Shiva Temples: काशी से केदारनाथ तक इन 7 शिव मंदिरों में शिवलिंग को छूना मना है, जानिए क्यों!

सतीश कुमार
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यह आमतौर पर उलझन भरा लगता है, आखिर मानवता के इतने समीप रहने वाला ईश्वर के शारीरिक संपर्क पर मनुष्यों के छूने पर सीमाएं लगी है. क्या यह केवल प्रतिबंध है या फिर इसके पीछे कोई गहन कारण हैं, जिसे आधुनिक उपासक समझने की जहमत भी नहीं उठाते?

काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी

काशी विश्वनाथ दुनिया के सबसे पवित्र शिव मंदिरों में शामिल है, जिसे मृत्यु के पश्चात मोक्ष प्रदान करने वाला माना जाता है. यहां के शिवलिंग की अत्यधिक पूजा-अर्चना की जाती है. भक्तों को शिवलिंग को सीधे तौर पर छूना मना है. अभिषेक समेत सभी अनुष्ठान प्रशिक्षित पुजारियों द्वारा तय समय सारणी और सख्त नियमों का पालन करते हुए संपन्न किए जाते हैं.

ऐसा करने के पीछे केवल भीड़ प्रबंधन ही नहीं, बल्कि इसलिए भी है क्योंकि गर्भगृह एक शक्तिशाली आध्यात्मिक केंद्र माना जाता है. काशी में शिवजी को परम सत्य के रूप में पूजा जाता है, जो शारीरिक निकटता से परे है.

केदारनाथ मंदिर, उत्तराखंड

ऊंचे-ऊंचे हिमालयों के बीच में स्थित केदारनाथ बारह ज्योतिर्लिंग में से एक है, जो शिव के सबसे ऊर्जावान तीर्थ स्थलों में से एक है. केदारनाथ के शिवलिंग की काफी मान्यता है, क्योंकि यह प्राचीन, स्वयंभू और अत्यंत आध्यात्मिक है.

भक्तों को इसे छूने की मनाही है. केवल पंडित और पुरोहित ही इसे छू सकते हैं. इस प्रतिबंध के पीछे का कारण शिवलिंग मात्र प्रतीक नहीं बल्कि एक जीवंत आध्यात्मिक शक्ति है, जिसकी सालों से निरंतर पूजा होते आ रही है.

महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन

महाकालेश्वर मंदिर ज्योतिर्लिंगों में अद्वितीय है, क्योंकि इसे स्वयंभू माना जाता है,जो दक्षिण दिशा की ओर उन्मुख है, जो समय और विनाश से संबंध रखता है. महाकालेश्वर मंदिर धार्मिक अनुष्ठानों के लिए काफी प्रसिद्ध है, विशेष रूप से सुबह के समय होने वाले अनुष्ठानों के दौरान भक्तों की भीड़ काफी बढ़ जाती है. मंदिर के पुरोहित वर्ग इस कठोर नियम का पालन करते हैं.

सोमनाथ मंदिर, गुजरात

ज्योतिर्लिंगों में सबसे पहला ज्योतिर्लिंग सोमनाथ है, जो ऐतिहासिक और आध्यात्मिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है. भक्तों को सोमनाथ शिवलिंग छूने की अनुमति नहीं है. पूजा दर्शन और पुजारी द्वारा निर्देशित अनुष्ठानों के जरिए की जाती है. सोमनाथ मंदिर में शास्त्रीय आगमिक पद्धतियों का पालन किया जाता है, जो गर्भगृह में प्रवेश के नियमों साफ तौर पर परिभाषित करती हैं.

वैद्यनाथ धाम, देवघर

वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग भी आध्यात्म के नजरिए से काफी खास है. मनोकामनाएं पूर्ण होने के साथ तीर्थस्थल के रूप में इसकी ख्याति के बावजूद शिवलिंग के साथ शारीरिक संपर्क काफी हद तक सीमित है. भक्त स्पर्श करने के बावजूद भेंट और प्रार्थना के माध्यम से इसमें हिस्सा लेते हैं.

रामनाथस्वामी मंदिर, रामेश्वरम

शैव परंपराओं में रामेश्वरम का खास स्थान है और यह रामायण से गहराई से जुड़ा है. यह मंदिर अपने पवित्र जल अनुष्ठानों के लिए काफी फेमस है. मंदिर के अन्य हिस्सों में भक्तों में व्यापक धार्मिक गतिविधियों में भागीदारी होने के बावजूद शिवलिंग को सीधे तौर पर छूना मना है.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.