India’s Electronics Manufacturing: इंडिया-यूएस ट्रेड डील बड़ा मौका, 100 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है इलैक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट

सतीश कुमार
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India US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से अटकी ट्रेड डील पर मुहर लगने को इलैक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिहाज से एक गेमचेंजर माना जा रहा है. जानकारों का कहना है कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित 500 अरब डॉलर के कुल द्विपक्षीय व्यापार में इलैक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की हिस्सेदारी आने वाले वर्षों में करीब 100 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है. हालांकि, उद्योग जगत फिलहाल इस समझौते के विस्तृत प्रावधानों यानी फाइन प्रिंट का इंतजार कर रहा है, क्योंकि इन्हीं से यह साफ होगा कि टैरिफ, नॉन-टैरिफ बैरियर, सप्लाई चेन और निवेश से जुड़े नियम व्यवहार में किस तरह लागू होंगे.

कई महीनों तक चली गहन बातचीत के बाद सोमवार देर रात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस ट्रेड डील का औपचारिक ऐलान किया. उन्होंने कहा कि यह समझौता तत्काल प्रभाव से लागू होगा और भारत पर लगाए गए कुल 50 प्रतिशत के भारी टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है. इस फैसले से भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है, खासतौर पर उन सेक्टरों को जो पिछले करीब दो वर्षों से ऊंचे शुल्क की वजह से प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहे थे. इलैक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग भी इन्हीं क्षेत्रों में शामिल है, जहां लागत बढ़ने से अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की स्थिति कमजोर हो गई थी.

इलैक्ट्रोनिक्स सेक्टर की बदलेगी तस्वीर

पिछले कुछ वर्षों में भारत का इलैक्ट्रॉनिक्स उद्योग तेजी से उभरा है और यह सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘पीएलआई स्कीम’ का अहम स्तंभ बन चुका है. स्मार्टफोन, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर असेंबली और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग में भारत की मौजूदगी लगातार बढ़ रही है. वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने करीब 3.27 लाख करोड़ रुपये यानी लगभग 38 अरब डॉलर का इलैक्ट्रॉनिक्स निर्यात किया, जिसमें अमेरिका भारतीय निर्यातकों के लिए सबसे बड़ा बाजार रहा. टैरिफ में कटौती के बाद भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिका में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना और वहां की सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बनना कहीं आसान हो सकता है.

यह ट्रेड डील ऐसे समय पर सामने आई है जब भारत एक व्यापक वैश्विक व्यापार रणनीति पर काम कर रहा है. बजट 2026 में जहां घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और निवेश को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है, वहीं भारत यूके, यूरोपीय यूनियन और अन्य देशों के साथ भी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को आगे बढ़ा रहा है. अमेरिका के साथ यह समझौता भारत को वैश्विक वैल्यू चेन में और गहराई से जोड़ सकता है, खासकर इलैक्ट्रॉनिक्स, टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन रेजिलिएंस जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में.

अमेरिकी उद्योग जगत और थिंक टैंक्स ने भी इस समझौते का खुलकर स्वागत किया है. यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स की अध्यक्ष और सीईओ सुजैन क्लार्क ने कहा कि अमेरिकी और भारतीय व्यवसाय लंबे समय से इस तरह के कदम का इंतजार कर रहे थे और शुल्क व गैर-शुल्क बाधाओं को कम करने की घोषणा से दोनों देशों की कंपनियों और श्रमिकों को फायदा होगा. उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ दोनों देशों के अधिकारियों की भूमिका की भी सराहना की.

बनेंगे बड़े अवसर

वहीं एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट की वरिष्ठ उपाध्यक्ष और पूर्व अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि वेंडी कटलर ने कहा कि यह घोषणा भारतीय भागीदारों के लिए निश्चित रूप से राहत लेकर आई है, क्योंकि भारत को किसी भी अन्य देश की तुलना में ऊंचे टैरिफ का सामना करना पड़ रहा था. उनके मुताबिक, यह समझौता अमेरिका और भारत को महत्वपूर्ण खनिजों, तकनीकी सहयोग और सप्लाई चेन लचीलेपन जैसे अहम मुद्दों पर मिलकर काम करने का रास्ता खोलेगा. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल समझौते का ऐलान सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए हुआ है और इसके विस्तृत प्रावधान सामने आने के बाद ही यह पूरी तरह स्पष्ट होगा कि इलैक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और अन्य सेक्टरों को इससे कितनी और किस तरह की वास्तविक बढ़त मिलेगी.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.