Raebareli News : राना बेनी माधव बक्श सिंह स्मारक समिति की तरफ से आयोजित

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Raebareli News। बैसवारे की माटी में जन्में जिले की आन-मान और शान कह जाने वाले अमर सेनानी 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के महानायक व अवध केसरी राना बेनी माधव बक्श सिंह की 221 वीं जयंती के उपलक्ष में भाव समर्पण कार्यक्रम आयोजित किया गया। राना बेनी माधव बक्श सिंह स्मारक समिति की तरफ से शहर के फिरोज गांधी कॉलेज के सभागार में भाव समर्पण एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। भाव समर्पण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री लोक निर्माण विभाग कुंवर बृजेश सिंह ने राना की अश्वरोही प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। मुख्य अतिथि का स्वागत समिति के अध्यक्ष राघवेंद्र प्रताप सिंह, संरक्षक पूर्व विधायक इंद्रेश विक्रम सिंह, दिनेश सिंह चौहान ने बुके देकर किया।

भाव समर्पण कार्यक्रम में आए अतिथियों को संबोधित करते हुए राज्य मंत्री बृजेश सिंह ने कहा कि राना बेनी माधव बक्श सिंह की गौरव गाथा का गुणगान अवश्य होना चाहिए। राणा बेनी माधव के साहस का वर्णन करते हुए कहा कि 1857 की क्रांति में दिल्ली, कानपुर और लखनऊ की पराजय के बाद भी बैसवारा के राना बेनी माधव ने लॉर्ड कैनिंग के सामने समर्पण नहीं किया। उनकी वीरता और सैन्य कौशल का प्रमाण है कि वे तात्या टोपे के साथ उन दो सेनानियों में शामिल थे, जिन्हें वास्तविक स्वतंत्रता सेनानी की संज्ञा दी गई। राना बेनी माधव बख्श सिंह स्मारक समिति ने जिस तरह से अपने पूर्वजों को संजोने का काम किया है, वह वास्तव में बहुत ही तारीफ के योग्य है। हमें अमर सेनानियों के इतिहास के बारे में जानकारी करनी चाहिए।

सदर विधायक अदिति सिंह ने कहा कि आजादी की असली ललक संगठित रूप से 1857 में देखने को मिली थी। जब एक साथ देश में अलग-अलग जगहों पर आंदोलन शुरू किया गया था। बुंदेलखंड में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने बागडोर संभाली थी तो कानपुर में तात्या टोपे ने। वहीं अवध क्षेत्र में जिस नायक ने अंग्रेजों से मोर्चा लिया था, उस अमर नायक का नाम था राना बेनी माधव बख्श सिंह। शंकरगंज स्टेट के राजा अपने हजारों वीर सैनिकों के साथ मोर्चा लेने के लिए मैदान में निकल पड़े थे। उनके साथ में कंधा से कंधा मिलाकर साथ देने वालों में वीर सेनानी वीरा पासी को कैसे भूल सकते हैं, जिन्होंने अवध क्षेत्र में आंदोलन को गति प्रदान की थी। उनकी ओर से जलाई गई अलख के बाद हम लोग 90 वर्षों तक अंग्रेजों से लड़ते रहे और हजारों नायकों की वजह से ही हमें आजादी मिली थी। आज अगर हम लोग सुरक्षित हैं तो उसमें सबसे बड़ा योगदान हमारे सैनिकों का है। समिति के अध्यक्ष राघवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि भाव समर्पण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्वतंत्रता सेनानी बेनी माधव की स्मृति को संजोना और युवा पीढ़ी को उनके बलिदान से परिचित कराना है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आशीर्वाद से जिले में सभागार का निर्माण हो रहा है। उसका निर्माण पूरा होते ही सीएम योगी आदित्यनाथ के हाथों ही समिति की तरफ से कराया जाएगा।

इस अवसर पर कार्यक्रमों को संचालन करने के लिए बनाई गई समितियों में समन्वय समिति से हरिहर सिंह, मदन सिंह चौहान, रविंद्र सिंह, अभिषेक विक्रम सिंह,जितेंद्र सिंह बबलू केसरिया को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इसके अलावा डिबेट एवं चित्रकला प्रतियोगिता संचालन समिति से पूर्व प्राचार्य डायट रायबरेली जेपी सिंह, डॉक्टर शशिकांत शर्मा, गोविंद खन्ना, ऋषि अग्रवाल, देवेंद्र सिंह चौहान, राजेंद्र बहादुर सिंह राजन , डॉक्टर आर एन सिंह, डॉक्टर अभिषेक द्विवेदी, रणविजय सिंह गंगा पारी, सत्येंद्र सिंह, स्वास्थ्य शिविर संचालन समिति से डॉक्टर मनीष चौहान, डॉक्टर बृजेश सिंह, डॉक्टर सीबी सिंह, राकेश सिंह भदौरिया, राकेश सिंह राना व महेंद्र अग्रवाल, रक्तदान संचालन समिति से शिवम सिंह, संतोष सिंह, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिला अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह व शिक्षक विवेक मिश्रा को सम्मानित किया गया। वहीं, पौधरोपण संचालन समिति से डॉ रवि प्रताप सिंह, रामसेवक चौधरी, फल वितरण संचालन समिति से शिवकुमार सिंह, रामबली सिंह, अतुल गुप्ता, तथा दीपदान संचालन समिति से सभासद एसपी सिंह, अमित सिंह को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही समिति के उन तमाम सहयोगियों को भी सम्मानित किया गया जिन्होंने हमेशा से सहयोग देते रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन गोपाल खन्ना व सूरज शुक्ला ने किया।

इस अवसर पर पूर्व एमएलसी राकेश प्रताप सिंह, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष विवेक विक्रम सिंह, आरएसएम के प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सिंह, जिला पंचायत सदस्य राकेश सिंह राना, राघवेंद्र सिंह, कौशलेंद्र सिंह, विजय रस्तोगी, राघवेंद्र प्रताप सिंह, डॉ. अविनाश सिंह, रवींद्र सिंह, अभिषेक विक्रम सिंह, सुधीर दुबे, राजा भदौरिया, रामराज सिंह, जीबी सिंह, रमेश सिंह, अजीत सिंह, हरीशानंद मिश्रा, वीरेंद्र सिंह, सुभाष भदौरिया, दलजीत कौर, गोविंद सिंह चौहान, मेजर सुनील सिंह, सुनील भदौरिया, गुड्डू सिंह, नरेंद्र प्रधान, परमेंद्र पाल गुलाटी, ओपी यादव एडवोकेट, हनुमत शरण सिंह, डॉ धनंजय सिंह, शिव कुमार सिंह, पवन सिंह, अंकित सिंह, अजीत सिंह बघेल, संतोष साहू, डॉ चंपा श्रीवास्तव, जीसी सिंह चौहान, अतुल गुप्ता, महेंद्र अग्रवाल, प्रभाकर गुप्ता, संदीप जैन, नरेंद्र फौजी, मुकेश श्रीवास्तव, गर के सम्मानित लोग उपस्थित रहे।

समिति ने इन बच्चों को किया सम्मानित

रायबरेली। राना बेनी माधव बक्श सिंह की तरफ से एक सप्ताह में कराई गई विभिन्न प्रतियोगिता के बच्चों को सम्मानित भी किया गया। चित्र प्रतियोगिता के प्ले ग्रुप को में श्री हेमकुंड पब्लिक स्कूल की अरवी को प्रथम, राइजिंग चाइल्ड स्कूल की शिवि सोनकर को द्वितीय तथा वीणा पाणी इंटर कॉलेज की परी को तृतीय स्थान प्राप्त करने के लिए पुरस्कृत किया गया। वही कक्षा 1 से 2 के ग्रुप में केंद्रीय विद्यालय की संध्या वर्मा, दयावती मोदी पब्लिक स्कूल की आर्य जायसवाल के अथर्व वर्मा को पुरस्कृत किया गया। कक्षा 3 से 5 के ग्रुप में बीएसएस की आराध्य यादव को प्रथम, केंद्रीय विद्यालय की संवि सिंह यादव को द्वितीय, विबग्योर पब्लिक स्कूल की महिमा को तृतीय तथा ऑपरेशन सिंदूर ग्रुप में अपनी कला की प्रतिभा का लोहा मनाने वाली सेंट पीटर्स स्कूल की शताक्षी वत्स को प्रथम, चिन्मया विद्यालय के आयुष कुमार को द्वितीय स्थान, दयावती मोदी पब्लिक स्कूल की श्रेया को तृतीय स्थान प्राप्त करने के लिए सम्मानित किया गया। डिबेट प्रतियोगिता में शामिल पक्ष से रुद्र प्रताप सिंह को प्रथम ,अनुष्का मिश्रा को द्वितीय, अचलेश मिश्रा को तृतीय स्थान तथा विपक्ष से सेजल सिंह को प्रथम, कपूरिका खन्ना को द्वितीय,अलीशा बानो को तृतीय स्थान प्राप्त करने पर मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया।

समिति ने उठाई संरक्षित करने की मांग

रायबरेली। राना बेनी माधव बक्श सिंह स्मारक समिति रायबरेली ने मुख्य अतिथि लोक निर्माण विभाग के राज्य मंत्री कुंवर बृजेश सिंह से जिले के विभिन्न स्मारकों को संरक्षित करने की मांग की। समिति की तरफ से राजघाट पर स्थित पुराने ब्रिज जो कि राजघाट पुल के नाम जाना जाता है। इस पुल को बैस राजा ने 1866 में बनवाया था उसको संरक्षित किए जाने की मांग की गई। सई नदी पर रायबरेली से एम्स जाने वाले मार्ग पर पुराने पुल के पास बने नया पुल तथा सुलतानपुर मार्ग से अभय दाता मंदिर को जाने वाले जर्जर मार्ग के निर्माण की मांग की गई।

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.
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