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Bluetooth को लेकर ये अफवाहें नहीं हैं सच, आज ही यकीन करना कर दें बंद

Aman Shanti .In
By Aman Shanti .In On May 3, 2026
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  • ब्लूटूथ इयरबड्स से ब्रेन कैंसर नहीं होता है, अफवाह सच नहीं।
  • ब्लूटूथ ऑन रखने से फोन की बैटरी ज्यादा नहीं घटती है।
  • ब्लूटूथ की रेंज कम नहीं, विभिन्न क्लास के डिवाइस में अलग।
  • ब्लूटूथ कनेक्शन से तार के बिना डिवाइस कनेक्ट करना आसान।

Bluetooth Myths: अब वो दिन गए जब गाने सुनने के लिए कंप्यूटर से स्मार्टफोन से केबल कनेक्ट करनी पड़ती थी. अब न तो इयरबड्स को स्मार्टफोन से कनेक्ट होने के लिए और न ही कंट्रोलर को कंसोल से कनेक्ट होने के लिए केबल की जरूरत बची है. वायर्ड कनेक्शन अब पुराने जमाने की चीजें लगते हैं. यह सब ब्लूटूथ कनेक्शन की वजह से संभव हो पाया है. ब्लूटूथ के कारण डिवाइसेस पहले से ज्यादा कनेक्टेड हैं. स्मार्टफोन से लेकर स्मार्ट हो तक, हर जगह ब्लूटूथ का इस्तेमाल हो रहा है. हालांकि, इस दौरान ब्लूटूथ से जुड़ी कई अफवाहें भी लोगों के बीच फैली हैं, जो पूरी तरह गलत है. आज हम आपको ब्लूटूथ से जुड़े कुछ ऐसे ही मिथ्स और उनकी सच्चाई बताने जा रहे हैं.

भ्रम- ब्लूटूथ इयरबड्स से होता है ब्रेन कैंसर

कई लोग यह मानते हैं कि ब्लूटूथ इयरबड्स से ब्रेन कैंसर हो सकता है. यह बात जरूर सच है कि ब्लूटूथ डिवाइस से कुछ रेडिएशन निकलती हैं, लेकिन इस बात के कोई सबूत नहीं है कि इससे ब्रेन कैंसर होता है. ब्लूटूथ इयरबड्स नॉन-आयनाइजिंग रेडिएशन छोड़ते हैं. यह इंसानी सेल्स में एटम्स को इलेक्ट्रॉन से अलग नहीं करती हैं. ब्लूटूथ के अलावा वाईफाई और रेडियो वेव्ज से भी ऐसी रेडिएशन निकलती हैं और अभी तक ऐसे कोई एविडेंस नहीं हैं कि इससे दिमाग पर असर पड़ता है.

भ्रम- ब्लूटूथ ऑन रखने से फोन की बैटरी जल्दी डिस्चार्ज होती है

अगर आपने यह सुना है कि फोन या दूसरे डिवाइसेस का ब्लूटूथ ऑन रखने से बैटरी जल्दी डिस्चार्ज होती है तो यह पूरी तरह ठीक नहीं है. ब्लूटूथ ऑन रखने पर यह बहुत कम बैटरी की खपत करता है. एक पुराने टेस्ट में पता चला था कि लगातार 26 घंटे तक ब्लूटूथ ऑन रहने पर केवल 1.8 प्रतिशत बैटरी डिस्चार्ज हुई थी. अब तो ब्लूटूथ के नए वर्जन आ गए हैं, जो और भी कम बैटरी कंज्यूम करते हैं. हालांकि, लगातार ब्लूटूथ ऑन रखने से ब्लूजैकिंग जैसे कुछ खतरों का डर रहता है.

भ्रम- ब्लूटूथ डिवाइस की रेंज कम होती है

कई लोगों का कहना है कि ब्लूटूथ डिवाइस की रेंज कम होती है. यानी दो ब्लूटूथ डिवाइसेस के बीच ज्यादा दूरी हो जाए तो कनेक्शन ड्रॉप हो जाता है. यह बात भी पूरी तरह ठीक नहीं है. दरअसल, स्मार्टफोन, हेडफोन और वीयरेबल में ब्लूटूथ क्लास 2 का यूज होता है. पावर कंजप्शन को कम रखने के लिए इसकी रेंज 33 फीट रखी गई है. ब्लूटूथ क्लास 1 नाम से एक दूसरा स्टैंडर्ड भी है, जो हाई-एंड हेडफोन, इंडस्ट्रियल लैपटॉप, रोबोटिक्स सिस्टम और ECG मॉनिटर आदि में यूज होता है. इसकी रेंज 300 फीट से भी ज्यादा होती है.

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Սաթիշ Կումարը թվային բովանդակության ստեղծող և նորությունների հրատարակիչ է։ Նա գրում է հոդվածներ պետական ​​ծրագրերի, տեխնոլոգիական նորությունների և ավտոմոբիլային թարմացումների վերաբերյալ։ Նրա հոդվածների նպատակն է մարդկանց ճիշտ և արագ տեղեկատվություն տրամադրելը։