When to Replace Underwear: कितने दिन बाद फेंक देना चाहिए पुराना अंडरवियर, कब बन जाता है यह बीमारी की वजह?

सतीश कुमार
4 Min Read


How Often Should You Replace Underwear:कुछ चीजें ऐसी होती हैं, जो हमारे शरीर के संपर्क में हमेशा होती हैं, उनमें एक है अंडरगारमेंट्स. बाहरी कपड़ों के उल्टा, इनरवियर सीधे पसीने, बैक्टीरिया, डेड बॉडी सेल्स और शरीर की गंध के संपर्क में रहते हैं. अधिकतर लोग इन्हें नियमित रूप से धोते तो हैं, लेकिन एक्सपर्ट का का कहना है कि सिर्फ धोना ही काफी नहीं है. चलिए आपको बताते हैं कि कितने महीने या साल बाद आपको अपना अंडरवियर बदल लेना चाहिए. 

एक्सपर्ट के अनुसार, अंडरगारमेंट्स की भी एक तय उम्र होती है. भले ही वे ऊपर से साफ और ठीक दिखें, लेकिन उन्हें हमेशा के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. आमतौर पर सलाह दी जाती है कि हर 6 से 12 महीने में इनरवियर बदल देना चाहिए. समय के साथ कपड़े के रेशों में ऐसे बदलाव आने लगते हैं जो बैक्टीरिया और फंगस के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण बना देते हैं.

क्या होते हैं नुकसान?

पुराने या ठीक से साफ न किए गए अंडरगारमेंट्स पहनने से त्वचा में जलन, खुजली, इंफेक्शन और अन्य हाइजीन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. समय-समय पर बदलना भी काफी अहम है. एम्स , हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड से प्रशिक्षित एक प्रसिद्ध गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और लिवर एक्सपर्ट डॉ. सौरभ सेठी  के अनुसार, हर एक इस्तेमाल के बाद इसको साफ करना जरूरी होता है.

 

बदलना क्यों जरूरी?

दरअसल, लगातार इस्तेमाल और धुलाई के कारण कपड़े के रेशों में छोटे छेद बनने लगते हैं. इन बेहद छोटे छेदों में बैक्टीरिया, फंगस, डेड स्किन और शारीरिक द्रव फंस सकते हैं, जिन्हें सामान्य धुलाई से पूरी तरह हटाना संभव नहीं होता. यही जमा गंदगी दुर्गंध और त्वचा संक्रमण का कारण बन सकती है. कुछ संकेत ऐसे भी होते हैं जो बताते हैं कि अब अंडरगारमेंट बदलने का समय आ गया है. यदि इलास्टिक ढीली हो जाए, कपड़ा पतला पड़ने लगे या छोटे-छोटे छेद दिखने लगें, तो समझिए उसे बदलना चाहिए. जिद्दी दाग, जो धुलने के बाद भी बने रहें, या धोने के बाद भी आने वाली बदबू भी इस बात का संकेत है कि कपड़ा अपनी क्वालिटी खो चुका है. रंग फीका पड़ना भी फैब्रिक के खराब होने का इशारा है.

एक्सपर्ट क्या कहते हैं?

अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी की सलाह है कि अंडरगारमेंट्स रोज बदले जाएं, खासकर तब जब अधिक पसीना आता हो या मौसम गर्म हो. वहीं मायो क्लीनिक भी कहता है कि गर्म, नम या धूलभरे माहौल में इनरवियर दिन में एक से ज्यादा बार बदलना पड़ सकता है. शरीर की गर्मी, नमी और रगड़ माइक्रोबियल ग्रोथ के लिए अनुकूल माहौल बनाते हैं, जिससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है।

फैब्रिक का चुनाव भी महत्वपूर्ण है. रिसर्च बताते हैं कि कॉटन जैसे प्राकृतिक और सांस लेने वाले कपड़े त्वचा के लिए बेहतर होते हैं. ये नमी को सोखते हैं और हवा का फ्लो बनाए रखते हैं, जिससे यीस्ट और बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा कम होता है. इसके विपरीत, सिंथेटिक कपड़े नमी को फंसा सकते हैं और जलन या एलर्जी की संभावना बढ़ा सकते हैं.

ये भी पढ़ें: RSV से हर साल 100000 बच्चों की होती है मौत, WHO के हिसाब से जानें कब लगवाएं इसकी वैक्सीन?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator





Source link

Share This Article
Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.