India AI Impact Summit 2026: अब डेटा भेजने के लिए इंटरनेट जरूरी नहीं, जानें आपकी मुश्किलें कैसे आसान करेगा डायरेक्ट क्लाउड?

सतीश कुमार
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नई दिल्ली में इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में एक ऐसी तकनीक शोकेस की गई, जो डेटा भेजने के लिए इंटरनेट की जरूरत खत्म कर देगी. 16 फरवरी से चल रहे इस समिट में डायरेक्ट क्लाउड (Direct Cloud) या सैटेलाइट-बेस्ड डायरेक्ट-टू-क्लाउड कनेक्टिविटी को हाइलाइट किया गया. यह तकनीक सैटेलाइट से सीधे क्लाउड सर्वर तक डेटा ट्रांसफर करती है और इसके लिए पारंपरिक इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क की जरूरत भी नहीं होती है. आइए आपको इसके बारे में बताते हैं.

कैसे काम करता है डायरेक्ट क्लाउड?

यह तकनीक नॉन-टेरेस्ट्रियल नेटवर्क (NTN) पर आधारित है, जैसे सैटेलाइट से डायरेक्ट क्लाउड लिंक. सामान्य इंटरनेट में डेटा ग्राउंड स्टेशन, फाइबर या मोबाइल टावर से गुजरता है, लेकिन डायरेक्ट क्लाउड में सैटेलाइट यूजर डिवाइस (जैसे फोन, डिवाइस या IoT सेंसर) से सीधे क्लाउड सर्वर तक डेटा भेजता है. समिट में दिखाया गया कि यह 3GPP Release 17 स्टैंडर्ड पर काम करता है, जहां सैटेलाइट NTN सपोर्ट करता है. यूजर को बस एक छोटा एंटीना या सैटेलाइट-सपोर्टेड डिवाइस चाहिए, फिर डेटा क्लाउड पर पहुंच जाता है. इसमें Wi-Fi या मोबाइल इंटरनेट आदि की जरूरत नहीं पड़ती है. इससे दूरदराज के गांवों में AI ऐप्स यूज करना, फोटो/वीडियो अपलोड करना या रियल-टाइम डेटा शेयर करना आसान हो जाएगा.

इन कंपनियों ने दिया डेमो

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में Skylo और अन्य पार्टनर्स ने डेमो दिखाया, जहां एक डिवाइस से सैटेलाइट के जरिए क्लाउड पर डेटा भेजा गया. यह uCloudlink के MeowGo G50 Max जैसे AI-पावर्ड हब से जुड़ा था, जो ऑर्बिटल (सैटेलाइट), इन-फ्लाइट और ग्राउंड नेटवर्क को इंटीग्रेट करता है. यह डिवाइस बिना एक्सटर्नल एंटीना के सैटेलाइट से कनेक्ट होता है और AI से कनेक्शन ऑप्टिमाइज करता है. इससे ग्रामीण इलाकों में AI ट्रेनिंग, फार्मिंग डेटा (जैसे क्रॉप मॉनिटरिंग) या हेल्थ डेटा ट्रांसफर बिना इंटरनेट के हो सकता है.

इससे क्या होगा फायदा?

  • दूरदराज क्षेत्रों में पहुंच: भारत के गांवों, पहाड़ों या द्वीपों में जहां इंटरनेट नहीं है, वहां डायरेक्ट क्लाउड से AI क्लाउड सर्विस यूज हो सकेगी. किसान सैटेलाइट इमेजरी से क्रॉप हेल्थ चेक कर सकेंगे.
  • रियल-टाइम डेटा: IoT डिवाइस (जैसे स्मार्ट मीटर, ड्रोन) सीधे क्लाउड पर डेटा भेजेंगे, बिना इंटरनेट डिले के.
  • कम लागत: पारंपरिक इंटरनेट इंफ्रा की जरूरत नहीं. सैटेलाइट से डायरेक्ट कनेक्टिविटी सस्ती होगी.
  • सिक्योरिटी: डायरेक्ट लिंक से डेटा लीक का खतरा कम, एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन आसान.
  • AI इंटीग्रेशन: क्लाउड पर AI मॉडल्स रन होंगे, यूजर को लोकल प्रोसेसिंग की जरूरत नहीं.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.