Vastu Tips For Puja Ghar: घर में पूजा कक्ष सबसे पवित्र स्थान माना जाता है, जो आराधना और आध्यात्मिक ऊर्जा से जुड़ी जगह भी मानी जाती है. पूजा घर की पवित्रता बनाए रखने के लिए लोग अक्सर वास्तु के सिद्धांतों का पालन करते हैं.
हालांकि कई लोग जाने-अनजाने पूजा कक्ष में माचिस की डिब्बी रखने की एक सामान्य सी गलती कर बैठते हैं. वास्तु के मुताबिक, यह देखने में भले ही सामान्य लग सकता है, लेकिन इसके परिणाम काफी गंभीर साबित हो सकते हैं.
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पूजा कक्ष में माचिस क्यों नहीं रखें?
अगरबत्ती, दीपक और मोमबत्ती जिन्हें आमतौर पर मासिच से जलाया जाता है. धार्मिक अनुष्ठान और पूजा का अभिन्न अंग है, लेकिन पूजा घर में माचिस रखना सही नहीं माना जाता है. वास्तु शास्त्र के मुताबिक, पवित्र स्थान में ज्वलनशील वस्तुएं वास्तु दोष को उत्पन्न कर सकती हैं, जो पॉजिटिव एनर्जी को कम करने के साथ आध्यात्मिक लाभों को भी घटाती है.
यह मान्यता माचिस की डिब्बी और आग के बीच के गहरे संबंध से जुड़ी है, जो विनाश और अस्थिरता का प्रतीक एक शक्तिशाली तत्व है. माना जाता है कि, इसे देवता के कमरे में रखने से शांतिपूर्ण और पवित्र वातावरण भंग होता है, जिससे जातक को आर्थिक कठिनाइयां, मानसिक अशांति और प्रार्थनाओं के लाभ में दिक्कत पैदा हो सकती है.
पूजा घर में माचिस का डिब्बा रखने का असर?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, इसका असर आध्यात्मिक साधना और व्यक्तिगत जीवन दोनों पर देखने को मिलता है. वास्तु शास्त्र में शयनकक्ष में माचिस रखने की मनाही है. माना जाता है कि, ऐसा करने से पति-पत्नी के बीच कलह होती है और वैवाहिक सामंजस्य भी बिगड़ता है. ज्वलनशील वस्तुओं की उपस्थिति से चिंता और नकारात्मक ऊर्जा में भी वृद्धि होती है.
वास्तु दोष से बचने के लिए माचिस की डिब्बियों को सही स्थानों पर रखना चाहिए. रसोई, जो अग्नि से जुड़ी वस्तुओं के लिए निर्धारित स्थान है, सबसे उपयुक्त स्थान माना जाता है. इसके साथ ही इन्हें बंद दराजों या अलमारियों में भी रखा जा सकता है. यदि पूजा कक्ष माचिस रखनी जरूरी है, तो उसे साफ कपड़े में लपेटकर रखें. ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम होता है.
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इसी तरह पूजा कक्ष में लाइटर या किसी भी तरह की ज्वलनशील वस्तुओं को भी रखने से बचना चाहिए. अगरबत्ती या दीपक जलाने के बाद जली हुई माचिस को देवता के पास नहीं रखना चाहिए.
ऐसा करने से गरीबी और नकारात्मकता आती है. अगरबत्ती की राख को भी नियमित रूप से हटा देनी चाहिए, क्योंकि पूजा कक्ष में इसकी उपस्थिति पितृ दोष का कारण बनती है, जिससे घर में दुर्भाग्य आता है.
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