UPSC Result 2025: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के 2025 के परिणामों ने एक बार फिर साबित किया है कि सफलता किसी की मोहताज नहीं होती. जहां राजस्थान, बिहार और तमिलनाडु जैसे राज्यों ने टॉप-10 की सूची में अपनी धाक जमाई है, वहीं कुछ ऐसे राज्य भी हैं जिनका प्रदर्शन इस बार उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा. कश्मीर की वादियों से लेकर हिमाचल की पहाड़ियों तक,कई राज्य ऐसे हैं, जो इस साल टॉपर्स की लिस्ट में सूखे रहे. आइए जानें.
किन राज्यों का दबदबा
इस साल के टॉपर्स की लिस्ट में चुनिंदा राज्यों के उम्मीदवारों ने ही जगह बनाई है. टॉपर्स की लिस्ट में राजस्थान के अनुज अग्निहोत्री, तमिलनाडु की राजेश्वरी सुवे एम, आकांश धुल्ल (चंडीगढ़), राघव झुनझुनवाला (बिहार), ईशान भटनागर (मध्य प्रदेश), जिन्निया अरोड़ा (दिल्ली), ए. आर. राजाह मोहैदीन (तमिलनाडु), पाक्षल सेक्रेट्री (मध्य प्रदेश), आस्था जैन (उत्तर प्रदेश), उज्ज्वल प्रियंक (बिहार) राज्यों का दबदबा रहा.
वो राज्य जो टॉप-10 की रेस से रहे पूरी तरह बाहर
हैरानी की बात यह रही कि कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड, आंध्र प्रदेश, गुजरात, केरल, महाराष्ट्र, मणिपुर, नागालैंड, ओडिशा, सिक्किम, तेलंगाना, त्रिपुरा, असम-मेघालय जैसे राज्यों से कोई भी उम्मीदवार टॉप-10 की प्रतिष्ठित सूची में जगह नहीं बना सका. कश्मीर, जिसने पिछले कुछ वर्षों में शाह फैसल और अतहर आमिर जैसे टॉपर दिए थे, इस साल शीर्ष स्तर पर शांत नजर आया.
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इसी तरह, पश्चिम बंगाल और झारखंड, जो कभी सिविल सेवा के गढ़ माने जाते थे, उनकी अनुपस्थिति चर्चा का केंद्र बनी हुई है. पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश के लिए भी यह साल टॉप-10 के लिहाज से सूखा रहा.
958 सफल उम्मीदवारों में राज्यों की भागीदारी
भले ही ये राज्य टॉप-10 में नहीं आ पाए, लेकिन कुल 958 सफल उम्मीदवारों की पूरी सूची में इन राज्यों का योगदान शून्य नहीं है. आंकड़ों के अनुसार, 180 उम्मीदवारों का चयन आईएएस (IAS), 150 का आईपीएस (IPS) और 55 का आईएफएस (IFS) के लिए हुआ है. इनमें कश्मीर से कुछ चुनिंदा उम्मीदवारों ने निचली रैंक हासिल कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है. इसी तरह हिमाचल और बंगाल के कुछ छात्र 900 की सूची में जगह बनाने में सफल रहे हैं, लेकिन शीर्ष 10 में उनकी कमी खली.
बंगाल और झारखंड में कम हो रहा सिविल सर्विस का रुझान?
राज्यों के इस प्रदर्शन से स्पष्ट होता है कि राजस्थान, बिहार और उत्तर प्रदेश में सिविल सेवा की तैयारी का कल्चर अब भी बहुत मजबूत है. वहीं, बंगाल और झारखंड जैसे राज्यों में छात्रों का रुझान शायद अन्य क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा है या तैयारी के स्तर में कहीं कमी रह गई है. यह नतीजे आने वाले समय में इन राज्यों के कोचिंग संस्थानों और अभ्यर्थियों के लिए आत्म-मंथन का संकेत हैं.
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