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Tech Explained: डार्क वेब क्या है और क्यों इसे यूज करना मुश्किलों में डाल सकता है? यहां जानें सारे जवाब

Aman Shanti .In
By Aman Shanti .In On March 1, 2026
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Dark Web: आप इंटरनेट यूज करते हैं तो आपने डार्क वेब नाम सुना होगा. यह इंटरनेट का वो हिस्सा है, जहां यूजर्स अनइंडेक्स्ड वेब कंटेट एक्सेस कर सकते हैं. इसके लिए स्पेशल वेब ब्राउजर की जरूरत होती है. यह खासकर उन लोगों के लिए काम की जगह होती है, जो गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल रहते हैं. इसे आमतौर पर उन ट्रांजेक्शन और कन्वर्सेशन के लिए यूज किया जाता है, जिन्हें प्राइवेट रखना होता है. डार्क वेब पर गैरकानूनी एक्टिविटीज के अलावा फिशिंग लिंक, फाइनेंशियल स्कैम्स और मालवेयर आदि होस्ट किए जाते हैं. आज के टेक एक्सप्लेनर में हम जानेंगे कि डार्क वेब क्या होता है और कैसे इसका यूज करना आपको मुश्किलों में डाल सकता है.

इंटरनेट की एक लेयर है डार्क वेब

डार्क वेब को समझने के लिए सबसे पहले इंटरनेट की अलग-अलग लेयर को समझना जरूरी है. इंटरनेट की सबसे पहली लेयर सरफेस वेब होती है. ज्यादातर यूज इसी इंटरनेट का होता है. आप यह आर्टिकल भी सरफेस वेब पर पढ़ रहे हैं. सरफेस वेब पर वो वेबसाइट्स होती हैं, जिन्हें गूगल आदि सर्च इंजन के जरिए एक्सेस किया जा सकता है. सरफेस वेब पर आपकी एक्टिविटी को ट्रैक और रिकॉर्ड किया जा सकता है.

डीप वेब- सरफेस वेब के बाद डीप वेब इंटरनेट की दूसरी लेयर है. इसमें ऑनलाइन डेटा होता है, जो आम यूजर्स के लिए अवेलेबल नहीं है और न ही इसे सर्च इंजन पर इंडेक्स किया गया है. इसमें एकेडमिक रिसर्च पेपर, कोर्ट डॉक्यूमेंट और मेडिकल रिकॉर्ड आदि होते हैं. उदाहरण के तौर पर जब आप अपने हेल्थ चेकअप के रिजल्ट या डॉक्टर की लिखी दवाईयों को देखने उनके पोर्टल पर लॉग-इन करते हैं तो आप डीप वेब को एक्सेस कर रहे होते हैं.

डार्क वेब- इंटरनेट की अगली लेयर डार्क वेब होती है. इस पर डीसेंट्रलाइज्ड और नॉन-इंडेक्स्ड वेब पेजेज होते हैं. इस पर बनी वेबसाइट का स्टैंडर्ड URL नहीं होता. यहां फाइनेंशियल स्कैम, अश्लील कंटेट, चोरी किए गए डेटा की बिक्री और ड्रग्स और हथियारों की बिक्री समेत दूसरे गैर-कानूनी काम होते हैं.  हालांकि, कुछ एक्टिविस्ट्स, जर्नलिस्ट और व्हिसलब्लोअर भी कम्युनिकेशन के लिए डार्क वेब का यूज करते हैं. डार्क वेब पर होने वाली बातचीत और ट्रांजेक्शन्स को ट्रैक नहीं किया जा सकता. हालांकि, इसे यूज करने के लिए कुछ स्किल्स का होना जरूरी है. साथ ही इस पर सेफ्टी की कोई गारंटी नहीं होती. 

डार्क वेब का यूज डाल सकता है मुश्किल में

कई जगहों पर डार्क वेब को एक्सेस करना बैन नहीं है, लेकिन इस पर गैरकानूनी एक्टिविटीज को अंजाम देने मुश्किलें बढ़ा सकता है. अमेरिका में ऐसे ही दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जो डार्क वेब पर गैर-कानून आइटम्स खरीदने-बेचने का मार्केट प्लेस चला रहे थे. यह पूरी तरह अनरेगुलेटेड जगह है, जहां साइबर सिक्योरिटी के कोई नियम लागू नहीं होते. हजारों वॉलेंटियर प्रॉक्सी सर्वर के जरिए इस नेटवर्क को ऑपरेट करते हैं. ऐसे में इस पर नियम बनाने या नियमों का पालन करने जैसी चीजें लागू नहीं होतीं. इसी ऑपरेटिंग मॉडल के कारण डार्क वेब साइबर क्रिमिनल्स के फेवरेट स्पॉट बना हुआ है.

कैसे हुई थी डार्क वेब की शुरुआत?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, डार्क वेब की शुरुआत U.S. Naval Research Laboratory के रिसर्चर और साइंटिस्ट्स ने 2002 में की थी. इन्होंने पाया कि इंटरनेट पर होने वाली डिजिटल और कम्यूनिकेशन एक्टिविटीज को आसानी से मॉनिटर और इंटरसेप्ट किया जा सकता है. ऐसे में उन्हें इंटेलीजेंस कम्युनिटी के लिए एक सिक्योर कम्युनिकेशन चैनल की जरूरत महसूस हुई और यहीं से डार्क वेब की शुरुआत मानी जाती है. अभी भले ही यह साइबर क्रिमिनल का अड्डा माना जाता है, लेकिन इसकी शुरुआत बिल्कुल अलग काम के लिए हुई थी. 

कैसे एक्सेस किया जा सकता है डार्क वेब?

डार्क वेब को एक्सेस करने के लिए स्पेशल ब्राउजर की जरूरत पड़ती है. यह ब्राउजर नॉर्मल ब्राउजर की तरह ही काम करता है. हालांकि, यूजर के लिए डार्क वेब पर अपनी जरूरत की चीजें खोजना मुश्किल हो सकता है. यहां वेबसाइट के URL नंबर और लेटर्स से मिलकर बने होते हैं, जिस कारण उन्हें याद रखना मुश्किल हो जाता है. इसके अलावा वेबसाइट के एड्रेस भी तेजी से बदलते रहते हैं. साथ ही यहां पूरा ट्रैफिक कई प्रॉक्सी सर्वर से होकर जाता है, जिससे सर्च प्रोसेस भी काफी धीमी रहती है. फिर भी अगर आपको किसी कारणवश डार्क वेब पर जाना पड़े तो कई सिक्योरिटी टिप्स का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. सबसे पहले अपने होम नेटवर्क से अलग इंटरनेट कनेक्शन का यूज करें और पर्सनल डेटा की सेफ्टी के लिए आईडेंटिटी थेफ्ट प्रोटेक्शन सर्विसेस को यूज करना न भूलें. अपने पासवर्ड लगातार बदलते रहें और सभी जरूरी अकाउंट्स पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन को इनेबल कर लें. फिशिंग अटैक्स और मालवेयर से सावधान रहें. अगर आपको डार्क वेब पर अपना डेटा दिख रहा है तो संबंधित जांच एजेंसी से शिकायत कर इसे ब्लॉक करवाने की कोशिश करें.

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Սաթիշ Կումարը թվային բովանդակության ստեղծող և նորությունների հրատարակիչ է։ Նա գրում է հոդվածներ պետական ​​ծրագրերի, տեխնոլոգիական նորությունների և ավտոմոբիլային թարմացումների վերաբերյալ։ Նրա հոդվածների նպատակն է մարդկանց ճիշտ և արագ տեղեկատվություն տրամադրելը։