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इंसान के दिमाग से चलेगा सुपरकंप्यूटर! इस देश की नई टेक्नोलॉजी

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By Aman Shanti .In On August 26, 2026
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI लगातार लोगों की बीच तेजी से अपने पैर पसार रहा है. टेक्नोलॉजी की दुनिया में एआई ने लोगों के काम को काफी हद तक आसान बनाने का काम किया है. लेकिन इसी कड़ी में एक नई खबर सामने आई है जहां पर अब सुपरकंप्यूटर को दिमाग से चलाने का दावा किया जा रहा है. दरअसल, आपको बता दें कि आज के समय में ज्यादातर एआई सिस्टम कंप्यूटरों पर काम करते हैं जो पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक्स और सिलिकॉन चिप्स पर निर्भर करते हैं.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सिंगापुर में एक ऐसा सिस्टम तैयार किया जा रहा है जिसमें कंप्यूटर के हिस्से की जगह पर अब इंसान की दिमाग यानी न्यूरॉन्स का इस्तेमाल किया जा रहा है.

सिंगापुर में तैयार हुआ अनोखा बायोलॉजिकल सर्वर

जानकारी के अनुसार, इस प्रोजेक्ट पर नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (NUS) के Yong Loo Lin School of Medicine, डेटा सेंटर ऑपरेटर DayOne और ऑस्ट्रेलियाई बायोलॉजिकल कंप्यूटिंग कंपनी Cortical Labs मिलकर काम कर रहे हैं.

टीम ने 20 CL1 यूनिट्स को एक सर्वर रैक में लगाया है. इसके अलावा इस रैक की सबसे बड़ी खास बात ये है कि ये दुनिया का पहला अपने आप चलने वाला रैक बन गया है. इसके अलावा इस रैक में एक हिस्सा ह्यूमन न्यूरॉन्स से चलेगा.

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बताया जा रहा है कि इस पूरे सिस्टम में 20 CL1 यूनिट शामिल हैं. हर यूनिट में लैब में तैयार किए गए करीब 8 लाख ह्यूमन न्यूरॉन्स मौजूद हैं. इसका मतलब ये है कि इन न्यूरॉन्स को इलेक्ट्रिक सिग्नल मिलेगा और वे इस सिग्नल पर अपना रिएक्शन देंगे और मैसेज भेजने का काम करेंगे. इस प्रोसेस से ये होगा कि ये सिर्फ मैसेज ट्रांसफर करने के बजाय अपने आप रिएक्शन देना सीख जाएंगे.

एआई के लिए क्यों जरूरी ये टेक्नोलॉजी

दरअसल, इस रिसर्च का सबसे बड़ा मकसद बेहतर एनर्जी एफिशिएंसी वाली कंप्यूटिंग को समझना है. वैज्ञानिक ये पता लगाना चाहते हैं कि क्या ह्यूमन न्यूरॉन्स कुछ कंप्यूटिंग काम पुराने चिप्स के मुकाबले में कम एनर्जी लेते सकते हैं या नहीं.

बता दें कि अगर ये रिसर्च सफल होता है तो इसका इस्तेमाल सिर्फ एआई और कंप्यूटिंग तक ही सीमित नहीं रहने वाला है बल्कि इसे दवाओं की खोज, मेडिकल रिसर्च और दिमाग से जुड़ी बीमारियों को बेहतर तरीके से समझने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

कैसे लगाए जाएंगे ह्यूमन न्यूरॉन्स

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Cortical Labs इंसानी स्टेम सेल्स से न्यूरॉन्स तैयार करता है. इन्हें एक खास सिलिकॉन प्लेटफॉर्म पर रखा जाता है जिसमें बेहद छोटे इलेक्ट्रोड लगे होते हैं. अब ये इलेक्ट्रोड न्यूरॉन्स तक इलेक्ट्रिकल सिग्नल पहुंचाने के साथ-साथ उनसे मिलने वाले सिग्नल को रिकॉर्ड करने का भी काम करते हैं.

बता दें कि इसके बाद ये सेल्स एक बॉयोलॉजिकल ऑपरेटिंग सिस्टम से कनेक्ट होते हैं. बता दें कि इसमें एक सॉफ्टवेयर का भी काम होता है जो कंप्यूटर और ह्यूमन न्योरॉन्स के बीच एक फीडबैक तैयार करता है. जैसे ही कोई मैसेज ह्यूमन न्यूरॉन को कोई सिग्नल भेजा जाता है तो न्यूरॉन उस पर क्या रिएक्शन देता है, इसकी पूरी जानकारी सॉफ्टवेयर में स्टोर होती रहती है. इसी प्रोसेस से ह्यूमन न्यूरॉन अपने आप किसी सिग्नल को रिएक्शन देना सीख पाती है.

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Satish Kumar एक डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और न्यूज़ पब्लिशर हैं। ये Sarkari Yojana, Technology News और Automobile Updates पर लेख लिखते हैं। इनके लेखों का उद्देश्य लोगों को सही और तेज जानकारी देना है।