Poor Posture In Children: छोटी उम्र में ही बच्चों को हो रहा है ‘बुढ़ापे वाला दर्द’, डॉक्टर ने बताई झुकी कमर और गर्दन दर्द की असली वजह

सतीश कुमार
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How To Fix Poor Posture In Children: आजकल बच्चों की झुकी हुई कमर और आगे निकली गर्दन आम दृश्य बन गया है. किसी भी क्लासरूम में नजर डालें तो कई बच्चे डेस्क पर झुके हुए, कंधे गोल किए और सिर आगे की ओर निकाले बैठे दिखते हैं. खराब पोश्चर अब सिर्फ दिखने की बात नहीं रही, यह पीठ दर्द, गर्दन में खिंचाव, थकान और यहां तक कि सांस लेने व एकाग्रता पर भी असर डाल सकता है. चलिए आपको बताते हैं कि इसको लेकर एक्सपर्ट क्या कहते हैं कि इससे क्या दिक्कत हो सकती है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

बाल रोग एक्सपर्ट डॉ. बबीता जैन ने TOI को बताया कि आज के बच्चे उन समस्याओं से जूझ रहे हैं जो पहले ज्यादातर वयस्कों में देखी जाती थीं. महामारी के बाद बदली जीवनशैली ने बच्चों की बढ़ती रीढ़ पर अतिरिक्त दबाव डाला है. उनका कहना है कि स्क्रीन टाइम इस बढ़ती समस्या का सबसे बड़ा कारण है. ऑनलाइन पढ़ाई, स्मार्टफोन, टैबलेट, गेमिंग कंसोल और लैपटॉप के लंबे इस्तेमाल के कारण बच्चे घंटों बैठे रहते हैं. अक्सर वे बिस्तर या सोफे पर बिना पीठ के सही सहारे के झुके रहते हैं. धीरे-धीरे यह आदत कंधों को गोल कर देती है, गर्दन आगे की ओर झुक जाती है जिसे ‘टेक्स्ट नेक’ कहा जाता है और मांसपेशियों में लगातार खिंचाव बना रहता है.

आउटडोर खेल एक बड़ी चिंता

इसके साथ ही, आउटडोर खेलकूद में कमी भी चिंता का विषय है. दौड़ना, कूदना और चढ़ना-उतरना बच्चों की कोर और पीठ की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है. जब शारीरिक गतिविधि घटती है तो रीढ़ को सहारा देने वाली मांसपेशियां कमजोर पड़ने लगती हैं. नतीजा यह होता है कि बच्चे जल्दी थक जाते हैं, झुककर बैठते हैं और दर्द की शिकायत करते हैं. भारी स्कूल बैग भी समस्या बढ़ाते हैं, खासकर जब बच्चे उसे एक ही कंधे पर टांगते हैं. डॉ. जैन चेतावनी देती हैं कि गर्दन या कमर में बार-बार दर्द, कंधों का असमान दिखना, लगातार झुका हुआ बैठना या थोड़ी देर बैठने में भी असहजता महसूस होना शुरुआती संकेत हो सकते हैं. समय रहते ध्यान न दिया जाए तो आगे चलकर क्रॉनिक दर्द या रीढ़ की संरचना से जुड़ी दिक्कतें विकसित हो सकती हैं.

कैसे ठीक कर सकते हैं इसे?

अच्छी बात यह है कि समाधान कठिन नहीं है. बच्चों को रोज फिजिकल एक्टिविटी के लिए प्रेरित करें, स्ट्रेचिंग या योग को दिनचर्या में शामिल करें और स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण रखें. बैठते समय पीठ सीधी, पैर जमीन पर सपाट और स्क्रीन आंखों के स्तर पर होनी चाहिए. स्कूल बैग का वजन बच्चे के शरीर के वजन का 10 से 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए. छोटी-छोटी सही आदतें बच्चों की रीढ़ की लंबी उम्र तक रक्षा कर सकती हैं. समय पर जागरूकता और अभिभावकों का सहयोग ही बच्चों को मजबूत, आत्मविश्वासी और दर्दमुक्त रख सकता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.