Income Tax Notice: आयकर विभाग ने ऊंची आय वाले पेशेवरों, खासकर मल्टीनेशनल कंपनियों और स्टार्टअप्स के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है. विभाग के रडार पर वे लोग हैं जिनकी सालाना आय 50 लाख रुपये से अधिक है और जिन्होंने कथित तौर पर टैक्स बचाने के लिए फर्जी दावे या गलत जानकारी दी है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, नोटिस पाने वालों में बड़ी कंपनियों के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO), मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं. विभाग ने उन्हें किसी कठोर कार्रवाई से पहले अपने आयकर रिटर्न (ITR) में पाई गई विसंगतियों को सुधारने का अवसर दिया है.
क्यों भेजे जा रहे हैं नोटिस?
आयकर विभाग उन मामलों की जांच कर रहा है जहां विदेशी आय को छिपाया गया है. हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रैवल अलाउंस को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया है. चैरिटेबल संस्थाओं या शैक्षणिक संस्थानों को फर्जी दान दिखाकर टैक्स छूट ली गई है. महंगी संपत्तियों की खरीद में आय का सही स्रोत नहीं बताया गया.
विदेशी क्लाइंट्स से क्रिप्टोकरेंसी के जरिए फंड प्राप्त हुए, लेकिन सही तरीके से घोषित नहीं किए गए. राजनीतिक दलों को दान दिखाया गया, जो मान्यता प्राप्त नहीं हैं या चुनाव में हिस्सा नहीं लेते. एफएमसीजी, हॉस्पिटैलिटी, आईटी, ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग-कंस्ट्रक्शन जैसे क्षेत्रों के वरिष्ठ अधिकारी विशेष रूप से जांच के दायरे में हैं.
सख्त स्क्रूटिनी क्यों?
हाल के वर्षों में ऊंची आय वाले करदाताओं के रिटर्न की डेटा एनालिटिक्स और एआई आधारित टूल्स से गहन जांच की जा रही है. डिजिटल लेनदेन, विदेशी संपत्ति और क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजैक्शन के डेटा मिलान से विसंगतियां आसानी से पकड़ में आ रही हैं. आयकर विभाग का संदेश स्पष्ट है यदि रिटर्न में गलती या गलत दावा किया गया है, तो उसे स्वेच्छा से सुधार लें, अन्यथा पेनल्टी, ब्याज और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है. यह कार्रवाई उच्च आय वर्ग में टैक्स अनुपालन सुनिश्चित करने और फर्जी दावों पर अंकुश लगाने की दिशा में एक सख्त कदम मानी जा रही है.
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