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कार खुद बताएगी आगे गड्ढा है या मोड़, V2X तकनीक को धरातल पर उतारने में जुटी सरकार

Aman Shanti .In
By Aman Shanti .In On March 19, 2026
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The car itself will tell whether there is a pothole or a turn ahead, the government is busy in bringing V2X technology to the ground.
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नई दिल्‍ली. भारत की सड़कों पर ड्राइविंग का अनुभव आने वाले समय में बदलने वाला है. सड़क पर गड्ढे, दुर्घटना संभावित जगह या फिर बीच में खड़े वाहन की जानकारी आपकी कार आपको पहले ही दे देगी. यह संभव होगा व्हीकल-टू-एवरीथिंग तकनीक (V2X) से. इसको धरातल पर उतारने के लिए सरकार ने कमर कस ली है. हाल ही में केंद्र सरकार ने भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) को इस तकनीक के लिए स्पेक्ट्रम का ढांचा और कीमतें तय करने की जिम्मेदारी सौंपी. दूरसंचार विभाग (DoT) ने पहले ही 5.8 गीगाहर्ट्ज बैंड में 50 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम इस काम के लिए आरक्षित कर रखा है.

आसान शब्‍दों में कहें तो सरकार सड़कों पर एक ऐसा डिजिटल जाल बिछाने जा रही है, जिसकी मदद से वाहन आपस में और रोड इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर से संचार करने में सक्षम होंगे. भारत में दुनिया की सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाएं होती हैं. V2X तकनीक ड्राइवर को उन खतरों के बारे में रियल-टाइम अलर्ट देगी जो उसे अपनी आंखों से दिखाई नहीं देते. इस तकनीक को धरातल पर उतारने के लिए एक ढांचे की जरूरत होगी.

दो स्‍तंभों पर टिकी है V2X तकनीक

लाइव मिंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, वाहन कनेक्टिविटी दो मुख्य घटकों पर आधारित है. पहला, ऑन-बोर्ड यूनिट्स (OBUs). ये वाहनों में लगाई जाती हैं. दूसरी, रोडसाइड यूनिट्स (RSUs). ये उपकरण ट्रैफिक सिग्नल, लाइट के खंभों और हाईवे के किनारों पर लगाए जाएंगे. ट्राई अब यह तय करेगा कि इन उपकरणों को चलाने के लिए स्पेक्ट्रम का आवंटन कैसे होगा. कारों के अंदर लगने वाले उपकरणों (OBUs) के लिए लाइसेंस की जरूरत नहीं होगी, जिससे कार कंपनियां इन्हें आसानी से लगा सकेंगी. वहीं, सड़कों पर लगने वाली यूनिट्स (RSUs) को एनएचआई या राज्य सरकारों को बिना नीलामी के दिया जाएगा क्योंकि यह सीधे तौर पर लोगों की जान बचाने यानी सुरक्षा से जुड़ा मामला है.

एडीएएस कारों की मांग में इजाफा

भारत में एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) वाली कारों की मांग बढ़ रही है. V2X इस दिशा में अगला बड़ा कदम है. सरकार की यह पहल दर्शाती है कि भारत अब केवल सड़कें बनाने पर ही नहीं, बल्कि ‘स्मार्ट’ सड़कें बनाने पर ध्यान दे रहा है. हालांकि इसमें निवेश की बड़ी जरूरत होगी, लेकिन इसके बदले मिलने वाली सुरक्षा और सुगमता की कीमत कहीं अधिक है.

V2X तकनीक से क्या फायदे होंगे?

इस तकनीक के आने से न केवल ड्राइविंग आसान होगी, बल्कि यह भारतीय सड़कों की सूरत बदल देगी. इससे कई फायदे होंगे-

  • सड़क हादसों में कमी: भारत में दुनिया की सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाएं होती हैं. V2X तकनीक ड्राइवर को उन खतरों के बारे में रियल-टाइम अलर्ट देगी जो उसे अपनी आंखों से दिखाई नहीं दे रहे. जैसे कि तीखे मोड़, दूसरी तरफ से तेज रफ्तार से आ रही गाड़ी या फिर रोड पर मौजूद कोई अन्‍य बाधा.
  • कोहरे और खराब मौसम में बचाव: सर्दियों में कोहरे के कारण होने वाली टक्करों को यह तकनीक शून्य कर सकती है. कार का सेंसर दूसरी कार की लोकेशन पकड़ लेगा और ड्राइवर को ब्रेक लगाने का सिग्नल दे देगा.
  • ट्रैफिक जाम से मुक्ति: अगर आगे कहीं जाम लगा है या सड़क निर्माण का काम चल रहा है तो रोडसाइड यूनिट्स सीधे आपकी कार के नेविगेशन सिस्टम को अलर्ट भेजेंगी. इससे आप समय रहते रास्ता बदल सकेंगे, जिससे समय और ईंधन दोनों की बचत होगी.
  • फ्लीट मैनेजमेंट में आसानी: लॉजिस्टिक्स कंपनियां अपने ट्रकों और वाहनों की लोकेशन और सेहत पर बारीक नजर रख सकेंगी.
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Սաթիշ Կումարը թվային բովանդակության ստեղծող և նորությունների հրատարակիչ է։ Նա գրում է հոդվածներ պետական ​​ծրագրերի, տեխնոլոգիական նորությունների և ավտոմոբիլային թարմացումների վերաբերյալ։ Նրա հոդվածների նպատակն է մարդկանց ճիշտ և արագ տեղեկատվություն տրամադրելը։