नई दिल्ली. भारत और ब्रिटेन ने पिछले दिनों जब मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए थे, तभी यह तय हो गया था कि दोनों देशों के बीच उत्पाद की आवाजाही अब सस्ती हो जाएगी. इसका नतीजा भी सामने आ गया है. ब्रिटेन से आने वाली लग्जरी कार जगुआर रेंज रोवर की कीमत अब भारत में लाख-दो लाख नहीं, बल्कि पूरे 75 लाख रुपये सस्ती हो गई है. यह कार पूरी तरह ब्रिटेन में ही बनती है और भारत में आयात की जाती है. अब यह कार सस्ती कीमत पर लाई जा सकेगी.
लग्जरी वाहन विनिर्माता कंपनी जगुआर लैंडरोवर (जेएलआर) की भारतीय इकाई ने बताया कि भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) लागू होने की संभावना को देखते हुए ब्रिटेन में निर्मित रेंज रोवर मॉडलों की कीमतों में 75 लाख रुपये तक की कटौती की घोषणा की है. जेएलआर इंडिया ने कहा कि पूरी तरह निर्मित इकाई के रूप में भारत आने वाले वाहनों की कीमतों में कटौती का प्रमुख लाभ रेंज रोवर एसवी और रेंज रोवर स्पोर्ट एसवी मॉडलों को मिलेगा.
अब कितनी होगी दोनों कार की कीमत
इस कटौती के बाद रेंज रोवर एसवी मॉडल की शुरुआती शोरूम कीमत 4.25 करोड़ रुपये से घटकर 3.5 करोड़ रुपये हो गई है. इसके अलावा रेंज रोवर स्पोर्ट एसवी मॉडल की कीमत 2.75 करोड़ रुपये से घटाकर 2.35 करोड़ रुपये कर दी गई है. टाटा समूह के नियंत्रण वाली कंपनी ने कहा कि संशोधित कीमतें एफटीए के तहत मिलने वाली नई शुल्क संरचना को दर्शाती हैं और ये तत्काल प्रभाव से लागू होंगी.
कंपनी को बिक्री बढ़ने की उम्मीद
जेएलआर इंडिया के प्रबंध निदेशक राजन अंबा ने कहा कि भारत-ब्रिटेन एफटीए के लागू होने की उम्मीद के बीच हम अपने ग्राहकों को इसका लाभ देने के लिए प्रतिबद्ध हैं. नई कीमतें ग्राहक को प्राथमिकता देने के हमारे दृष्टिकोण और दीर्घकालिक संबंध बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं. हालांकि, कंपनी ने स्पष्ट किया कि भारत में स्थानीय रूप से निर्मित मॉडल जैसे रेंज रोवर, रेंज रोवर स्पोर्ट, रेंज रोवर इवोक, रेंज रोवर वेलार और डिस्कवरी स्पोर्ट की कीमतों पर इस एफटीए का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.
इन मॉडल्स के नहीं घटेंगे दाम
कंपनी ने बताया है कि उसके कुछ मॉडल ब्रिटेन में नहीं बनते हैं. लिहाजा इन पर भारत-ब्रिटन मुक्त व्यापार समझौते के नियम लागू नहीं होंगे और इनकी कीमतें भारतीय बाजार में पुराने लेवल पर ही बनी रहेंगी. कंपनी ने बताया कि उसके डिफेंडर और डिस्कवरी जैसे मॉडलों की कीमतें अपने पुराने स्तर पर ही बनी रहेंगी. इन दोनों मॉडलों का उत्पादन स्लोवाकिया में होता है, जिसकी वजह से ये एफटीए के दायरे से बाहर रहेंगी.