US Tariffs: ट्रंप टैरिफ के रिफंड से अब कंपनियों की होगी भरपाई, लेकिन अमेरिकी जनता का क्या होगा?

सतीश कुमार
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US Trump Tariffs: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump को उस समय बड़ा झटका लगा जब Supreme Court of the United States ने उनके द्वारा लगाए गए कई उच्च आयात शुल्क (टैरिफ) को अमान्य करार दे दिया. इन टैरिफ के जरिए अमेरिकी प्रशासन ने लगभग 134 अरब डॉलर का राजस्व जुटाया था. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह रकम किसे और कैसे वापस की जाएगी?

टैरिफ सीधे आम अमेरिकी नागरिकों से वसूला गया कर नहीं था. यह आयातित वस्तुओं पर लगाया गया शुल्क था, जिसे अमेरिका में सामान मंगाने वाली कंपनियों जैसे Walmart और Costco ने सीमा शुल्क विभाग को चुकाया. यानी कानूनी रूप से भुगतानकर्ता कंपनियां थीं. हालांकि व्यवहारिक रूप से कंपनियां यह अतिरिक्त लागत अपने उत्पादों की कीमतों में जोड़ देती हैं, जिससे अंतिम बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ता है.

उदाहरण के लिए, अगर किसी इलेक्ट्रॉनिक सामान पर 15% टैरिफ लगा, तो आयातक कंपनी ने सरकार को वह शुल्क दिया, लेकिन बाद में उसी अनुपात में कीमत बढ़ाकर उपभोक्ता से वसूला.

रिफंड किसे मिलेगा?

कानूनी दृष्टि से रिफंड उसी इकाई को दिया जाता है जिसने सरकार को भुगतान किया हो. चूंकि सीमा शुल्क का भुगतान कंपनियों ने किया था, इसलिए यदि रिफंड की प्रक्रिया शुरू होती है तो वह कंपनियों को ही मिलेगा, न कि सीधे उपभोक्ताओं को. उपभोक्ताओं को सीधे भुगतान करना संभव नहीं है, क्योंकि उन्होंने सरकार को कोई सीधा कर नहीं चुकाया.

रिफंड की प्रक्रिया आसान नहीं है. कंपनियों को यह साबित करना होगा कि उन्होंने किस अवधि में कितना टैरिफ जमा किया था और वह अदालत के फैसले के तहत अमान्य श्रेणी में आता है. इसके बाद कस्टम अथॉरिटी की समीक्षा, दस्तावेज़ी जांच और कानूनी प्रक्रियाएं होंगी. इसमें ब्याज भुगतान का मुद्दा भी शामिल हो सकता है.

कितना समय लग सकता है?

राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया है कि पूरी प्रक्रिया में करीब पांच साल तक का समय लग सकता है. कारण यह है कि हजारों कंपनियों और करोड़ों आयात लेनदेन की समीक्षा करनी होगी. इसके अलावा सरकार यह भी देख सकती है कि क्या किसी वैकल्पिक कानूनी प्रावधान के तहत नए टैरिफ लागू कर पहले के राजस्व की भरपाई की जा सकती है. उपभोक्ताओं पर असर भले ही कंपनियों को रिफंड मिल जाए, यह जरूरी नहीं कि वे वह रकम उपभोक्ताओं को लौटाएं.

कंपनियां उस पैसे को अपने घाटे की भरपाई, बैलेंस शीट मजबूत करने या भविष्य के निवेश में लगा सकती हैं. इसलिए आम जनता को सीधे तौर पर रिफंड मिलने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.