Sarcopenia Symptoms: 30 के बाद गायब हो रही हैं आपकी मांसपेशियां, जानें क्या है ‘सारकोपेनिया’ और कैसे इसे रोकें?

aditisingh
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How To Build Muscle Naturally After 35: उम्र बढ़ने के साथ लोगों को होने वाली मांसपेशियों की कमी के बारे में पता है.  गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी ने भी हाल ही में सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर चर्चा की. उन्होंने 2023 में लैंसेट पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि 30 की उम्र के बाद हर साल लगभग 1 प्रतिशत मांसपेशियां चुपचाप कम होने लगती हैं. इस स्थिति को सारकोपेनिया कहा जाता है, जिसमें उम्र के साथ स्केलेटल मसल की ताकत, आकार और काम करने की क्षमता धीरे-धीरे घटती जाती है. 

कब शुरू होती है यह स्थिति?

स्टडी के अनुसार, सारकोपेनिया की शुरुआत आमतौर पर 30 वर्ष के आसपास होती है और 60 के बाद यह तेजी से बढ़ सकती है. इसका असर केवल शरीर की बनावट पर नहीं, बल्कि रोजमर्रा के काम करने की क्षमता, संतुलन और हड्डियों की मजबूती पर भी पड़ता है. गिरने और फ्रैक्चर का खतरा भी बढ़ सकता है. लोगों को तमाम तरह के दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. 

डॉ. सेठी के मुताबिक, मांसपेशियों का कम होना कई हेल्थ समस्याओं से जुड़ा है. इसमें मेटाबॉलिज्म का धीमा होना, शरीर में अधिक चर्बी जमा होना, इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ना, फैटी लिवर का खतरा और हड्डियों व पोश्चर का कमजोर होना शामिल है. वे बताते हैं कि मांसपेशियां शरीर की सबसे बड़ी ग्लूकोज स्पंज की तरह काम करती हैं, जो खून से शुगर सोखकर उसे संतुलित रखने में मदद करती हैं. इसलिए मसल लॉस का मतलब ब्लड शुगर असंतुलन से भी हो सकता है.

 

 

महिलाओं में क्या होती है दिक्कत?

उन्होंने 2009 के The Lancet में प्रकाशित Tabák AG और दोस्तों के रिसर्च का जिक्र करते हुए बताया कि महिलाओं में 35 से 40 की उम्र के बीच मांसपेशियों की कमी तेज हो सकती है. एस्ट्रोजन के स्तर में गिरावट के साथ मसल ब्रेकडाउन बढ़ता है, यही वजह है कि पेरिमेनोपॉज के दौरान कई महिलाओं को बिना वजन बदले भी कमजोरी महसूस होती है. सारकोपेनिया के शुरुआती संकेत अक्सर हल्के होते हैं कि सीढ़ियां चढ़ते समय जल्दी थक जाना, वजन समान रहने के बावजूद मसल टोन कम होना या सामान्य से ज्यादा थकान महसूस होना. ये बदलाव धीरे-धीरे आते हैं, इसलिए लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं.

कैसे इससे निपटा जा सकता है?

अगर इससे निपटने की बात करें, तो की बात करें तो शोध बताते हैं कि रेजिस्टेंस ट्रेनिंग मांसपेशियों की ताकत और इंसुलिन सेंसिटिविटी दोनों को बेहतर कर सकती है, यहां तक कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में भी. इसके अलावा रोजाना 1.2 से 1.6 ग्राम प्रति किलोग्राम प्रोटीन का सेवन, रेगुलर या तेज चाल से चलना, पर्याप्त नींद और पर्याप्त विटामिन D लेवल बनाए रखना मसल हेल्थ के लिए जरूरी है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.