The month of Ramadan: गोरखपुर, माह-ए-रमजान इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना है. चांद के दीदार के साथ गुरुवार 19 फरवरी से पवित्र माह-ए-रमजान शुरु होगा. मुस्लिम घरों व मस्जिदों में रमजान की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. रमजान की रातों में पढ़ी जाने वाली तरावीह की नमाज पढ़ाने वाले हाफिज, कुरआन-ए-पाक दोहरा रहे हैं. रमजान में रोजेदार दिन में रोजा रखेंगे और रात में तरावीह की नमाज पढ़ेंगे. अबकी बार रमजान का पहला रोजा करीब 12 घंटा 51 मिनट का होगा. जो रमजान का सबसे छोटा रोजा होगा. वहीं रमजान का आखिरी रोजा सबसे बड़ा होगा. जो 13 घंटा 37 मिनट का होगा.
22 साल बाद गुलाबी सर्दी में शुरू हुआ माह-ए-रमजान
पवित्र माह-ए-रमजान एक बार फिर सर्दियों के मौसम में दस्तक देने जा रहा है. माह-ए-रमजान में इस बार भी रोजा अल्लाह की रहमत से भरा होगा. करीब 22 साल बाद रमजान सर्दी के मौसम में शुरू हो रहा है. रमजान की आमद को लेकर लोगों में उत्साह है.
11 साल तक गुलाबी ठंड में होगा माह-ए-रमजान
इस्लामी मामलों के जानकार कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी के अनुसार, इस्लामिक कैलेंडर (हिजरी) सौर कैलेंडर की तुलना में हर साल 10 से 12 दिन छोटा होता है. इस कारण रमजान हर साल अलग मौसम में आता है और करीब 33 साल में अपना एक चक्र पूरा करता है.
- पिछली बार: साल 2004 में अक्टूबर-नवंबर के बीच गुलाबी सर्दी में रोजे रखे गए थे.
- अगला पड़ाव: अब से लेकर अगले 11 साल (2037 तक) रमजान का आगाज ठंड के मौसम में ही होगा.
- राहत: 2026 से 2036 तक रोजेदारों को चिलचिलाती धूप और लू से बड़ी राहत मिलेगी.
इसके बाद बरसात से माह-ए-रमजान की शुरुआत होगी. इसका सिलसिला भी 11 साल चलेगा. उन्होंने बताया कि साल के बारह माह में रमजान शरीफ सबसे खास महीना होता है. पूरे महीने लोग रोजा रखकर अल्लाह की इबादत और अन्य नेक काम करते हैं. इस माह में नेकी करने वालों को बहुत अधिक सवाब मिलता है. रोजेदार अपनी दिनचर्या में अधिक से अधिक अल्लाह की इबादत और जकात व अन्य सदका खैरात करें.
सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार के इमाम हाफिज रहमत अली निजामी ने बताया कि इससे पहले माह-ए-रमजान के रोजे 2004 में अक्टूबर और नवम्बर के बीच गुलाबी सर्दी में हुए थे. पिछले 2005 से 2025 तक अक्टूबर से मार्च के बीच गर्मी और बरसात में गुजरा. मई-जून में शिद्दत की गर्मी वही दूसरी तरफ जुलाई-अगस्त में पसीने से तरबतर रोजेदारों का अल्लाह ने इम्तिहान लिया. 2004 के बाद पहली बार रमजान गुलाबी ठंडक में पड़ रहा है. इस बार रमजान रोजेदारों के लिए राहत भरा रहने वाला है. ठंड के मौसम में रोजे का समय कम होने से इबादत में सहूलियत रहेगी.
शहर काजी मुफ्ती मुहम्मद अजहर शम्सी ने बताया कि 18 फरवरी को माह-ए-शाबान की 29 तारीख है, इसी दिन माह-ए-रमजान का चांद देखा जाएगा. अगर चांद नजर आ गया तो 19 फरवरी से रमजान शुरु हो जाएगा. अगर चांद नजर नहीं आया तो 20 फरवरी से रमजान शुरु होगा. अगले 11 साल तक रमजान ठंड के मौसम में ही रहेगा. इसका फायदा सिर्फ रोजेदारों को ही नहीं, बल्कि इफ्तार-सहरी से जुड़े दुकानदारों और व्यापारियों को भी मिलेगा. 2026 से 2036 तक रोजेदारों को सूरज की तपिश से राहत मिलेगी.
मुफ्ती-ए-शहर अख्तर हुसैन मन्नानी ने बताया कि मुकद्दस रमजान का पहला अशरा रहमत, दूसरा मगफिरत, तीसरा जहन्नम से आजादी का है. रमजान रहमत, खैर व बरकत का महीना है. इसमें रहमत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं. जहन्नम के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं. शैतान जंजीर में जकड़ दिए जाते हैं. नफ्ल का सवाब फर्ज के बराबर और फर्ज का सवाब सत्तर फर्जों के बराबर दिया जाता है.
मरकजी मदीना जामा मस्जिद रेती के इमाम मुफ्ती मेराज अहमद कादरी ने कहा कि लोगों को माह-ए-रमजान में अपने अंदर के गुस्से को निकाल देना चाहिए. यह एक तरह से प्रशिक्षण का माह होता है. रोजा रखकर दूसरे की भूख का अहसास होता है इसलिए तमाम मुसलमानों को चाहिए कि अल्लाह का शुक्र अदा करते हुए खुशदिली से रोजा रखें और अल्लाह के इनाम के हकदार बनें. खूब इबादत करें और इस माह-ए-रमजान के फैज से मालामाल हों.
माह-ए-रमजान : खत्म सहरी : इफ्तार – (गोरखपुर के लिए सहरी-इफ्तार का समय)
- 19 फरवरी : सुबह 5:06 बजे : शाम 5:57 बजे, 12 hr 51 m
- 20 फरवरी : सुबह 5:05 बजे : शाम 5:58 बजे, 12 hr 53 m
- 21 फरवरी : सुबह 5:04 बजे : शाम 5:58 बजे, 12 hr 54m
- 22 फरवरी : सुबह 5:03 बजे : शाम 5:59 बजे, 12hr 56m
- 23 फरवरी : सुबह 5:02 बजे : शाम 5:59 बजे, 12 hr 57m
- 24 फरवरी : सुबह 5:01 बजे : शाम 6:00 बजे, 12 hr 59m
- 25 फरवरी : सुबह 5:00 बजे : शाम 6:00 बजे, 13 hr 00 m
- 26 फरवरी : सुबह 4:59 बजे : शाम 6:01 बजे, 13 hr 02m
- 27 फरवरी : सुबह 4:58 बजे : शाम 6:02 बजे, 13 hr 04m
- 28 फरवरी : सुबह 4:57 बजे : शाम 6:02 बजे, 13 hr 05m
- 01 मार्च : सुबह 4:57 बजे : शाम 6:03 बजे, 13 hr 06m
- 02 मार्च : सुबह 4:56 बजे : शाम 6:03 बजे, 13 hr 07m
- 03 मार्च : सुबह 4:55 बजे : शाम 6:04 बजे, 13 hr 09m
- 04 मार्च : सुबह 4:54 बजे : शाम 6:04 बजे, 13 hr 10m
- 05 मार्च : सुबह 4:53 बजे : शाम 6:05 बजे, 13 hr 12 min
- 06 मार्च : सुबह 4:52 बजे : शाम 6:06 बजे, 13 hr 14m
- 07 मार्च : सुबह 4:51 बजे : शाम 6:06 बजे, 13hr 15m
- 08 मार्च : सुबह 4:50 बजे : शाम 6:07 बजे, 13hr 17m
- 09 मार्च : सुबह 4:49 बजे : शाम 6:07 बजे, 13 hr 18m
- 10 मार्च : सुबह 4:48 बजे : शाम 6:08 बजे, 13 hr 20m
- 11 मार्च : सुबह 4:46 बजे : शाम 6:08 बजे, 13 hr 22m
- 12 मार्च : सुबह 4:45 बजे : शाम 6:09 बजे, 13 hr 24m
- 13 मार्च : सुबह 4:44 बजे : शाम 6:09 बजे, 13 hr 25m
- 14 मार्च : सुबह 4:43 बजे : शाम 6:10 बजे, 13 hr 27m
- 15 मार्च : सुबह 4:42 बजे : शाम 6:10 बजे, 13 hr 28m
- 16 मार्च : सुबह 4:41 बजे : शाम 6:11 बजे, 13 hr 30m
- 17 मार्च : सुबह 4:40 बजे : शाम 6:11 बजे, 13 hr 31m
- 18 मार्च : सुबह 4:39 बजे : शाम 6:12 बजे, 13 hr 33m
- 19 मार्च : सुबह 4:38 बजे : शाम 6:13 बजे, 13hr 35m
- 20 मार्च : सुबह 4:37 बजे : शाम 6:14 बजे, 13 hr 37m
इबादत और जकात का महीना
शहर काजी मुफ्ती मुहम्मद अजहर शम्सी और मुफ्ती मेराज अहमद कादरी ने अपील की है कि इस पवित्र महीने में रोजेदार इबादत के साथ-साथ जकात और सदका-खैरात पर विशेष ध्यान दें. ठंड का मौसम होने के कारण इबादत में सहूलियत रहेगी और बाजारों में भी रौनक बढ़ने की उम्मीद है.
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