पेट्रोल-डीजल से इलेक्ट्रिक की ओर तेज रफ्तार, EV बदल रहे हैं ऑटो इंडस्ट्री का चेहरा | electric vehicles transforming indian automobile industry

सतीश कुमार
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नई दिल्ली. देश और दुनिया की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री इन दिनों एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है. जहां कभी पेट्रोल और डीजल गाड़ियों का दबदबा था, वहीं अब सड़कों पर इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EVs) की रफ्तार बढ़ रही है. पर्यावरण संरक्षण, बढ़ते ईंधन खर्च और सरकार की ईवी-फ्रेंडली पॉलिसी ने इस बदलाव को और तेज कर दिया है. भारत भी अब ‘ग्रीन मोबिलिटी’ के युग में एंट्री कर चुका है.

बदल रहा है ट्रांसपोर्टेशन का चेहरा
इलेक्ट्रिक वाहन सिर्फ एक नया ट्रेंड नहीं हैं, बल्कि यह भविष्य की जरूरत बनते जा रहे हैं. ट्रेडिशनल इंजन से चलने वाले वाहनों की जगह अब बैटरी चालित वाहन ले रहे हैं, जो न केवल प्रदूषण को घटाते हैं बल्कि लंबे समय में जेब पर भी हल्के पड़ते हैं. कार निर्माता कंपनियां चाहे टाटा मोटर्स हो, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एमजी मोटर्स या फिर हुंडई सभी अपनी ईवी रेंज को तेजी से बढ़ा रही हैं. वहीं, दोपहिया गाड़ियों में ओला इलेक्ट्रिक, एथर एनर्जी, टीवीएस और हीरो इलेक्ट्रिक जैसे ब्रांड मार्केट में मजबूत उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं.

सरकार की पहल से बढ़ी ईवी की रफ्तार
भारत सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक नई बिकने वाली सभी वाहनों में कम से कम 30% हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक वाहनों की हो. इसके लिए FAME-II योजना के तहत सब्सिडी, टैक्स रियायतें और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा दिया जा रहा है. केंद्र और राज्य सरकारें ईवी खरीदने वालों को रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में छूट दे रही हैं. दिल्ली, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और गुजरात जैसे राज्यों ने अपनी इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी के जरिए आम लोगों के लिए ईवी खरीदना और आसान बना दिया है.

चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बना बड़ी चुनौती
हालांकि ईवी सेक्टर तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन चार्जिंग स्टेशनों की कमी अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. फिलहाल मेट्रो शहरों में चार्जिंग स्टेशन की संख्या बढ़ रही है, लेकिन छोटे शहरों और हाइवे नेटवर्क में इसकी पहुंच अभी सीमित है. सरकार और प्राइवेट कंपनियां मिलकर इस दिशा में काम कर रही हैं. टाटा पावर, इंडियन ऑयल और BPCL जैसी कंपनियां देशभर में हजारों नए चार्जिंग पॉइंट्स स्थापित कर रही हैं ताकि ईवी यूजर्स को लंबी दूरी तय करने में परेशानी न हो.

ग्राहकों का बढ़ता भरोसा और गिरती लागत
पहले इलेक्ट्रिक वाहनों की सबसे बड़ी चुनौती उनकी कीमत थी. लेकिन अब बैटरी की कीमतों में लगातार गिरावट और सरकार की इंसेंटिव स्कीम से ईवी पहले से कहीं ज्यादा किफायती हो गए हैं. लोग धीरे-धीरे यह समझने लगे हैं कि हालांकि ईवी की शुरुआती कीमत थोड़ी ज्यादा हो सकती है, लेकिन पेट्रोल-डीजल की बचत और कम मेंटेनेंस कॉस्ट इसे लंबे समय में फायदेमंद बना देती है.

ऑटो इंडस्ट्री में नए रोजगार और निवेश के अवसर
ईवी इंडस्ट्री सिर्फ पर्यावरण के लिए फायदेमंद नहीं है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ा अवसर बनकर उभरी है. बैटरी मैन्युफैक्चरिंग, चार्जिंग स्टेशन सेटअप, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और सर्विस नेटवर्क के क्षेत्र में नए रोजगार तेजी से पैदा हो रहे हैं. कई विदेशी निवेशक भी भारतीय ईवी मार्केट की क्षमता को देखते हुए यहां निवेश कर रहे हैं. हाल ही में टेस्ला, फॉक्सकॉन और वोल्वो जैसी ग्लोबल कंपनियों ने भारत में प्रोडक्शन यूनिट्स स्थापित करने की दिशा में रुचि दिखाई है.

भविष्य की दिशा
इलेक्ट्रिक वाहनों का दौर अब सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं रहेगा. आने वाले समय में ग्रामीण इलाकों में भी ईवी की पहुंच बढ़ेगी. सोलर पावर चार्जिंग, बैटरी स्वैपिंग टेक्नोलॉजी और लोकल मैन्युफैक्चरिंग जैसी योजनाएं भारत को सस्टेनेबल मोबिलिटी की दिशा में अग्रणी बना सकती हैं.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.
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