढ़ीकरण का अभियान

श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि जगदगुरू स्वामी चक्रपाणि नंद गिरि महाराज की सनातन धर्म को मजबूत करने और उसकी पताका विश्वभर में फहराने की यात्रा का शुभारंभ मायादेवी मंदिर से होना ईश्वरीय आशीर्वाद है.

रंगभरी एकादशी का धार्मिक महत्व

सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर के पीठाधीश्वर, जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता एवं दिल्ली संत महामंडल के अध्यक्ष श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने कहा कि रंगभरी एकादशी का विशेष महत्व है, क्योंकि यह पर्व भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों को समर्पित है.

मान्यता है कि भगवान शिव विवाह के बाद माता पार्वती के साथ इसी दिन काशी पहुंचे थे, जहां उनके स्वागत में शिवगणों, देवताओं और काशीवासियों ने अबीर-गुलाल उड़ाकर उत्सव मनाया. तभी से काशी में रंगभरी एकादशी विशेष उल्लास के साथ मनाई जाती है.

अनेक संत-महात्मा रहे उपस्थित

इस अवसर पर महामंडलेश्वर हरि चेतनानंद गिरि महाराज, महामंडलेश्वर ललितानंद गिरि महाराज, महामंडलेश्वर शैलेंद्रानंद गिरि महाराज, महामंडलेश्वर आनंदेश्वरानंद गिरि महाराज, जूना अखाड़े के महामंत्री श्रीमहंत महेश पुरी महाराज, महामंत्री श्रीमहंत शैलेंद्र गिरि महाराज, संगठन मंत्री महामंडलेश्वर कंचन गिरि महाराज, महंत गिरिशानंद गिरि महाराज, थानापति ज्वाला गिरि महाराज, मायादेवी मंदिर के पुजारी भास्कर पुरी महाराज, निर्वाण मंत्री साध्वी शैलजा गिरि महाराज सहित अनेक संत-महात्मा उपस्थित रहे.

रंगभरी एकादशी के इस आयोजन के साथ ही समस्त हिंदू समाज को एकजुट कर सनातन धर्म को सशक्त बनाने के अभियान का औपचारिक श्रीगणेश भी किया गया.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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Սաթիշ Կումարը թվային բովանդակության ստեղծող և նորությունների հրատարակիչ է։ Նա գրում է հոդվածներ պետական ​​ծրագրերի, տեխնոլոգիական նորությունների և ավտոմոբիլային թարմացումների վերաբերյալ։ Նրա հոդվածների նպատակն է մարդկանց ճիշտ և արագ տեղեկատվություն տրամադրելը։