VIROSH Wedding: होलाष्टक में शनि की राशि में 5 ग्रहों का ‘महाजाल’, क्यों गजब है Rashmika-Vijay की शादी?

सतीश कुमार
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Rashmika-Vijay Wedding: भारतीय सिनेमा के दो सबसे चमकीले सितारे, रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा, अब हमेशा के लिए एक-दूसरे के होने जा रहे हैं. उदयपुर के झीलों के बीच स्थित ‘मेमेन्टोस बाय आईटीसी होटल्स’ में 24 फरवरी 2026 से शुरू हुआ यह उत्सव केवल दो फिल्मी सितारों का मिलन नहीं है.

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस शादी की स्क्रिप्ट उन ग्रहों ने लिखी है जो ब्रह्मांड में बैठकर मानव जीवन की दिशा तय करते हैं. जहां पूरी दुनिया होलाष्टक (Holashtak) के समय को लेकर संशय में है, वहीं इस जोड़ी ने ग्रहों की एक ऐसी शुभ स्थिति को चुना है, जिसने ज्योतिष जगत को हैरान कर दिया है.

होलाष्टक में क्या शादी करना सही है?

पंचांग के अनुसार, आज 24 फरवरी 2026 यानी फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से होलाष्टक प्रारंभ हो चुका है. हिंदू धर्मग्रंथों में यह काल खंड किसी भी शुभ कार्य के लिए वर्जित माना जाता है क्योंकि इन आठ दिनों में ग्रह उग्र अवस्था में होते हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार, इन्हीं दिनों में भक्त प्रह्लाद को उनके पिता हिरण्यकशिपु ने प्रताड़ित किया था.

लेकिन यहां विजय और रश्मिका के निर्णय के पीछे एक गहरा ज्योतिषीय समाधान (Antidote) काम कर रहा है. ज्योतिष शास्त्र के आधारभूत ग्रंथ ‘मुहूर्त चिंतामणि’ में स्पष्ट उल्लेख है कि यदि लग्न बलवान हो और कुंडली में गुरु (Jupiter) व चंद्रमा (Moon) की स्थिति शुभ हो, तो होलाष्टक का दोष समाप्त हो जाता है.

विजय और रश्मिका की सामूहिक कुंडली में इस समय ‘अमृत सिद्धि योग’ का निर्माण हो रहा है. यह योग हर प्रकार की नकारात्मकता को भस्म करने की शक्ति रखता है. 26 फरवरी का दिन चुनकर इस जोड़े ने यह साबित किया है कि सही संकल्प और ग्रहों के संतुलन से किसी भी ‘कठिन समय’ को ‘शुभ समय’ में बदला जा सकता है.

शनि की राशि (कुंभ) में 5 ग्रहों का दुर्लभ ‘महासंगम’

इस शादी की सबसे बड़ी खगोलीय घटना कुंभ राशि (Aquarius) में घटित हो रही है. पंचांग के अनुसार, 23 फरवरी को ‘मंगल’ (Mars) ने कुंभ राशि में प्रवेश किया है. मंगल के इस प्रवेश के साथ ही कुंभ राशि (जो कि शनि की अपनी राशि है) में एक अभूतपूर्व स्थिति बन गई है.

वर्तमान में कुंभ राशि में सूर्य, बुध, गुरु, शनि और मंगल एक साथ विराजमान हैं. इसे ज्योतिष में ‘पंचग्रही युति’ कहा जाता है. जब शनि की राशि में गुरु और मंगल जैसे शक्तिशाली ग्रह मिलते हैं, तो यह ‘अखंड साम्राज्य योग’ का निर्माण करता है.

विजय के लिए यह गोचर उनके करियर का स्वर्ण काल शुरू कर रहा है. मंगल का कुंभ में होना उनके ‘पब्लिक इमेज’ को स्थिरता देगा और गुरु की उपस्थिति उन्हें एक जिम्मेदार पारिवारिक व्यक्ति के रूप में स्थापित करेगी. पंचांग के अनुसार, यह योग आर्थिक समृद्धि का भी प्रतीक है, जिससे इस जोड़ी के पास आने वाले समय में अपार धन-संपदा के योग बनेंगे.

मिथुन का गजकेसरी योग: श्रीवल्ली के भाग्य का उदय

विवाह के मुख्य दिन, यानी 26 फरवरी को जब पाणिग्रहण संस्कार होगा, तब चंद्रमा मिथुन राशि (Gemini) में गोचर कर रहा होगा. यहां सबसे गजब की बात यह है कि कुंभ राशि में उच्च दृष्टि रखने वाले गुरु (Jupiter) की नौवीं अमृतमयी दृष्टि सीधे मिथुन राशि के चंद्रमा पर पड़ रही है.

  1. गजकेसरी योग का फल: ज्योतिष ग्रंथों के अनुसार, चंद्रमा और गुरु का यह संबंध ‘गजकेसरी योग’ बनाता है. ‘गज’ (हाथी) और ‘केसरी’ (शेर) का यह मेल व्यक्ति को समाज में अपार मान-सम्मान, अधिकार और अटूट संपत्ति प्रदान करता है.
  2. रश्मिका मंदाना का राजयोग: रश्मिका के चंचल और मिलनसार व्यक्तित्व के लिए मिथुन का चंद्रमा अत्यंत अनुकूल है. गुरु का यह आशीर्वाद उन्हें न केवल एक सफल जीवनसाथी बनाएगा, बल्कि उनकी Global Brand Value को भी सातवें आसमान पर ले जाएगा. शादी के बाद रश्मिका की लोकप्रियता केवल भारत तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वे एक अंतरराष्ट्रीय आइकन के रूप में उभरेंगी.

सोशल मीडिया पर छाया ‘The Wedding of VIROSH’

गूगल ट्रेंड्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस समय #ViRoshWedding की ही चर्चा है. उदयपुर के वेडिंग वेन्यू से आ रही ताजा हलचल पर सभी की नजर है. शनि की राशि ‘कुंभ’ में 5 ग्रहों की युति इस शादी को बेहद अनुशासित ढंग से आयोजित करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं.

प्रशंसकों ने सालों पहले इस जोड़ी को ‘विरोश’ नाम दिया था. विजय और रश्मिका ने इस प्रेम को सम्मान देते हुए अपनी शादी को आधिकारिक तौर पर ‘The Wedding of VIROSH’ का नाम दिया है.

24 फरवरी की रात को संगीत समारोह से पहले एक बेहद निजी जापानी डिनर का आयोजन किया गया. सूत्रों के अनुसार, रश्मिका ने इस दौरान विजय के लिए अपनी पहली मुलाकात से लेकर अब तक के सफर का एक स्पेशल वीडियो ट्रिब्यूट साझा किया, जिसे देखकर वहां मौजूद सभी अतिथि भावुक हो गए.

शादी के वेन्यू पर ‘Anti-Drone System’ लगाया गया है और मेहमानों के लिए सख्त ‘नो-फोन पॉलिसी’ लागू की गई है. कपल चाहता है कि उनकी शादी की पहली तस्वीर पूरी तरह से पारंपरिक और आधिकारिक हो.

धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

पंचांग के अनुसार, विवाह की इन तिथियों में केवल ग्रहों का खेल नहीं है, बल्कि दैवीय आशीर्वाद भी शामिल है. 25 फरवरी को अन्नपूर्णा अष्टमी है. देवी अन्नपूर्णा को संपन्नता और पोषण की देवी माना जाता है. इस तिथि के प्रभाव में गृहस्थी शुरू करने से घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती.

वर्तमान में राजस्थान की पावन धरा पर खाटू श्याम महोत्सव भी चल रहा है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, ‘कलियुग के अवतारी’ बाबा श्याम के मेले के दौरान शुरू हुआ कोई भी पवित्र कार्य अटूट और अमर होता है. विजय और रश्मिका ने अनजाने में ही सही, लेकिन एक बहुत ही पवित्र कालखंड का चुनाव किया है.

भविष्य की भविष्यवाणी: शुक्र और बुध का बड़ा बदलाव

पंचांग के अनुसार, 1 मार्च को ‘शुक्र’ (Venus) अपनी उच्च राशि मीन में प्रवेश करेगा और इसी के साथ ‘बुध’ अस्त हो जाएगा. शुक्र प्रेम, कला और ऐश्वर्य का स्वामी है. शादी के मात्र तीन दिन बाद शुक्र का उच्च राशि में जाना यह संकेत देता है कि यह जोड़ा अपने हनीमून से लौटते ही किसी बहुत बड़े International Project या हॉलीवुड फिल्म की घोषणा कर सकता है.

बुध वाणी का कारक है. इसके अस्त होने के कारण सलाह है कि वे विवाह के तुरंत बाद कम से कम 11 दिनों तक मीडिया और सार्वजनिक बयानों से दूर रहकर अपनी निजी जिंदगी का आनंद लें.

खान-पान और उत्सव की भव्यता

सोशल मीडिया पर चर्चा है कि शादी का मेनू कूर्गी (Coorgi) और तेलुगु (Telugu) परंपराओं का एक बेजोड़ संगम है. रश्मिका की कूर्गी जड़ों से ‘कदमपुट्टू’ (राइस बॉल्स) और विजय की विरासत से ‘हैदराबादी जाफरानी पुलाव’ को शामिल किया गया है. यह दर्शाता है कि यह जोड़ा अपनी जड़ों और संस्कृति के प्रति कितना गंभीर है.

क्यों है यह एक ‘मास्टरस्ट्रोक’ फैसला?

अक्सर लोग होलाष्टक के नाम से डरकर शुभ कार्यों को टाल देते हैं, लेकिन विजय और रश्मिका ने ग्रहों के विज्ञान का सहारा लेकर एक साहसी उदाहरण पेश किया है. कुंभ राशि में 5 ग्रहों की युति और मिथुन का गजकेसरी योग यह साबित करता है कि यह दिन कोई सामान्य चुनाव नहीं, बल्कि एक रणनीतिक और सफल फैसला है. यह मिलन केवल दो फिल्म स्टार्स का नहीं, बल्कि शक्ति, प्रसिद्धि और आध्यात्मिकता का महासंगम है.

26 फरवरी की शाम, जब उदयपुर के शाही मंडप में ‘अर्जुन’ (विजय) अपनी ‘श्रीवल्ली’ (रश्मिका) का हाथ थामेंगे, तो पूरा ब्रह्मांड इस ऐतिहासिक गठबंधन का साक्षी बनेगा. होलाष्टक की अग्नि में तपकर इनका प्रेम कुंदन की तरह निखरेगा और आने वाले वर्षों में यह जोड़ी भारतीय सिनेमा के लिए सफलता के नए प्रतिमान स्थापित करेगी.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.