Stray Dog Attack: भारत में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या अब एक बड़ी चिंता बनती जा रही है. कई शहरों और कस्बों में लोग खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं. रैबीज जैसे खतरनाक रोग का डर भी लोगों के मन में बना रहता है. कुछ लोग गुस्से में यह तक कह रहे हैं कि सिर्फ शेल्टर होम से काम नहीं चलेगा और बड़ी संख्या में कुत्तों को खत्म करना पड़ेगा. उनका मानना है कि तभी इंसानों की जान बच सकेगी.
हाल ही में X पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसने लोगों को झकझोर कर रख दिया. वीडियो में एक महिला अपने घर के बाहर गली में खड़ी होकर फोन पर बात कर रही थी. तभी अचानक एक आवारा कुत्ता उसके पास आया और उस पर हमला कर दिया. कुत्ते ने पहले उसके पैर को काटने की कोशिश की. महिला ने खुद को बचाने के लिए भागने की कोशिश की, लेकिन कुत्ता दोबारा उस पर झपटा और वह गिर गई, महिला चीखने लगी. उसकी चीख सुनकर आसपास के लोग दौड़कर आते हैं और किसी तरह कुत्ते को भगाते हैं.
भारत में जितने आवारा कुत्ते हैं वह बहुत बड़ी समस्या बन चुके हैं
शेल्टर होम से काम नहीं चलेगा
करीब 30 परसेंट कुत्तों को विदेशो की तरह इंजेक्शन लगाकर खत्म करना होगा
तब जाकर लोगों का लगातार रैबीज से मारना रुकेगा
वरना इंसान रैबीज से तड़प तड़प कर पागल होकर मरते रहेंगे और कपिल… pic.twitter.com/qUv06YcKf9
— 🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳 (@jpsin1) February 16, 2026
क्या मारना ही समाधान है?
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई. एक यूजर ने लिखा, “भारत में इंसान ज्यादा जरूरी है या जानवर? अगर ऐसे ही सोचना है तो 30% इंसानों को जहर दे दें? कुत्तों को वैक्सीन दी जा सकती है, बीमार कुत्तों को पहचान कर शेल्टर में रखा जा सकता है. जहर देकर मारना क्या लॉजिक है?” लोगों का कहना है कि समस्या असली है, लेकिन उसका हल सोच-समझकर निकालना होगा. गुस्से में लिया गया फैसला कई नई परेशानियां खड़ी कर सकता है.
रैबीज का डर और सच्चाई
रैबीज एक जानलेवा बीमारी है. अगर समय पर इलाज न मिले, तो यह इंसान की जान ले सकती है. यही वजह है कि लोग डरे हुए हैं. लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन, नसबंदी और निगरानी से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.
समाधान क्या हो सकता है?
एक अन्य यूजर ने लिखा कि भावना और गुस्से से नहीं, समझदारी से काम लेने की जरूरत है. सिर्फ शेल्टर होम से काम नहीं चलेगा, यह भी सच है. इसलिए समस्या का हल इंसानियत और जिम्मेदारी से निकलेगा, न कि नफरत से. ऐसे में जानें ये समाधान-
- आवारा कुत्तों की गिनती और पहचान
- बड़े स्तर पर वैक्सीनेशन अभियान
- नसबंदी कार्यक्रम
- बीमार और आक्रामक कुत्तों को अलग रखना
- लोगों को जागरूक करना कि कुत्तों से कैसे सुरक्षित रहें

