Տեխնիկական նորություններ

5 महीने में करीब 3 लाख URL हुए ब्लॉक! सामने आ गई असली वजह

Aman Shanti .In
By Aman Shanti .In On August 22, 2026
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देश में साइबर ठगी के मामले काफी तेजी से बढ़ रहे हैं. टेक्नोलॉजी की दुनिया में अब ठगों ने भी लोगों को ठगने के नए-नए तरीके निकाल लिए हैं. हालांकि, सरकार भी साइबर ठगी पर तेजी से एक्शन ले रही है. लोगों को जागरुक करने के साथ-साथ इस समस्या से लड़ने के लिए नए तरीकों को भी खोजा जा रहा है. इसी कड़ी में बता दें कि देश में गैरकानूनी ऑनलाइन कंटेंट पर सरकार ने नकेल कसी है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 से जुलाई 2026 तक केंद्र और राज्य सरकारों की अलग-अलग एजेंसियों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को करीब 2.98 लाख URLs हटाने के लिए फ्लैग किया है.

राज्य सरकारों ने भेजीं सबसे ज्यादा रिक्वेस्ट

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जितने URLs को ब्लॉक किया गया है उनमें से करीब 2.44 लाख URLs यानी लगभग 82 फीसदी राज्य सरकारों की ओर से फ्लैग किए गए हैं. इससे ये साफ पता चलता है कि ऑनलाइन गलत कंटेंट को रोकने और उनकी पहचान करने के लिए राज्य सरकारें भी लगातार काम कर रही हैं. इसके साथ ही Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) ने अलग से करीब 51 हजार URLs की पहचान की है. इनमें साइबर अपराध और दूसरी तरह की गैरकानूनी ऑनलाइन एक्टिविटी से जुड़ें कंटेंट शामिल थे.

साइबर क्राइम और फ्रॉड पर भी नजर

आपको बता दें कि I4C की ओर से जिन कंटेंट की पहचान की गई हैं उनमें कई तरह के साइबर अपराध शामिल रहे हैं. इनमें ऑनलाइन ठगी, निवेश से जुड़े फ्रॉड, जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने वाली धमकियां और दूसरे गैरकानूनी एक्टिविटीज शामिल बताई गई हैं.

भारत में सोशल मीडिया यूजर्स की बड़ी संख्या

दरअसल, सरकार ने ऑनलाइन कंटेंट की निगरानी को चुनौतीपूर्ण बताते हुए देश में सोशल मीडिया के बड़े यूजर बेस का भी हवाला दिया है. जानकारी के मुताबिक, देश में करीब 60 करोड़ सोशल मीडिया यूजर्स होने का अंदाजा लगाया गया है. ऐसे में सरकार का मानना है कि यूजर्स की ओर से बड़े वाल्यूम में कंटेंट को प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किया जाता है. ऐसे में इतने सारे कंटेंट के बीच में गलत कंटेंट भी प्लेटफॉर्म पर फ्लो होने लगता है जिनकी पहचान करके उन्हें हटाना काफी मुश्किल हो जाता है.

हर अधिकारी नहीं भेज सकता कंटेंट हटाने की रिक्वेस्ट

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि Sahyog सिस्टम के जरिए कंटेंट हटाने के प्रोसेस में किसी भी सरकारी कर्मचारी को मनमाने तरीके से रिक्वेस्ट भेजने की परमिशन नहीं दी गई है.

इसके लिए संबंधित केंद्रीय मंत्रालय या राज्य सरकार की ओर से रजिस्टर्ड अधिकारी ही कार्रवाई शुरू कर सकते हैं. साथ ही, ऐसे अधिकारियों की ओर से जारी निर्देशों की समय-समय पर समीक्षा भी की जाएगी.

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Սաթիշ Կումարը թվային բովանդակության ստեղծող և նորությունների հրատարակիչ է։ Նա գրում է հոդվածներ պետական ​​ծրագրերի, տեխնոլոգիական նորությունների և ավտոմոբիլային թարմացումների վերաբերյալ։ Նրա հոդվածների նպատակն է մարդկանց ճիշտ և արագ տեղեկատվություն տրամադրելը։