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Ship Navigation: समंदर में कैसे काम करता है जीपीएस, बिना इंटरनेट रास्ता कैसे ढूंढते हैं पानी के जहाज?

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By Aman Shanti .In On June 14, 2026
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Ship Navigation: किसी भी देश में आयात और निर्यात के लिए समुद्री रास्तों का सहारा लिया जाता है. इस दौरान ऐसा होता है कि जहाज हजारों किलोमीटर पानी से घिरे होते हैं और दूर-दूर तक कोई जमीन दिखाई नहीं देती है. ऐसे में कई लोगों के सवाल अक्सर उठते हैं कि उस जहाज को कैसे पता चलता है कि वह कहां है, उसे कहां जाना है और समुद्र के अंदर जीपीएस कैसे काम करता है. इसके अलावा बिना इंटरनेट के जहाज कैसे आसानी से अपना रास्ता ढूंढ़ लेते हैं. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि समुद्र में जीपीएस कैसे काम करता है और बिना इंटरनेट के पानी के जहाज कैसे रास्ता ढूंढते हैं.

क्या जहाजों को पड़ती है इंटरनेट की जरूरत? 

बहुत से लोगों को लगता है कि समुद्र के बीच में जहाज इंटरनेट के सहारे रास्ता ढूंढते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है जहाजों की नेविगेशन प्रणाली इंटरनेट पर नहीं बल्कि जीपीएस और दूसरे सेटेलाइट सिस्टम पर निर्भर करती है. जीपीएस उपग्रह लगातार पृथ्वी की परिक्रमा करते रहते हैं और जहाज पर लगे रिसीवर को अपनी लोकेशन की जानकारी भेजते हैं, इसलिए इंटरनेट न होने पर भी जहाज अपनी सटीक स्थिति का स्थिति जान सकते हैं. 

जीपीएस कैसे बताता है जहाज की लोकेशन? 

जीपीएस यानी ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम पृथ्वी के चारों ओर घूम रहे दर्जनों उपग्रह के नेटवर्क पर काम करता है. जहाज पर लगा रिसीवर एक साथ कई सेटेलाइट से सिग्नल प्राप्त करता है. इन सिगनल्स के आधार पर सिस्टम जहाज का लैटीट्यूड, लोंगिट्यूड, गति और दिशा की गणना करता है. इसी वजह से हजारों किलोमीटर दूर समुद्र में भी जहाज को अपनी लोकेशन सही लोकेशन पता रहती है. 

सिर्फ जीपीएस ही नहीं यह तकनीक भी करती है मदद 

आधुनिक जहाज केवल जीपीएस पर निर्भर नहीं रहते, इनमें जीएनएसएस, एएसआई, रडार और इलेक्ट्रॉनिक चार्ट डिस्प्ले एंड इनफॉरमेशन सिस्टम जैसे सिस्टम भी लगे होते हैं. जीएनएसएस कई सैटेलाइट नेटवर्क से डेटा लेकर ज्यादा सटीक लोकेशन देता है. वहीं एआईएस आसपास मौजूद दूसरे जहाज की जानकारी देता है. इसके अलावा रडार कोहरे, बारिश और अंधेरे में भी दिक्कतों का पता लगता है और ईसीडीआईएस डिजिटल समुद्री नक्शे पर जहाज की रियल टाइम लोकेशन दिखता है.

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पानी के नीचे क्यों नहीं चलता जीपीएस? 

जीपीएस सिग्नल रेडियो तरंगों के जरिए काम करते हैं, यह तरंगे पानी के अंदर ज्यादा गहराई तक नहीं पहुंच पाती. यही कारण है कि पनडुब्बियां समुद्र के अंदर जीपीएस का इस्तेमाल नहीं कर पाती. इसके बजाय वह सोनार और इनर्शियल नेवीगेशन सिस्टम जैसी तकनीकों का उपयोग करती है. वहीं जीपीएस सिग्नल लेने के लिए उन्हें समय-समय पर सतह के करीब आना पड़ता है. 

अगर जीपीएस फेल हो जाए तो क्या होगा? 

अगर समुद्र में जहाजों का जीपीएस फेल हो जाए तो बड़े जहाज में बैकअप नेविगेशन सिस्टम भी मौजूद होते हैं. रडार इलेक्ट्रॉनिक मैप कंपास, एआईएस और पारंपरिक नेविगेशन तकनीकी किसी भी इमरजेंसी की कंडीशन में जहाज को सुरक्षित दिशा देने में मदद करती है. इसी वजह से आधुनिक जहाज के समुद्र में रास्ता भटकने की संभावना बहुत कम होती है.

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Սաթիշ Կումարը թվային բովանդակության ստեղծող և նորությունների հրատարակիչ է։ Նա գրում է հոդվածներ պետական ​​ծրագրերի, տեխնոլոգիական նորությունների և ավտոմոբիլային թարմացումների վերաբերյալ։ Նրա հոդվածների նպատակն է մարդկանց ճիշտ և արագ տեղեկատվություն տրամադրելը։