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EV खरीदने वालों की मौज! मिलेगा ₹30,000 तक इंसेंटिव, महिलाओं और ट्रांसजेंडर को खास परमिट

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By Aman Shanti .In On March 12, 2026
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दिल्ली सरकार वाहन प्रदूषण को नियंत्रित करने और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को तेजी से अपनाने के लिए Electric Vehicle Policy 2026 का ड्राफ्ट तैयार कर रही है. इसमें इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और ऑटो-रिक्शा खरीदारों को साल-वार इंसेंटिव दिए जाएंगे. महिलाओं और ट्रांसजेंडर के लिए विशेष ‘पिंक ई-परमिट’ और ‘रेनबो परमिट’ कैटेगरी भी शामिल हो सकती हैं.

वर्तमान ईवी नीति 2020 में लाई गई थी और कई बार बढ़ाई गई. ये 31 मार्च 2026 को समाप्त हो जाएगी. नई नीति 2030 तक प्रभावी रह सकती है. आइए जानते हैं कि नई EV पॉलिसी में क्या कुछ बदला जा सकता है. जानकारी के मुताबिक पॉलिसी घोषित होने के बाद ट्रांसपोर्ट विभाग अंतिम ड्राफ्ट कैबिनेट को भेजेगा. मंजूरी मिलने के बाद 16 मार्च से शुरू होने वाले बजट सत्र में इसकी घोषणा हो सकती है.

एमीशन कम करने का लक्ष्य

आंकड़ो की बात करें, तो दिल्ली में टू-व्हीलर कुल वाहनों का लगभग 67 प्रतिशत हिस्सा हैं और सर्दियों में वाहन उत्सर्जन वायु प्रदूषण का करीब 23 प्रतिशत योगदान देते हैं. इस पॉलिसी का मुख्य लक्ष्य 58 लाख टू-व्हीलर को इलेक्ट्रिक में बदलना है. इसके लिए पहले तीन वर्षों में प्रमुख इंसेंटिव रखे गए हैं.

किसे कितना लाभ मिलेगा?

इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (एक्स-शोरूम मूल्य 2.25 लाख रुपये तक) के लिए पहले वर्ष में 10,000 रुपये प्रति किलोवाट-घंटा (अधिकतम 30,000 रुपये) का इंसेंटिव मिलेगा. दूसरे वर्ष में ये 6,600 रुपये प्रति किलोवाट-घंटा (अधिकतम 20,000 रुपये) और तीसरे वर्ष में 3,300 रुपये प्रति किलोवाट-घंटा (अधिकतम 10,000 रुपये) होगा. इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा के लिए पहले वर्ष 50 हजार रुपये, दूसरे वर्ष 40 हजार रुपये और तीसरे वर्ष 30 हजार रुपये का इंसेंटिव दिया जाएगा. इन तीन वर्षों में खरीदारों की संख्या पर कोई सीमा नहीं होगी.

इसके पीछे का उद्देश्य पहले वर्ष में ही बड़ी संख्या में लोगों को इलेक्ट्रिक बाइक और ऑटो खरीदने के लिए प्रोत्साहित करना है. दिल्ली में इस साल अब तक एक लाख से अधिक टू-व्हीलर रजिस्टर्ड हुए हैं, जबकि पिछले साल पांच लाख से ज्यादा थे. लक्ष्य 2030 तक टू-व्हीलर और ऑटो फ्लीट को पूरी तरह ईवी में बदलना है.

महिलाओं और ट्रांसजेंडर को विशेष छूट

महिलाओं और ट्रांसजेंडर ड्राइवरों के सशक्तिकरण के लिए ‘पिंक ई-परमिट’ और ‘रेनबो परमिट’ श्रेणी के तहत विशेष इंसेंटिव दिए जाएंगे. सरकार इन्हें प्रशिक्षण देकर लास्ट-माइल कनेक्टिविटी मजबूत करेगी. परमिट धारक को स्वयं वाहन चलाना अनिवार्य होगा, इसे लीज पर नहीं दिया जा सकेगा. गर्भावस्था के मामले में कुछ छूट दी जाएगी. ऑटो-रिक्शा के प्राथमिकता आवंटन की प्रक्रिया 1 अप्रैल से शुरू होगी और पहले नौ महीनों तक चलेगी.

पब्लिक चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग पॉइंट्स भी बढ़ेंगे

पॉलिसी में पब्लिक चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग पॉइंट्स की संख्या मौजूदा 9,000 से बढ़ाकर 36,000 करने का प्रावधान है. इलेक्ट्रिक ट्रकों (N1 श्रेणी) के लिए भी इंसेंटिव रखे गए हैं. ई-कारों को 30 लाख रुपये तक के एक्स-फैक्टरी मूल्य वाले वाहनों के लिए 31 मार्च 2030 तक रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में 100 प्रतिशत छूट मिलेगी. इससे ऊपर के वाहनों को ये लाभ नहीं मिल सकेगा.

नई ईवी पॉलिसी का उद्देश्य व्यापक चार्जिंग नेटवर्क, बैटरी रिसाइक्लिंग, सर्विसिंग चेन डेवलप करना और वायु गुणवत्ता सुधारना है. इंसेंटिव केंद्र सरकार की पीएम ई-ड्राइव स्कीम से जुड़े होंगे. साथ ही आपको बता दें कि ऊपर दी गई जानकारी ड्राफ्ट और संभावनाओं के आधार पर जुटाई गई है. अभी आधिकारिक तौर पर इन लाभों की पुष्टि नहीं हुई है.

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Սաթիշ Կումարը թվային բովանդակության ստեղծող և նորությունների հրատարակիչ է։ Նա գրում է հոդվածներ պետական ​​ծրագրերի, տեխնոլոգիական նորությունների և ավտոմոբիլային թարմացումների վերաբերյալ։ Նրա հոդվածների նպատակն է մարդկանց ճիշտ և արագ տեղեկատվություն տրամադրելը։