Karnavedha Sanskar Muhurat 2026: कान छिदवाना (Ear Piercing) आज के Gen Z के लिए सिर्फ एक कूल फैशन स्टेटमेंट हो सकता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह हजारों साल पुरानी एक पावरफुल Bio-Hacking तकनीक है? जिसे हम आज पियरसिंग कहते हैं, उसे हमारे पूर्वज ‘कर्णवेध संस्कार’ कहते थे. यह न केवल स्टाइल है, बल्कि बुद्धि और स्वास्थ्य का एक प्राचीन विज्ञान भी है.
इतना ही नहीं, आयुर्वेद के अनुसार कान के निचले हिस्से में एक विशेष बिंदु होता है जो सीधे हमारे मस्तिष्क की कार्यक्षमता और एकाग्रता (Concentration) से जुड़ा होता है. माना जाता है कि इस संस्कार से नसों का संचार बेहतर होता है और यह शारीरिक व मानसिक विकास में एक उत्प्रेरक (Catalyst) की तरह काम करता है. चाहे आप इसे फैशन की नजर से देखें या परंपरा की, साल 2026 में ग्रहों की अनुकूल स्थिति में किया गया यह संस्कार आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा के द्वार खोल सकता है. आइए जानते हैं साल 2026 में कब है इस संस्कार के लिए सबसे शुभ समय.
कर्णछेदन संस्कार मुहूर्त 2026
नोट- 15 मार्च से 13 अप्रैल तक खरमास रहेंगे. ऐसे में इस दौरान मांगलिक कार्य और समस्त शुभ संस्कार वर्जित होते हैं. वहीं 17 मई से 15 जून 2026 तक अधिकमास रहेंगे. इस दौरान भी शुभ कार्य की मनाही होती है.
| कर्णछेदन संस्कार अप्रैल मुहूर्त 2026 | |
| 18 अप्रैल 2026 | सुबह 06:24 – सुबह 07:50 |
| 18 अप्रैल 2026 | सुबह 09:46 – दोपहर 12:00 |
| 23 अप्रैल 2026 | सुबह 07:31 – सुबह 11:40 |
| 23 अप्रैल 2026 | दोपहर 14:01 – शाम 18:35 |
| 24 अप्रैल 2026 | सुबह 09:22 – दोपहर 13:53 |
| 24 अप्रैल 2026 | शाम 16:15 – शाम 18:30 |
| 29 अप्रैल 2026 | सुबह 07:07 – सुबह 09:03 |
| 29 अप्रैल 2026 | सुबह 11:17 – शाम 18:10 |
| कर्णछेदन संस्कार मई मुहूर्त 2026 | |
| 1 मई 2026 | सुबह 10:59 – दोपहर 15:51 |
| 1 मई 2026 | शाम 17:48 – रात 19:02 |
| 2 मई 2026 | सुबह 07:01 – सुबह 08:57 |
| 2 मई 2026 | सुबह 11:12 – दोपहर 13:39 |
| 3 मई 2026 | शाम 17:36 – रात 19:00 |
| 6 मई 2026 | सुबह 09:02 – दोपहर 13:11 |
| 8 मई 2026 | सुबह 11:39 – दोपहर 14:05 |
| 9 मई 2026 | दोपहर 14:03 – शाम 18:20 |
| 10 मई 2026 | सुबह 06:49 – सुबह 10:36 |
| 10 मई 2026 | दोपहर 12:58 – दोपहर 14:01 |
| 16 मई 2026 | दोपहर 12:36 – शाम 18:00 |
Piercing सिर्फ फैशन नहीं, मिलते हैं कई लाभ
मानसिक एकाग्रता और स्मरण शक्ति
आयुर्वेदिक मान्यता के अनुसार कान में ऐसे बिंदु होते हैं जो मस्तिष्क से जुड़े होते हैं. कर्णछेदन से इन बिंदुओं पर प्रभाव पड़ता है जिससे एकाग्रता और स्मरण शक्ति बेहतर होती है. ज्योतिष नजरिए से देखें तो कान छिदवाने से बुध और गुरु का शुभ प्रभाव बढ़ता है. बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि होती है.
स्वास्थ्य संबंधी लाभ
- तनाव कम करने में मदद
- सिरदर्द में राहत देता है
आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व
- सनातन परंपरा में कर्णछेदन को षोडश संस्कारों में शामिल किया गया है. इससे व्यक्ति का धर्म और संस्कृति से जुड़ाव मजबूत होता है.
नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा
- गरुड़ पुराण और स्कन्द पुराण में कर्णवेध संस्कार को रक्षा और शुभता देने वाला संस्कार बताया गया है. मान्यता है कि इससे व्यक्ति नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षित रहता है और बुद्धि का विकास होता है.
पियरसिंग या कर्णछेदन संस्कार के लिए शुभ नक्षत्र और वार
शुभ नक्षत्र
- अश्विनी
- हस्त
- चित्रा
- पुष्य
- रेवती
- मृगशिरा
शुभ वार
- सोमवार
- बुधवार
- गुरुवार
- शुक्रवार
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