क्या कृष्ण आज भी वृंदावन में विचरण करते हैं? जानिए इस रहस्यमयी जीवंत नगरी की सच्चाई

सतीश कुमार
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Vrindavan: वृंदावन में प्रवेश करते ही आप एक अदृश्य बदलाव को अनुभव कर सकते हैं. वृंदावन में राधे-राधे कोई मंत्रोच्चार ही नहीं, अपितु संकरी गलियों से गूंजती हुए हवा है, जो सालों से कृष्ण भक्ति से ओतप्रोत है, एक ऐसी जीवंत भक्ति जो अशांत मन को भी प्रभावित करती है. पहली बार वृंदावन आने वाले कई लोगों को इसका एहसास होता है.

चाहे आप बांके बिहारी मंदिर के सामने खड़े हों, भक्तों अपने देवता की एक झलक पाने के लिए लंबी-लंबी कतार में खड़े देख रहे हों या यमुना नदी के किनारे चाय की चुस्की ले रहे हों, वृंदावन आपको धीरे से एहसास कराता है कि, आप एक शाश्वत भक्ति के अनुभव का हिस्सा है.

असली वृंदावन भूली हुई गलियों में है!

वृंदावन आने वाले अधिकतर श्रद्धालु एक प्रसिद्ध मंदिर से दूसरे प्रसिद्ध मंदिर के दर्शन करते हुए इस्कॉन वृंदावन, राधा रमण मंदिर और यमुना नदी के किनारे के जीवंत घाटों को देखते हैं, जबकि असली वृंदावन वहां की भूली हुई गलियों और पवित्र उपवनों मे छिपा है, जहां आज भी सुबह-सुबह मोर कृष्ण भक्ति में नृत्य करते हैं और वृद्ध साधु चैतन्य महाप्रभु की कहानियां सुनाते हैं, जिन्होंने सालों पहले यहां भक्ति आंदोलन को पुनर्जीवित किया था.

वृंदावन में हलचल भरे बाजार के पीछे बसे एक प्राचीन आश्रम के दर्शन कीजिए. एक शांत और सौम्य संध्या भजन में शामिल होकर कृष्णामृत रस का स्वाद लीजिए, या फिर राधा रानी के नाम स्मरण के साथ कृष्ण की चंचल लीलाओं में खो जाइए. यह वृंदावन का वह रूप है, जिसके बारे में शायद ही कोई बात करें, जो तस्वीरों में नहीं दिखता, बल्कि वास्तविक छिपा हुआ और अत्यंत भक्तिभाव से भरा है.

मान्यता है कि कृष्ण आज भी वृंदावन में विचरण करते हैं, क्या ये सच हो सकता है?

वृंदावन के लोगों का मानना है कि, कृष्ण ने कभी वृंदावन को छोड़ा ही नहीं, उनकी दिव्य उपस्थित आज भी हर तुलसी के पौधे और हर मंदिर की घंटी में समाहित है. निधिवन में नंगे पैर खड़े होने पर आप इसका अनुभव प्राप्त कर सकते हैं, यह पवित्र उपवन जहां कृष्ण राधा और हजारों गोपियां रात्रि के समय नृत्य करते थे.

आज भी शाम होते हैं निधिवन को श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिया जाता है. इसकी देखभाल करने वाले कहते हैं कि, चांदनी रात में पेड़ों के नीचे क्या होता यह देखने और वहां रुकने की हिम्मत किसी में नहीं है.

चाहे आप इसे मिथक मानें या चमत्कार ये कहानियां इस कस्बे में सजीव है. ये कहानियां यहां की आध्यात्मिक यात्रा को मात्र एक भौतिक तीर्थयात्रा से कहीं ज्यादा खास बना देती है. यह ईश्वर और भक्त के बीच एक शाश्वत प्रेम की कहानी में प्रवेश करने का सुनहेरा मौका है.

वृंदावन का वह मंदिर जो बदलाव का एहसास दिलाता है

वृंदावन में 5 हजार से ज्यादा छोटे-बड़े मंदिर हैं, जो वहां आने वाले आंगतुकों को अवर्णनीय रूप से प्रभावित करते हैं. राधा वल्लभ मंदिर जो कम प्रसिद्ध होते हुए भी काफी श्रद्धावान है. बाकि मंदिरों के विपरीत यहां राधा की पूजा मूर्ति के रूप में नहीं, बल्कि कृष्ण के साथ एक अदृश्य उपस्थिति के रूप में की जाती है, जो प्रेम के अदृश्य लेकिन अटूट बंधन का प्रतीक है.

स्थानीय लोगों का मानना है कि, अगर आप यहां बैठकर साधु-संतों के साथ मंत्रोच्चार करते हैं तो वृंदावन अपना प्रभाव दिखाता है. यह स्थान दुनिया के शोर से दूर आपको कृ्ष्ण भक्ति के लिए प्रेरित करता है.

क्या वृंदावन एक जीवंत प्रार्थना स्थल है?

वृंदावन की भीड़-भाड़ वाली गलियों में घूमते हुए आप खुद को दुनिया के कोने-कोने से आए प्रत्येक कृ्ष्ण भक्त को नाम जाप करते देख सकते हैं. श्रील प्रभुपाद द्वारा स्थापित जीवंत इस्कॉन वृंदावन समुदाय लोगों को कृष्ण भक्ति के लिए प्रेरित करता है.

होली जैसे रंगारंग पर्व से लेकर यमुना नदी के किनारे होने वाली दैनिक आरती तक जो दिव्य प्रेम का सबसे उमंगमय उत्सव है, वृंदावन मात्र एक शहर नहीं है, बल्कि एक गतिशील प्रार्थना है. यह आपको निरंतर याद दिलाता है कि, भक्ति का उपदेश मात्र मंत्र जाप या पूजा-पाठ नहीं, बल्कि उसे अपने जीवन में आत्मसात करना है.

वृंदावन की भक्ति का असली स्वाद कैसे लें?

वृंदावन आ रहे हैं तो वहां एक पुराने आश्रम में रात बिताए, सूर्योदय से पहले उठें और तेल के दीपों और सुबह के भजनों से जगमगाती दुनिया में कदम रखें. यमुना नदी में जब सूर्य की पहली किरण पड़ती है, तो उसमें पवित्र स्नान करें. किसी भी छोटे मंदिर में जाएं और खुद को एक ऐसे कीर्तन में लीन पाएं जो भाषा और पहचान की सभी दिवारों को मिटा दें.

वृंदावन का जादू इन छोटे-छोटे पलों में महसूस किया जा सकता है. एक फुसफुसाती प्रार्थना, किसी अजनबी की मुस्कान, किसी प्राचीन मंदिर के नजदीक से गुजरती गाय की एक झलक. तीर्थयात्री आशीर्वाद की तलाश में आते हैं. कई लोग इस पवित्र भूमि में कदम रखने से पहले ही आशीर्वाद प्राप्त कर चुके होते हैं, और इसी एहसास के साथ वापस लौटते हैं.

चाहे आप यात्री हो या जिज्ञासु, आध्यात्मिक साधक हो, य भारत के पवित्र हृदय के बारे में जानने की इच्छा रखने वाले वृंदावन आपका सदैव खुले दिल से स्वागत करेगा. आप यहां कोई भी प्रश्न लेकर आइए, और जबाव लेकर लौटिए. क्योंकि यहां मौन में ही भक्ति का उत्तर मिल जाता है.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.