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भारत पर 500% टैरिफ से क्यों पीछे हटा अमेरिका? डॉनल्ड ट्रंप की ‘मजबूरी’ पता चल गई

Aman Shanti .In
By Aman Shanti .In On July 19, 2026
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अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप भारत पर 500 फीसदी तक टैरिफ थोपने चले थे. रूसी तेल खरीदने की वजह से उनका प्लान भारत को यह सजा देनी थी. अब खबर है कि उन्होंने अपने पैर पीछे खींच लिए. ट्रंप की टीम ने टैरिफ पर खूब बातचीत की. एक-दूसरी की राय भी ली गई. नतीजा निकला कि 500 फीसदी तक टैरिफ लगाना ठीक नहीं रहेगा. इसे घटाकर 100 फीसदी तक कर दिया जाए. रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 500 फीसदी तक टैरिफ लगाने का बिल ट्रंप के करीबी और रिपब्लिक सीनेटर लिंडसे ग्राहम लाए थे. शनिवार, 11 जुलाई को उनका का निधन हो गया था.

रूसी तेल और गैस की बिक्री रोकने लिए इस बिल को लाया जा रहा है. अमेरिका इसे यूक्रेन के खिलाफ लड़ रहे रूस पर दबाव डालने की नीति के तौर पर देखता है. अगर ये बिल कानून बनता है, तो इसे ‘रशिया सैंक्शंस एक्ट’ के नाम से जाना जाएगा.

रिपब्लिकन-डेमोक्रेटिक, दोनों का समर्थनडॉनल्ड ट्रंप के अलावा सत्ताधारी रिपब्लिकन सीनेटर के अलावा विपक्षी डेमोक्रेटिक सीनेटर भी इस बिल का समर्थन कर रहे हैं. इस कानून से ना केवल रूस पर दबाव बनाया जाएगा, बल्कि भारत और चीन जैसे देशों पर भारी-भरकम टैरिफ लगा, तो ये देश भी रूस से तेल-गैस खरीदने से कतराएंगे.

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, लिंडसे ग्राहम के ओरिजनल बिल में रूसी तेल और गैस खरीदारों पर 500 फीसदी तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था. अब नए वर्जन में रूसी तेल-गैस के टॉप पांच खरीदारों पर ज्यादा से ज्यादा 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की बात कही गई है.

रूसी फ्यूल के टॉप-5 खरीददारसीनेट के सहयोगियों ने बताया कि रूस का कच्चे तेल खरीदने वाले टॉप पांच देशों में चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं. रूस की नैचुरल गैस के टॉप पांच खरीदार चीन, फ्रांस, जापान, हंगरी और बेल्जियम हैं.

ट्रंप क्यों पड़े नरम?सीनेट के एक सहयोगी ने दावा किया कि इस डील पर उनकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के साथ महीनों बातचीत हुई. उन्होंने आगे कहा,

“यह अकेली ऐसी चीज है जिसे अभी सभी की मंजूरी मिली है और शायद यही अकेली ऐसी चीज है जो आगे बढ़ेगी और रूस पर वैसा दबाव डालेगी जैसा हम सब चाहते हैं.”

सहयोगी ने बताया कि बिल से जुड़ी बातचीत पूरी तरह गोपनीय है. मंगलवार, 14 जुलाई को डॉनल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में रिपोर्टरों से कहा कि ईरान और हिज्बुल्लाह पर बैन बिल में जोड़े जा सकते हैं. उन्होंने कहा कि अगर ये कदम जोड़े गए तो यह ‘बहुत बड़ी बात’ होगी.

रूस पर कड़े प्रतिबंध का प्लाननए बिल से रूसी टैंकरों के शैडो फ्लीट पर भी बैन लगेगा जो वेस्ट मैरीटाइम सर्विसेज पर निर्भर नहीं हैं. सेंट्रल बैंक ऑफ द रशियन फेडरेशन समेत रूसी फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस और रूस के सबसे बड़े सरकारी एनर्जी प्रोजेक्ट्स (जैसे- यमल LNG और आर्कटिक LNG 1, 2 और 3) पर भी प्रतिबंध लगेगा.

इस बिल में उन देशों को छूट दी गई है, जो रूस के नेचुरल गैस एक्सपोर्ट का 15 फीसदी से कम इंपोर्ट करते हैं और जो उन इंपोर्ट को कम करने के लिए जरूरी कदम उठा रहे हैं. जापान, फ्रांस, हंगरी और बेल्जियम को ये छूट मिल सकती है.

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Սաթիշ Կումարը թվային բովանդակության ստեղծող և նորությունների հրատարակիչ է։ Նա գրում է հոդվածներ պետական ​​ծրագրերի, տեխնոլոգիական նորությունների և ավտոմոբիլային թարմացումների վերաբերյալ։ Նրա հոդվածների նպատակն է մարդկանց ճիշտ և արագ տեղեկատվություն տրամադրելը։