Ramadan Jumma 2026: आज रोजेदार अदा करेंगे करेंगे जुमे की नमाज, मांगेंगे मुल्क में अमन ओ अमान की दुआ

सतीश कुमार
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Ramadan Jumma 2026: गुरुवार को खैर व बरकत के साथ रमजान का आठवां रोजा बीत गया. आज 27 फरवरी शुक्रवार को आज माह-ए-रमजान का नौवां रोजा रखा गया है. इस पाक महीने में रोजेदार अल्लाह की रजा में नेक काम कर खूब नेकियां कमा रहे हैं. नेकी कमाने का यह सिलसिला पूरे रमजान तक ऐसे ही चलता रहेगा.

मस्जिद व घरों में जमकर इबादत व कुरआन-ए-पाक की तिलावत हो रही है. दस्तरख्वान पर तमाम तरह की नेमत रोजेदारों को खाने को मिल रही है. सभी के हाथों में तस्बीह व सरों पर सजी टोपियां अच्छी लग रही हैं. महिलाएं इबादत के साथ घर व बाजार की जिम्मेदारियां बाखूबी अंजाम दे रही हैं. तरावीह की नमाज जारी है.

सदका, फित्रा व जकात की रकम लेने के लिए मदरसे वाले घरों पर पहुंचने लगे हैं. इसी सदका, फित्रा व जकात की रकम से मदरसों के साल भर का निजाम चलेगा. मदरसे में पढ़ने वाले गरीब, यतीम छात्रों के रहन-सहन, खान-पान का खर्च निकलेगा. कई मदरसों के शिक्षक तो बड़े शहरों में गये हुए हैं. बाजार गुलजार है. वहीं माह-ए-रमजान में पड़ने वाले दूसरे जुमा के लिए मस्जिदों में तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. सभी मस्जिदों में जुमा का खुत्बा पढ़ा जाएगा और जुमा की नमाज अदा कर मुल्क में अमन ओ अमान की दुआ मांगी जाएगी. महिलाएं घरों में इबादत कर दुआ मांगेंगीं 

माह-ए-रमजान में दुआएं ज्यादा कबूल होती हैं: मुफ्ती मेराज 

मरकजी मदीना जामा मस्जिद रेती चौक के इमाम मुफ्ती मेराज अहमद कादरी ने बताया कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि दुआ बंदे की तीन बातों से खाली नहीं होती, पहला उसका गुनाह बख्शा जाता है। दूसरा उसे फायदा हासिल होता है. तीसरा उसके लिए आखिरत में भलाई जमा की जाती है.

माह-ए-रमजान में तो दुआएं ज्यादा कुबूल होती हैं इसलिए माह-ए-रमजान में दुआएं जरूर मांगी जाए. इफ्तार के समय की दुआ खाली नहीं जाती. रोजेदार के लिए तो फरिश्ते व दरिया की मछलियां तक दुआ करती हैं. दुआ मांगने का पहला फायदा यह है कि अल्लाह के हुक्म की पैरवी होती है कि उसका हुक्म है कि मुझसे दुआ मांगा करो. दुआ मांगना सुन्नत भी है.

हकदार मुसलमानों की जकात, सदका, फित्रा से मदद करें: नजीर अहमद 

समाजसेवी नजीर अहमद सिद्दीकी ने बताया कि हमें अपनी गलतियों को सुधारने का मौका रमजान के रोजे में मिलता है. गलतियों के लिए तौबा करने एवं अच्छाइयों के बदले बरकत पाने के लिए भी इस महीने की इबादत का महत्व है. माह-ए-रमजान बहुत ही रहमत व बरकत वाला महीना है. हकदार मुसलमानों की जकात, सदका, फित्रा से हरसंभव मदद जरूर कीजिए.

माह-ए-रमजान में ही सदका-ए-फित्र निकाल दें: उलमा किराम 

रमज़ान हेल्पलाइन नंबर 8604887862, 9598348521, 9956971232, 7860799059 पर गुरुवार को सवाल ओ जवाब का सिलसिला जारी रहा. उलमा किराम ने क़ुरआन व हदीस की रोशनी में जवाब दिया.

सवाल: सदका-ए-फित्र कब निकालना चाहिए? 

जवाब: ईद के दिन सुबह सादिक तुलू होते ही सदका फित्र वाजिब हो जाता है, लेकिन मुमकिन हो तो ईद से कुछ दिन पहले रमजान में ही सदका-ए-फित्र निकाल दें ताकि जरूरतमंद लोग इसका इस्तेमाल कर ईद की खुशियों में हमारे साथ शरीक हो सकें.

सवाल: क्या जिस्म के किसी हिस्से से खून निकलने से रोजा टूट जाता है? 

जवाब: नहीं सिर्फ खून निकलने से रोजा नहीं टूटता. हां अगर मुंह से खून निकला और हलक के नीचे उतर गया तो रोजा टूट जाएगा.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.