India’s Wholesale Inflation: महंगाई के मोर्चे पर साल 2026 की शुरुआत झटका देने वाली रही है, जिसकी वजह से केन्द्र सरकार से लेकर आरबीआई तक की भौंहे इस खबर के बाद तन सकती है. केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्राल की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार, थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर जनवरी में लगातार तीसरे महीने बढ़कर 1.81 प्रतिशत पर पहुंच गई. दिसंबर 2025 में यह 0.83 प्रतिशत थी, जबकि पिछले साल जनवरी में 2.51 प्रतिशत दर्ज की गई थी.
महंगाई के मोर्चे पर झटका
उद्योग मंत्रालय के मुताबिक, मूल धातुओं के विनिर्माण, अन्य विनिर्मित उत्पादों, गैर-खाद्य वस्तुओं, खाद्य पदार्थों और वस्त्रों की कीमतों में बढ़ोतरी इसके पीछे प्रमुख कारण रही. आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में खाद्य वस्तुओं की थोक महंगाई 1.55 प्रतिशत रही, जबकि दिसंबर में इसमें 0.43 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी. सब्जियों की महंगाई दर जनवरी में 6.78 प्रतिशत रही, जो दिसंबर में नकारात्मक 3.50 प्रतिशत थी.
गैर-खाद्य वस्तुओं में ज्यादा तेजी
विनिर्मित उत्पादों में थोक महंगाई बढ़कर 2.86 प्रतिशत हो गई, जो दिसंबर में 1.82 प्रतिशत थी. गैर-खाद्य वस्तुओं की श्रेणी में तेज उछाल देखने को मिला और यह 7.58 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि दिसंबर में यह 2.95 प्रतिशत थी. हालांकि ईंधन और बिजली क्षेत्र में महंगाई दर अपेक्षाकृत नियंत्रित रही और जनवरी में 4.01 प्रतिशत दर्ज की गई.
इससे पहले खुदरा महंगाई (CPI) भी जनवरी में बढ़कर 2.75 प्रतिशत पर पहुंच गई थी. ब्याज दरों के निर्धारण के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया खुदरा मुद्रास्फीति को आधार मानता है. केंद्रीय बैंक चालू वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक रेपो दर में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती कर चुका है, जिससे रेपो दर घटकर 5.5 प्रतिशत रह गई है. थोक महंगाई में यह उछाल भविष्य की मौद्रिक नीति और ब्याज दरों के रुख पर असर डाल सकता है.

