Organ Donation: मौत से पहले एक बच्ची ने कैसे बचाई 4 लोगों की जान, मेडिकल फील्ड में कैसे होता है यह कमाल?

सतीश कुमार
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How Does Organ Donation and Transplantation Work: केरल में 10 महीने की मासूम आलिन शेरिन अब्राहम ने मिसाल कायम किया है. वे सबसे कम उम्र की डोनर बनी. इस बच्ची का पार्थिव शरीर पहले मल्लप्पल्ली के एक निजी अस्पताल के शवगृह में रखा गया था. बाद में इसे वेस्ट वालुम्मानिल स्थित उनके घर पर अंतिम दर्शन के लिए लाया गया, जहां दूर-दूर से लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचे. पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया.

आलिन भले ही इस दुनिया से चली गईं, लेकिन अपने पीछे चार जिंदगियों में नई रोशनी छोड़ गईं. उनके अंगदान ने गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को जीवनदान दिया. यही अंगदान और ट्रांसप्लांट की असली ताकत है. चलिए आपको बताते हैं कि यह कैसे काम करता है?

क्या होता है ऑर्गन डोनेशन?

हेल्थ विषयों पर जानकारी देने वाली बेवसाइट clevelandclinic के अनुसार, ऑर्गन डोनेशन वह प्रक्रिया है, जिसमें किसी व्यक्ति के स्वस्थ अंग को निकालकर ऐसे मरीज के शरीर में लगाया जाता है, जिसका कोई अंग काम करना बंद कर चुका हो. यह एक बेहद संवेदनशील और समय से जुड़ी मेडिकल प्रक्रिया है. आमतौर पर दो सर्जरी लगभग एक साथ होती हैं, एक में डोनर के शरीर से अंग निकाला जाता है और दूसरी में जरूरतमंद मरीज के शरीर में उसे ट्रांसप्लांट किया जाता है.

कितने तरह के होते हैं ऑर्गन डोनेशन?

ऑर्गन डोनेशन दो प्रकार का होता है, मृत्यु के बाद किया जाने वाला दान और जीवित व्यक्ति द्वारा किया जाने वाला दान. अधिकांश मामलों में ब्रेन मृत्यु की पुष्टि के बाद परिजनों की सहमति से अंगदान किया जाता है. जीवित व्यक्ति भी किडनी जैसे कुछ अंग दान कर सकता है, बशर्ते उसकी सेहत पूरी तरह ठीक हो और उसका अंग जरूरतमंद मरीज के शरीर के अनुकूल हो. मृत्यु के बाद हार्ट, लिवर, किडनी, लंग्स, पैंक्रियास और आंत जैसे अंग दान किए जा सकते हैं. इसके अलावा आंख, स्किन, बोन मैरो और हार्ट  भी दान किए जा सकते हैं.

कौन होता है डोनर?

डॉक्टरों के मुताबिक, लगभग हर व्यक्ति संभावित अंगदाता हो सकता है. उम्र से ज्यादा महत्वपूर्ण है अंगों की सेहत और मेडिकल जांच. सही समय पर लिया गया एक निर्णय कई लोगों को दूसरी जिंदगी दे सकता है. अंगदान और ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया आसान नहीं होती. यह कई चरणों से होकर गुजरती है. शुरुआत दान के निर्णय से होती है और अंत उस मेडिकल प्रक्रिया पर होता है, जिसमें एक व्यक्ति का स्वस्थ अंग निकालकर दूसरे व्यक्ति के शरीर में सफलतापूर्वक लगाया जाता है. यह प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करती है कि अंगदाता जीवित है या मृत्यु के बाद दान किया गया है.

मृत्यु के बाद होने वाले अंगदान में समय बहुत कम होता है, क्योंकि मौत के कुछ ही घंटों के भीतर अंगों को सुरक्षित निकालना जरूरी होता है. देरी होने पर अंगों की उपयोगिता कम हो सकती है. वहीं, जीवित डोनर के मामले में पूरी तैयारी और योजना के साथ काम किया जाता है। इसमें स्वास्थ्य जांच, आवश्यक सहमति और सुरक्षा उपायों पर विशेष ध्यान दिया जाता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.